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‘पीएम मोदी ने हमें पहले ही चेताया था…’, चीन पर यूरोप को हुआ अपनी गलती का एहसास, अब भारत के साथ बढ़ाएगा दोस्ती

Namam Sharma
Last updated: 2026/09/04 at 6:30 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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9 Min Read
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China Trade Threat: यूरोप अब चीन पर अपनी बढ़ती व्यापारिक और औद्योगिक निर्भरता के जोखिम को गंभीरता से समझ रहा है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने स्वीकार किया है कि भारत ने यूरोप को इस खतरे के बारे में काफी पहले आगाह किया था, लेकिन उस समय यूरोपीय देशों ने इस चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया। अब बदलते वैश्विक व्यापार माहौल के बीच यूरोप भारत को एक भरोसेमंद और रणनीतिक साझेदार के तौर पर देख रहा है।

Contents
चीन पर निर्भरता से यूरोप को क्या नुकसान हुआ?‘पीएम मोदी ने बहुत पहले ही चेतावनी दी थी’भारत को क्यों देख रहा है यूरोप भरोसेमंद पार्टनर के तौर पर?भारत और यूरोप के सामने कई चुनौतियां एक जैसीचीन का नाम लिए बिना साधा निशानाफ्री ट्रेड के साथ राष्ट्रीय हितों की रक्षा भी जरूरीभारत को बताया बड़ी लोकतांत्रिक ताकतभारत-यूरोप संबंधों में क्यों आ सकता है नया मोड़?निष्कर्ष

नई दिल्ली: वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और व्यापारिक तनाव के बीच यूरोप को अपनी पुरानी रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ रहा है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने यूरोप की चीन पर आर्थिक निर्भरता और उससे पैदा होने वाले जोखिमों को लेकर अहम टिप्पणी की है।

डी वेवर ने माना कि भारत ने यूरोपीय देशों को बहुत पहले ही आगाह कर दिया था कि किसी एक देश पर अत्यधिक व्यापारिक और औद्योगिक निर्भरता भविष्य में मुश्किल पैदा कर सकती है। हालांकि, उस समय यूरोप ने इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया। अब परिस्थितियां बदलने के बाद यूरोप को भारत की उस सलाह की अहमियत समझ में आ रही है।

चीन पर निर्भरता से यूरोप को क्या नुकसान हुआ?

बेल्जियम के प्रधानमंत्री के मुताबिक, यूरोप ने लंबे समय तक वैश्विक व्यापार में कम लागत वाले सामान और बड़े पैमाने पर आयात को प्राथमिकता दी। इससे यूरोपीय बाजार में सस्ते उत्पादों की उपलब्धता तो बढ़ी, लेकिन धीरे-धीरे घरेलू औद्योगिक क्षमता पर दबाव भी बढ़ता गया।

उनका कहना था कि जरूरत से ज्यादा आयात और औद्योगिक निर्भरता ने यूरोप के लिए ऐसी स्थिति पैदा कर दी, जिसमें कुछ अहम क्षेत्रों में बाहरी देशों पर उसकी निर्भरता बढ़ती चली गई।

डी वेवर ने इस बात पर चिंता जताई कि आर्थिक निर्भरता का इस्तेमाल केवल व्यापारिक फायदे के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक दबाव बनाने के लिए भी किया जा सकता है।

‘पीएम मोदी ने बहुत पहले ही चेतावनी दी थी’

भारत के साथ यूरोप की संभावित रणनीतिक साझेदारी पर सवाल के जवाब में डी वेवर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुरानी चेतावनी का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि भारत ने यूरोप को पहले ही यह समझाने की कोशिश की थी कि व्यापार और सप्लाई चेन में किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम पैदा कर सकती है। लेकिन यूरोप ने उस समय भारत की बात को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।

अब बेल्जियम के प्रधानमंत्री के मुताबिक यूरोप को इस बात का एहसास हो रहा है कि भारत की चिंता बेवजह नहीं थी।

यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया में सप्लाई चेन, तकनीक, महत्वपूर्ण कच्चे माल और रणनीतिक उद्योगों को लेकर देशों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।

भारत को क्यों देख रहा है यूरोप भरोसेमंद पार्टनर के तौर पर?

डी वेवर ने भारत को यूरोप के संभावित रणनीतिक साझेदारों में बेहद महत्वपूर्ण स्थान दिया। उन्होंने कहा कि यूरोप ऐसे देशों के साथ संबंध मजबूत करना चाहता है जो बहुपक्षवाद, पारस्परिक सम्मान और सहयोग में विश्वास रखते हों।

उन्होंने सवाल उठाया कि अगर यूरोप को दुनिया की किसी बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ ऐसा रिश्ता बनाना है तो भारत को उस सूची में शामिल नहीं करना एक बड़ी भूल होगी।

उनके मुताबिक, भारत इस सूची में पहले स्थान पर है।

भारत की बड़ी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, विशाल प्रतिभा पूल, तकनीकी क्षमता और भविष्य में विकास की संभावनाएं इसे यूरोप के लिए आकर्षक साझेदार बनाती हैं।

भारत और यूरोप के सामने कई चुनौतियां एक जैसी

बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने भारत और यूरोप के बीच संभावित सहयोग के कई क्षेत्रों की ओर भी संकेत किया। इनमें व्यापार, निवेश, तकनीक, औद्योगिक उत्पादन और सप्लाई चेन को मजबूत करना शामिल है।

उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को ऐसे साझेदारों के साथ अपने व्यापारिक संबंधों में विविधता लानी चाहिए जो अपने वादों और समझौतों का सम्मान करते हों।

इसका एक बड़ा कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था का तेजी से बदलता स्वरूप है। अमेरिका, चीन और यूरोप के बीच व्यापारिक तनाव तथा तकनीकी प्रतिस्पर्धा ने कंपनियों और सरकारों को सप्लाई चेन के नए विकल्प तलाशने के लिए मजबूर किया है।

चीन का नाम लिए बिना साधा निशाना

डी वेवर ने अपने बयान में चीन का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी टिप्पणियों को चीन की व्यापारिक और औद्योगिक नीतियों के संदर्भ में देखा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जिस देश को यूरोप की इस तरह की निर्भरता से सबसे ज्यादा फायदा मिला है, वह यूरोप से बहुत दूर नहीं है और एक ऐसा पड़ोसी है जिसे सभी जानते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने यूरोप से पहले इस चुनौती को पहचान लिया था और उसे चेतावनी दी थी।

उनकी बात का संकेत इस ओर था कि यूरोप को अब अपनी सप्लाई चेन और औद्योगिक रणनीति में ज्यादा विविधता लाने की जरूरत है।

फ्री ट्रेड के साथ राष्ट्रीय हितों की रक्षा भी जरूरी

बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मुक्त व्यापार का मतलब रणनीतिक हितों की अनदेखी करना नहीं हो सकता।

उनके अनुसार, फ्री ट्रेड के लिए भरोसा बेहद जरूरी है, लेकिन देशों को अपने राष्ट्रीय हितों और रणनीतिक क्षेत्रों की सुरक्षा भी करनी होगी।

यानी यूरोप खुले बाजार और वैश्विक व्यापार के सिद्धांतों को बनाए रखना चाहता है, लेकिन साथ ही वह यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि महत्वपूर्ण उद्योगों और सप्लाई चेन में किसी एक बाहरी शक्ति पर उसकी अत्यधिक निर्भरता न हो।

भारत को बताया बड़ी लोकतांत्रिक ताकत

डी वेवर ने भारत की राजनीतिक और तकनीकी क्षमता की भी तारीफ की। उन्होंने भारत को एक बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति और इनोवेशन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण देश बताया।

उनका कहना था कि एक स्वतंत्र और समृद्ध वैश्विक व्यवस्था के निर्माण में भारत की भागीदारी जरूरी है।

भारत के पास विशाल घरेलू बाजार, युवा कार्यबल, तकनीकी प्रतिभा और तेजी से विकसित हो रहा मैन्युफैक्चरिंग तथा डिजिटल इकोसिस्टम है। यही कारण है कि यूरोप के लिए भारत के साथ दीर्घकालिक आर्थिक और रणनीतिक संबंध और महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।

भारत-यूरोप संबंधों में क्यों आ सकता है नया मोड़?

वैश्विक व्यापार में हो रहे बदलावों के बीच भारत और यूरोप के बीच सहयोग का दायरा बढ़ सकता है। दोनों पक्ष सप्लाई चेन को ज्यादा मजबूत और विविध बनाने, नई तकनीकों में निवेश बढ़ाने तथा व्यापारिक निर्भरता को संतुलित करने पर जोर दे सकते हैं।

यूरोप जहां अपने औद्योगिक आधार को मजबूत करना चाहता है, वहीं भारत वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में दोनों के हित कई क्षेत्रों में एक-दूसरे से मेल खाते हैं।

बार्ट डी वेवर की टिप्पणी इस बदलती रणनीति का संकेत मानी जा रही है। यूरोप ने भले ही भारत की पुरानी चेतावनी को देर से सुना हो, लेकिन अब वह भारत को केवल एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार के तौर पर देख रहा है।

निष्कर्ष

चीन पर आर्थिक निर्भरता को लेकर यूरोप की बदलती सोच वैश्विक व्यापार व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर का यह कहना कि भारत ने यूरोप को पहले ही चेतावनी दी थी, दोनों पक्षों के बीच बढ़ती रणनीतिक नजदीकी को दर्शाता है।

आने वाले समय में भारत-यूरोप साझेदारी व्यापार से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी, निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन और रणनीतिक सहयोग तक फैल सकती है। वहीं यूरोप के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह चीन समेत किसी भी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता को कम करते हुए अपने आर्थिक हितों की सुरक्षा कैसे करता है।

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TAGGED: Bart De Wever, China Dependency, china trade, China Trade Threat, India Europe Partnership, Narendra Modi, PM modi, बेल्जियम पीएम बार्ट डी वेवर, भारत यूरोप संबंध, यूरोप चीन व्यापार
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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