Noida Homebuyer Fraud: नोएडा और ग्रेटर नोएडा में घर खरीदारों से कथित धोखाधड़ी और फंड डायवर्जन से जुड़े मामलों में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई जारी है। जांच एजेंसी ने अब अर्थकॉन यूनिवर्सल इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों के खिलाफ 19वीं चार्जशीट दाखिल की है। यह मामला ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-1 स्थित कासा रॉयल हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़ा है।
CBI ने यह चार्जशीट नई दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल की है। एजेंसी के मुताबिक, जांच के दौरान ऐसे साक्ष्य सामने आए हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि कंपनी और उसके निदेशकों ने घर खरीदारों तथा निवेशकों को कथित तौर पर भ्रामक जानकारी और वादों के जरिए निवेश के लिए आकर्षित किया।
कासा रॉयल प्रोजेक्ट से जुड़ा है पूरा मामला
CBI files 19th Chargesheet against Builder Company and its Directors/ officials in the Homebuyers Fraud Cases pic.twitter.com/ObZf3rE6sb
— Central Bureau of Investigation (India) (@CBIHeadquarters) September 3, 2026 CBI के अनुसार, मामला ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-1 में प्लॉट नंबर GH-10 पर विकसित किए गए कासा रॉयल हाउसिंग प्रोजेक्ट से संबंधित है। आरोप है कि प्रोजेक्ट में निवेश करने वाले खरीदारों को कई तरह के वादे और जानकारियां दी गईं, लेकिन बाद में उनके साथ कथित तौर पर धोखाधड़ी की गई।
जांच एजेंसी ने कंपनी अर्थकॉन यूनिवर्सल इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों को मामले में आरोपी बनाया है। चार्जशीट में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात से संबंधित प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं।
हालांकि, चार्जशीट में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
खरीदारों को कथित तौर पर दिए गए थे झूठे वादे
जांच के दौरान CBI ने आरोप लगाया है कि बिल्डर कंपनी और उसके निदेशकों ने संभावित खरीदारों और निवेशकों को प्रोजेक्ट से संबंधित कथित तौर पर भ्रामक जानकारी दी।
एजेंसी के मुताबिक, इन वादों के आधार पर लोगों से रकम ली गई और इसके बाद कथित तौर पर ऐसे तरीकों का इस्तेमाल किया गया, जिससे आरोपियों को वित्तीय लाभ हुआ और होमबायर्स के हित प्रभावित हुए।
CBI ने जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत के समक्ष अपना आरोप पत्र पेश किया है।
CBI ने कहा- आर्थिक अपराधों में जवाबदेही तय होगी
जांच एजेंसी ने अपने बयान में कहा है कि आम नागरिकों और घर खरीदारों के हितों को प्रभावित करने वाले आर्थिक अपराध, भ्रष्टाचार और सार्वजनिक धोखाधड़ी के मामलों में जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की दिशा में कार्रवाई जारी रहेगी।
होमबायर्स से जुड़े इन मामलों में खरीदारों की बड़ी रकम लंबे समय तक प्रोजेक्ट्स में फंसी रहने और घर मिलने में देरी जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई उन खरीदारों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिन्होंने वर्षों पहले घर खरीदने के लिए अपनी जमा पूंजी लगाई थी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद कई मामलों की जांच
CBI देशभर में होमबायर्स से कथित धोखाधड़ी और बिल्डर कंपनियों द्वारा फंड के कथित डायवर्जन से जुड़े कई मामलों की जांच कर रही है। एजेंसी करीब 30 अन्य मामलों की भी जांच कर रही है।
इन मामलों में अलग-अलग बिल्डर कंपनियों के साथ-साथ कुछ वित्तीय संस्थानों के अज्ञात अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
इससे पहले CBI ने रुद्र बिल्डवेल, जेपी इंफ्राटेक, एवीजे डेवलपर्स, लॉजिक्स सिटी, शुभकामना बिल्डटेक, नाइनएक्स और ओजोन अर्बना समेत कई बिल्डर कंपनियों, उनके निदेशकों और कुछ बैंक अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।
19वीं चार्जशीट क्यों अहम है?
अर्थकॉन यूनिवर्सल इंफ्राटेक के खिलाफ दाखिल यह चार्जशीट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह नोएडा-ग्रेटर नोएडा से जुड़े होमबायर मामलों में CBI की कार्रवाई की निरंतरता को दिखाती है।
रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में पैसा लगाने वाले खरीदारों के लिए ऐसे मामलों में सबसे बड़ा सवाल उनकी रकम और संपत्ति के अधिकारों से जुड़ा होता है। CBI की जांच और अदालत में चलने वाली कानूनी प्रक्रिया से यह तय होगा कि आरोपों में नामजद लोगों की भूमिका क्या थी और होमबायर्स को हुए कथित नुकसान की जिम्मेदारी किसकी बनती है।
फिलहाल अदालत में दाखिल चार्जशीट के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।


