8th Pay Commission Latest News: आठवें वेतन आयोग को लेकर केंद्र सरकार के कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ी हुई हैं। इसी बीच बोनस की गणना को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। कर्मचारियों के संगठनों ने लंबे समय से चली आ रही ₹7,000 की बोनस सीलिंग पर सवाल उठाते हुए इसे बढ़ाने की मांग की है।
मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब आठवें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों में वेतन, भत्तों और अन्य वित्तीय लाभों में बढ़ोतरी की उम्मीद है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि मौजूदा वेतन संरचना में ₹7,000 की पुरानी सीमा अब व्यावहारिक नहीं रह गई है।
सरकारी नोटिफिकेशन के बाद क्यों उठा बोनस का मुद्दा?
भारत सरकार का कहना है कि यदि केंद्र ने मिनिमम वेज को 7000 से अधिक कंसीडर किया तो अधिक वाले वेज के अनुसार बोनस का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। इसी आधार पर अगर सरकार केंद्रीय कर्मचारियों को भी मिनिमम वेतन 18000 के आधार पर बोनस का भुगतान करे तो कुल बोनस ₹18000×30÷30.4 के अनुसार… pic.twitter.com/ds47PNnqxG
— Dr Manjeet Singh Patel (@ManjeetIMOPS) September 4, 2026 श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की ओर से जारी गजट नोटिफिकेशन में Code on Wages, 2019 के तहत बोनस की गणना से जुड़ी व्यवस्था का उल्लेख है। इसके मुताबिक, निर्धारित वेतन सीमा से अधिक कमाने वाले कर्मचारी के बोनस की गणना तय सीमा या सरकार द्वारा अधिसूचित न्यूनतम मजदूरी के आधार पर की जा सकती है।
यही प्रावधान अब कर्मचारी संगठनों की मांग का आधार बन गया है। उनका कहना है कि अगर न्यूनतम मजदूरी और कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन में पिछले वर्षों में उल्लेखनीय बदलाव हुआ है, तो बोनस की गणना के लिए इस्तेमाल होने वाली सीमा को भी उसी अनुपात में संशोधित किया जाना चाहिए।
NC-JCM ने सरकार से क्या मांग की?
बोनस की मौजूदा व्यवस्था को लेकर National Council-Staff Side (NC-JCM) की ओर से सरकार के सामने मुद्दा उठाया गया है। संगठन के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने कैबिनेट सेक्रेटरी को पत्र भेजकर बोनस की सीमा में बदलाव की मांग की है।
कर्मचारी पक्ष का तर्क है कि अगर सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम मजदूरी ₹21,000 है, तो बोनस की गणना के लिए ₹7,000 की सीमा बनाए रखने का औचित्य नहीं है। संगठन चाहता है कि बोनस सीलिंग को बढ़ाकर ₹21,000 किया जाए।
₹7,000 से ₹21,000 की सीलिंग करने की मांग क्यों?
कर्मचारी संगठनों के अनुसार, मौजूदा ₹7,000 की सीमा करीब एक दशक पुरानी व्यवस्था को दर्शाती है। इस दौरान महंगाई, जीवन-यापन की लागत और कर्मचारियों के वेतन में काफी बदलाव हुआ है।
ऐसे में कर्मचारियों का कहना है कि बोनस की गणना में पुरानी सीमा बनाए रखने से वास्तविक वेतन वृद्धि का लाभ बोनस में पूरी तरह नहीं दिखाई देता।
यही वजह है कि कर्मचारी संगठन अब बोनस की गणना को मौजूदा न्यूनतम वेतन से जोड़ने की मांग कर रहे हैं।
₹18,000 न्यूनतम बेसिक के हिसाब से कितना बोनस बनता है?
ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है।
उनके अनुसार, अगर केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मौजूदा न्यूनतम बेसिक वेतन ₹18,000 को बोनस की गणना का आधार बनाया जाए, तो निर्धारित फॉर्मूले के अनुसार बोनस करीब ₹17,763 हो सकता है।
यह गणना ₹18,000 × 30 ÷ 30.4 के आधार पर बताई गई है।
कर्मचारी पक्ष का कहना है कि जब न्यूनतम बेसिक वेतन ₹18,000 है, तो बोनस की गणना के दौरान ₹7,000 की सीमा बनाए रखना तर्कसंगत नहीं है।
8th Pay Commission में ₹27,694 बोनस की मांग
बोनस को लेकर कर्मचारी संगठनों की मांग सिर्फ ₹21,000 की सीलिंग तक सीमित नहीं है। ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन की ओर से आठवें वेतन आयोग के तहत बोनस को बढ़ाकर ₹27,694 किए जाने की मांग भी सामने आई है।
कर्मचारी संगठनों का मानना है कि आठवें वेतन आयोग में जब केंद्रीय कर्मचारियों की वेतन संरचना पर व्यापक विचार किया जा रहा है, तो बोनस की पुरानी व्यवस्था की भी समीक्षा होनी चाहिए।
उनका तर्क है कि बोनस की गणना के लिए मौजूदा वेतन संरचना और आर्थिक परिस्थितियों को आधार बनाया जाना चाहिए, न कि वर्षों पुरानी सीमा को जारी रखा जाए।
10 साल से क्यों चर्चा में है ₹7,000 की सीमा?
कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी आपत्ति यह है कि ₹7,000 की बोनस सीलिंग लंबे समय से प्रभावी है, जबकि इस अवधि में वेतन और महंगाई दोनों में बड़ा बदलाव हुआ है।
कर्मचारियों का कहना है कि जब वेतन आयोगों के जरिए वेतन संरचना में बदलाव किया जाता है, तो बोनस की गणना के लिए इस्तेमाल होने वाली सीमा की भी समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए।
यही कारण है कि आठवें वेतन आयोग के दौर में यह मुद्दा एक बार फिर जोर पकड़ रहा है।
क्या 8th Pay Commission में बोनस बढ़ना तय है?
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि आठवें वेतन आयोग के तहत बोनस निश्चित रूप से ₹27,694 हो जाएगा। ₹21,000 या ₹27,694 की रकम फिलहाल कर्मचारी संगठनों की मांग और प्रस्ताव के रूप में सामने आई है।
अंतिम फैसला सरकार और संबंधित प्रक्रिया के तहत ही होगा। इसलिए कर्मचारियों को आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।
दशहरा-दिवाली से पहले कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ीं
त्योहारी सीजन नजदीक आने के साथ बोनस का मुद्दा कर्मचारियों के लिए और महत्वपूर्ण हो गया है। दशहरा और दिवाली से पहले अगर सरकार बोनस की गणना से जुड़ी पुरानी सीमा में बदलाव करती है, तो इससे बड़ी संख्या में कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।
फिलहाल कर्मचारियों और उनके संगठनों की नजर सरकार के अगले कदम पर है। आठवें वेतन आयोग के साथ बोनस की गणना में बदलाव होता है या ₹7,000 की मौजूदा सीमा ही जारी रहती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
Disclaimer
यह खबर कर्मचारी संगठनों की ओर से रखी गई मांगों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। ₹21,000 या ₹27,694 बोनस की रकम को सरकारी मंजूरी मिलने तक अंतिम निर्णय नहीं माना जाना चाहिए।


