रेलवे पेंशनर्स ने 8वें वेतन आयोग से क्यों की OROP की मांग?
सेना के पूर्व कर्मचारियों को मिलने वाली वन रैंक वन पेंशन (OROP) व्यवस्था को अब रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारियों तक भी बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। रेलवे सीनियर सिटीजंस वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष अपनी सिफारिशें पेश करते हुए कहा है कि समान पद और समान सेवा अवधि वाले सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों को एक जैसी पेंशन मिलनी चाहिए।
संगठन का तर्क है कि वर्तमान व्यवस्था में अलग-अलग समय पर रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। इससे कई वरिष्ठ पेंशनर्स को आर्थिक असमानता का सामना करना पड़ता है। इसलिए OROP जैसी व्यवस्था केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे अन्य केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों पर भी लागू करने पर विचार किया जाना चाहिए।
रेलवे पेंशनर्स का कहना है कि वर्षों की सेवा देने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक आय मिलना जरूरी है। बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए पेंशन संरचना में व्यापक सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
RSCWS ने आयोग को दिए ज्ञापन में कहा है कि OROP लागू होने से विभिन्न बैचों के बीच मौजूद पेंशन असमानता कम होगी और वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
बेसिक पे को मजबूत करने की मांग
संगठन ने आयोग से केवल पेंशन सुधार की ही नहीं बल्कि पूरे वेतन ढांचे की समीक्षा करने की भी मांग की है। उसका कहना है कि मौजूदा वेतन प्रणाली में बेसिक पे की तुलना में भत्तों और महंगाई भत्ते पर अधिक जोर दिया जाता है।
बेसिक पे किसी भी कर्मचारी की पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की गणना का आधार होती है। यदि बेसिक वेतन मजबूत होगा तो रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभों में भी स्वाभाविक रूप से बढ़ोतरी होगी।
रेलवे पेंशनर्स का मानना है कि 1 जनवरी 2026 तक के महंगाई स्तर को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम वेतन और पेंशन दोनों में संशोधन किया जाना चाहिए। इससे कर्मचारियों और पेंशनर्स की वास्तविक आय में सुधार हो सकेगा।
वार्षिक वेतन वृद्धि 3% से बढ़ाकर 5% करने का सुझाव
RSCWS ने वार्षिक इंक्रीमेंट की मौजूदा 3 प्रतिशत दर को बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने की भी सिफारिश की है। संगठन का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में महंगाई की रफ्तार वेतन वृद्धि से कहीं अधिक रही है।
यदि कर्मचारियों को केवल 3 प्रतिशत की वृद्धि मिलती है तो उनकी वास्तविक क्रय शक्ति लगातार घटती जाती है। ऐसे में 5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि से कर्मचारियों और पेंशनर्स को बेहतर वित्तीय सुरक्षा मिल सकती है।
संगठन ने यह भी कहा कि सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतन पैकेज में अंतर लगातार बढ़ रहा है। इसलिए सरकारी कर्मचारियों को प्रतिस्पर्धी वेतन संरचना उपलब्ध कराना जरूरी हो गया है।
फिटमेंट फैक्टर पर भी जताई उम्मीद
8वें वेतन आयोग को लेकर सबसे अधिक चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है। कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स का मानना है कि फिटमेंट फैक्टर ऐसा होना चाहिए जिससे कर्मचारियों की आय में वास्तविक और प्रभावी बढ़ोतरी दिखाई दे।
RSCWS ने कहा है कि जब भी वेतन संशोधन किया जाए, उसी अनुपात में पेंशन में भी बढ़ोतरी की जानी चाहिए। इससे वर्तमान कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच संतुलन बना रहेगा।
हालांकि आयोग ने अभी तक किसी फिटमेंट फैक्टर या वेतन वृद्धि प्रतिशत पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन विभिन्न कर्मचारी संगठनों से सुझाव लेने की प्रक्रिया जारी है।
पेंशन कम्यूटेशन अवधि घटाने की मांग
रेलवे पेंशनर्स संगठन ने पेंशन कम्यूटेशन रिस्टोरेशन अवधि को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। वर्तमान नियमों के तहत कम्यूट की गई पेंशन की बहाली में 15 वर्ष लगते हैं।
संगठन का मानना है कि यह अवधि काफी लंबी है और इसे घटाकर 10 से 12 वर्ष किया जाना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो पेंशनर्स को उनकी पूरी पेंशन पहले प्राप्त होने लगेगी, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति बेहतर हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि औसत जीवन प्रत्याशा और बढ़ती स्वास्थ्य लागत को देखते हुए इस मांग पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है।
CGEGIS में सुधार और अधिक बीमा कवर की मांग
RSCWS ने केंद्रीय सरकारी कर्मचारी समूह बीमा योजना (CGEGIS) में भी सुधार की मांग रखी है। संगठन का कहना है कि मौजूदा बीमा कवरेज समय के साथ अपर्याप्त हो गया है।
उसने अधिक बीमा कवर, पारदर्शिता और बेहतर लाभ संरचना की मांग की है ताकि कर्मचारियों और उनके परिवारों को अधिक सुरक्षा मिल सके।
क्या OROP की मांग पूरी होने की संभावना है?
फिलहाल OROP केवल सशस्त्र बलों के लिए लागू है और इसे अन्य केंद्रीय कर्मचारियों तक बढ़ाने का कोई आधिकारिक प्रस्ताव सरकार की ओर से नहीं आया है। हालांकि 8वें वेतन आयोग के सामने विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा लगातार ऐसी मांगें रखी जा रही हैं।
यदि आयोग इन सुझावों को अपनी सिफारिशों में शामिल करता है तो भविष्य में सरकार इस विषय पर विचार कर सकती है। लेकिन अंतिम फैसला केंद्र सरकार को ही लेना होगा।
NewsJagran Analysis
रेलवे पेंशनर्स की OROP मांग 8वें वेतन आयोग की सबसे चर्चित मांगों में शामिल हो सकती है। यदि सरकार समान पद और समान सेवा अवधि के आधार पर पेंशन समान करने की दिशा में कदम उठाती है तो लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को सीधा लाभ मिल सकता है। हालांकि इससे सरकारी खजाने पर बड़ा वित्तीय बोझ भी पड़ेगा, इसलिए आयोग की सिफारिशों और सरकार के अंतिम फैसले पर सभी की नजर रहेगी।


