नई दिल्ली। चीन की अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ने के बीच बीजिंग अब निवेश और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को गति देने की कोशिश में जुट गया है। आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने और जीडीपी ग्रोथ को मजबूती देने के लिए चीन की सरकार लगातार बैठकें कर रही है। इन बैठकों में फिक्स्ड-एसेट निवेश, निर्माण कार्यों और बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने पर खास जोर दिया जा रहा है।
चीन की आर्थिक योजना बनाने वाली प्रमुख संस्था नेशनल डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म कमीशन (NDRC) ने लगातार बैठकों के जरिए पंचवर्षीय योजना के तहत चल रहे और प्रस्तावित बड़े प्रोजेक्ट्स की समीक्षा शुरू कर दी है। इससे संकेत मिलता है कि कमजोर निवेश को लेकर चीनी सरकार की चिंता बढ़ रही है।
चीन की अर्थव्यवस्था को क्यों पड़ी सहारे की जरूरत?
चीन लंबे समय से अपनी अर्थव्यवस्था को रियल एस्टेट संकट, कमजोर घरेलू मांग और निवेश में सुस्ती जैसी चुनौतियों से उबारने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में सरकार का ध्यान अब ऐसे क्षेत्रों पर है, जहां सरकारी और निजी निवेश के जरिए आर्थिक गतिविधियों को तेजी दी जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर निर्माण और निवेश गतिविधियों में अपेक्षित तेजी नहीं आती है तो चीन की आर्थिक वृद्धि पर दबाव और बढ़ सकता है। यही वजह है कि बीजिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और फिक्स्ड-एसेट निवेश को आर्थिक ग्रोथ का महत्वपूर्ण सहारा मान रहा है।
NDRC ने लगातार दो दिन की बैठक
NDRC ने बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए लगातार दो दिनों तक बैठकें कीं। गुरुवार को कई मंत्रालयों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में नई पंचवर्षीय योजना के तहत प्रस्तावित 109 बड़े प्रोजेक्ट्स की प्रगति की समीक्षा की गई।
इन प्रोजेक्ट्स को समय पर आगे बढ़ाने, वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और सरकारी निवेश को प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने पर चर्चा हुई।
यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन अपनी 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026-2030) के शुरुआती चरण में है। इस पांच साल की योजना में आर्थिक विकास, तकनीकी क्षमता और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर खास जोर दिया जा रहा है।
2030 तक ‘छह नेटवर्क’ को अपग्रेड करने का लक्ष्य
NDRC ने एक अन्य बैठक में चीन के ‘छह नेटवर्क’ से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए वित्तपोषण व्यवस्था मजबूत करने पर चर्चा की। इस इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यक्रम का लक्ष्य 2030 तक देश के पानी, बिजली, कंप्यूटिंग, टेलीकम्युनिकेशन, लॉजिस्टिक्स और भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क को अपग्रेड करना है।
बैठक में वित्तीय संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के बीच जानकारी साझा करने की व्यवस्था बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। इसके अलावा निजी पूंजी को आकर्षित करने और सरकारी निवेश की भूमिका को अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई।
निजी निवेश को भी बढ़ावा देने की कोशिश
चीन अब केवल सरकारी खर्च के भरोसे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के बजाय निजी पूंजी की भागीदारी भी बढ़ाना चाहता है। अधिकारियों की बैठकों में निजी निवेश को बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जोड़ने और वित्तीय संस्थानों से बेहतर सहयोग लेने पर जोर दिया गया है।
पिछले सप्ताह हुई एक राष्ट्रीय बैठक में भी टेक्नोलॉजी इनोवेशन, औद्योगिक अपग्रेडिंग और शहरी नवीनीकरण जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर चर्चा हुई थी। अधिकारियों ने बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स के लिए सरकारी फंड तेजी से उपलब्ध कराने की बात भी कही।
फिक्स्ड-एसेट निवेश में आई बड़ी गिरावट
चीन के सामने सबसे बड़ी चिंताओं में से एक फिक्स्ड-एसेट निवेश में कमजोरी है। इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और प्रॉपर्टी कंस्ट्रक्शन जैसे प्रमुख क्षेत्रों को मिलाकर जनवरी-जुलाई की अवधि में कुल फिक्स्ड-एसेट निवेश में 6.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
निवेश में यह कमजोरी चीन की आर्थिक गतिविधियों के लिए चुनौती मानी जा रही है। खासकर प्रॉपर्टी सेक्टर की कमजोरी का असर निर्माण, रोजगार, स्टील, सीमेंट और दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों पर भी पड़ता है।
बीजिंग की प्राथमिकता अब निवेश बढ़ाना
UBS Securities के मुख्य चीन अर्थशास्त्री सोंग यू के मुताबिक, बीजिंग की प्राथमिकता फिलहाल निवेश को बढ़ावा देने पर है। सरकार बड़े प्रोजेक्ट्स को तेजी से लागू करके आर्थिक गतिविधियों को सहारा देने की कोशिश कर रही है।
चीन के लिए यह रणनीति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण क्षेत्र में सरकारी खर्च का असर कई दूसरे उद्योगों पर भी पड़ता है। अगर बड़े प्रोजेक्ट्स की रफ्तार बढ़ती है तो इससे निर्माण सामग्री, मशीनरी, परिवहन और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भी मांग पैदा हो सकती है।
15वीं पंचवर्षीय योजना पर क्यों है इतनी नजर?
2026 से 2030 की अवधि चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना का हिस्सा है। ऐसे में योजना के पहले ही साल बड़े प्रोजेक्ट्स की समीक्षा और फंडिंग को लेकर बैठकों का सिलसिला यह दिखाता है कि सरकार आर्थिक विकास को लेकर शुरुआती स्तर पर ही सक्रिय रहना चाहती है।
चीन के सामने चुनौती यह है कि सिर्फ सरकारी निवेश बढ़ाने से अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक मजबूत गति नहीं दी जा सकती। घरेलू खपत, निजी निवेश और प्रॉपर्टी सेक्टर में सुधार भी जरूरी होगा।
फिलहाल बीजिंग का जोर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को जमीन पर उतारने, फंडिंग व्यवस्था मजबूत करने और निजी पूंजी को आकर्षित करने पर है। आने वाले महीनों में इन कदमों का असर चीन की निवेश गतिविधियों और आर्थिक ग्रोथ पर कितना पड़ता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।


