Market Outlook: लगातार चार दिनों की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को मामूली रिकवरी दर्ज की। सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुए, लेकिन मिडकैप शेयरों में दबाव देखने को मिला। अब निवेशकों की नजर अगले कारोबारी सत्र में निफ्टी और बैंक निफ्टी के अहम सपोर्ट-रेजिस्टेंस स्तरों पर रहेगी।
भारतीय शेयर बाजार ने कारोबारी सप्ताह के आखिरी दिन सीमित दायरे में कारोबार किया। लगातार चार सत्रों की गिरावट के बाद प्रमुख इंडेक्स में हल्की रिकवरी देखने को मिली। हालांकि, बाजार में पूरी तरह मजबूती के संकेत नहीं मिले और मिडकैप शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा।
शुक्रवार को सेंसेक्स 363 अंक चढ़कर 76,515 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 24 अंक की बढ़त के साथ 23,898 पर बंद हुआ। कैपिटल मार्केट और मेटल शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। दूसरी तरफ रियल्टी, फार्मा और आईटी शेयरों में दबाव रहा।
बैंक निफ्टी 11 अंक गिरकर 57,370 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 156 अंक टूटकर 63,079 पर बंद हुआ। निफ्टी के 50 में से 28 शेयरों में गिरावट रही, जबकि सेंसेक्स के 30 में से 19 शेयर बढ़त में रहे। बैंक निफ्टी के 14 शेयरों में से 9 में बिकवाली देखने को मिली।
रुपये की बात करें तो भारतीय मुद्रा बिना किसी बड़े बदलाव के 94.49 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुई।
बाजार को लेकर एक्सपर्ट्स की राय
श्रीकांत चौहान ने बताया बाजार का हाल
कोटक सिक्योरिटीज के हेड ऑफ इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान के मुताबिक, शुक्रवार को निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स ने लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा और मामूली रिकवरी दर्ज की।
पूरे सप्ताह बाजार का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। निफ्टी मिडकैप 100 कमजोरी के साथ बंद हुआ, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया।
ग्लोबल मार्केट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भी देखने को मिला। इसके चलते इक्विटी बाजारों पर दबाव बढ़ा और ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी आई। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए महंगाई और राजकोषीय मोर्चे पर जोखिम बढ़ा सकती हैं।
इसके अलावा ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में भारी बिकवाली देखने को मिली। इसके कारण कई देशों की सॉवरेन बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेजी ने भारत समेत दुनियाभर के शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ाने का काम किया।
भारत की GDP ग्रोथ बनी सकारात्मक खबर
घरेलू अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर तस्वीर कुछ बेहतर रही। भारत की Q1FY27 रियल GDP ग्रोथ 7.8% रही, जो बाजार की उम्मीदों से बेहतर है। एक्सपोर्ट और निवेश में मजबूत वृद्धि ने आर्थिक विकास को सहारा दिया।
श्रीकांत चौहान के मुताबिक, हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स फिलहाल सकारात्मक बने हुए हैं। हालांकि, आने वाले समय में त्योहारों के बाद आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार महत्वपूर्ण होगी।
भारतीय रुपये ने भी सप्ताह के दौरान क्रूड और बॉन्ड यील्ड से जुड़े दबावों के बावजूद मजबूती दिखाई। इसमें FCNR डिपॉजिट से आने वाले विदेशी मुद्रा प्रवाह का भी समर्थन मिला।
विनोद नायर: तेजी के बावजूद बाजार में सावधानी जरूरी
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर के मुताबिक, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका कम होने से भारतीय शेयर बाजार को सपोर्ट मिला।
हालांकि, ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली और मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार की तेजी को सीमित रखा।
अब निवेशकों की नजर अमेरिकी रोजगार के आंकड़ों पर है। इसके अलावा अगले सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी CPI आंकड़े भी अहम रहेंगे, क्योंकि इनसे अमेरिकी ब्याज दरों की आगे की दिशा को लेकर बाजार को संकेत मिल सकते हैं।
अगस्त में कोर महंगाई में मामूली नरमी की उम्मीद से फेड की ओर से ब्याज दरों में बदलाव को कुछ समय के लिए टाले जाने की संभावना मजबूत हो सकती है। इससे बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव नियंत्रित रहने में मदद मिल सकती है।
घरेलू बाजार में चुनिंदा शेयरों और सेक्टरों में खरीदारी जारी रही। स्मॉलकैप इंडेक्स ने इंट्राडे में नया रिकॉर्ड स्तर भी बनाया। मजबूत अर्निंग ग्रोथ, टिकाऊ आर्थिक विकास और घरेलू मांग के कारण ब्रॉडर मार्केट को लेकर निवेशकों का भरोसा फिलहाल बना हुआ है।
Nifty Technical View: 23,700 का स्तर बेहद अहम
SBI Securities में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड सुदीप शाह के अनुसार, शुक्रवार को निफ्टी में करीब 107 अंकों की सीमित ट्रेडिंग रेंज देखने को मिली। इंडेक्स 0.10% की मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ।
डेली चार्ट पर निफ्टी ने अपर शैडो वाली छोटी बॉडी की बेयरिश कैंडल बनाई है। यह बाजार में अनिश्चितता और स्पष्ट दिशा की कमी का संकेत देती है।
पिछले पांच कारोबारी सत्रों में निफ्टी करीब 348 अंकों की रेंज में कारोबार करता रहा है। इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल इंडेक्स कंसोलिडेशन के दौर में है और किसी भी दिशा में निर्णायक ब्रेकआउट का इंतजार कर रहा है।
तकनीकी संकेतकों की बात करें तो निफ्टी अभी भी अपने 20-डे और 50-डे EMA के नीचे कारोबार कर रहा है। इससे निकट अवधि का ट्रेंड सतर्क बना हुआ है।
डेली RSI 30-50 के जोन में है, जो मजबूत मोमेंटम की कमी दर्शाता है। MACD जीरो लाइन के नीचे बना हुआ है, जिससे नकारात्मक रुझान का संकेत मिलता है। वहीं बढ़ता ADX बताता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है और दोनों दिशाओं में तेज मूव देखने को मिल सकता है।
निफ्टी के अहम सपोर्ट
आने वाले कारोबारी सत्र में 23,750-23,700 का जोन निफ्टी के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट बन सकता है। यह क्षेत्र 61.8% फिबोनाची रिट्रेसमेंट लेवल के आसपास है।
अगर निफ्टी 23,700 के नीचे टिकता है, तो कमजोरी बढ़ सकती है और इंडेक्स 23,600-23,570 के स्तर तक फिसल सकता है।
निफ्टी के रेजिस्टेंस
ऊपर की तरफ 24,050-24,080 तत्काल रेजिस्टेंस जोन रहेगा।
अगर निफ्टी लगातार 24,080 के ऊपर टिकने में सफल रहता है, तो इसमें रिकवरी तेज हो सकती है और इंडेक्स दोबारा 24,200 के स्तर की तरफ बढ़ सकता है।
Bank Nifty Technical View: 24 सेशन से एक ही दायरे में
बैंक निफ्टी को लेकर भी फिलहाल स्पष्ट दिशा नजर नहीं आ रही है। सुदीप शाह के मुताबिक, बैंक निफ्टी करीब 24 कारोबारी सत्रों से एक सीमित दायरे में बना हुआ है। यह बाजार में किसी एक दिशा में मजबूत मोमेंटम की कमी को दर्शाता है।
शुक्रवार को बैंक निफ्टी 0.02% की मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। डेली चार्ट पर इंडेक्स ने छोटी बॉडी वाली बेयरिश कैंडल बनाई, जिसके दोनों तरफ विक्स थीं। यह बाजार में अनिश्चितता का संकेत है।
डेली RSI करीब 50 के स्तर पर न्यूट्रल बना हुआ है। इससे भी मजबूत डायरेक्शनल मोमेंटम नहीं होने के संकेत मिलते हैं।
बैंक निफ्टी का सपोर्ट
बैंक निफ्टी के लिए 56,900-56,800 का जोन महत्वपूर्ण सपोर्ट बन सकता है। जब तक इंडेक्स इस क्षेत्र के ऊपर बना रहता है, तब तक मौजूदा कंसोलिडेशन जारी रहने की संभावना है।
अगर 56,800 के नीचे निर्णायक ब्रेकडाउन होता है, तो मौजूदा कंसोलिडेशन खत्म हो सकता है और कमजोरी की नई दिशा देखने को मिल सकती है।
बैंक निफ्टी का रेजिस्टेंस
ऊपर की तरफ 57,800-57,900 का जोन तत्काल रेजिस्टेंस रहेगा।
अगर बैंक निफ्टी इस जोन के ऊपर मजबूत ब्रेकआउट देता है, तो इंडेक्स में नई तेजी की शुरुआत हो सकती है। इसलिए अगले कारोबारी सत्र में 56,800 और 57,900 के स्तर खास तौर पर नजर में रहेंगे।
7 सितंबर को बाजार की चाल कैसी रह सकती है?
कुल मिलाकर भारतीय शेयर बाजार फिलहाल कंसोलिडेशन और अनिश्चितता के दौर में नजर आ रहा है। लगातार चार सत्रों की गिरावट के बाद शुक्रवार की रिकवरी सकारात्मक संकेत जरूर देती है, लेकिन अभी इसे मजबूत ट्रेंड रिवर्सल मानना जल्दबाजी होगी।
निफ्टी के लिए 23,700-23,750 सपोर्ट और 24,050-24,080 रेजिस्टेंस बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे। वहीं बैंक निफ्टी में 56,800 का सपोर्ट और 57,800-57,900 का रेजिस्टेंस अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में अगले कारोबारी सत्र में निवेशकों को तेजी और गिरावट दोनों तरफ के ब्रेकआउट पर नजर रखनी होगी।
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