भारत में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8th Pay Commission को लेकर बड़ी हलचल तेज हो गई है। नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (स्टाफ साइड) यानी NC-JCM की ड्राफ्टिंग कमेटी ने 51 पेज का एक विस्तृत मेमोरेंडम तैयार कर सरकार को सौंपा है, जिसमें पेंशनर्स के अधिकारों और सुविधाओं से जुड़े कई अहम प्रस्ताव शामिल हैं।
यह मेमोरेंडम 13 अप्रैल 2026 को प्रस्तुत किया गया, जिसमें न सिर्फ वेतन ढांचे बल्कि पेंशन, ग्रेच्युटी और स्वास्थ्य सुविधाओं में बड़े सुधार की मांग की गई है।
सरल शब्दों में कहें तो यह सिर्फ वेतन वृद्धि की मांग नहीं है, बल्कि पूरे रिटायरमेंट सिस्टम को फिर से परिभाषित करने की कोशिश है।
पेंशनर्स पर क्यों केंद्रित है 8th Pay Commission?
भारत में लाखों केंद्रीय सरकारी कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद पेंशन पर निर्भर रहते हैं। बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को देखते हुए पेंशनर्स संगठन लंबे समय से सुधार की मांग कर रहे हैं।
NC-JCM का कहना है कि 7th Pay Commission के बाद पेंशनर्स को अपेक्षित लाभ नहीं मिले, इसलिए 8th Pay Commission में एक समान और न्यायपूर्ण व्यवस्था जरूरी है।
1. समान फिटमेंट फैक्टर की मांग
NC-JCM ने सबसे अहम मांग यह रखी है कि कर्मचारियों और पेंशनर्स दोनों के लिए समान फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाए।
प्रस्ताव के अनुसार:
- फिटमेंट फैक्टर लगभग 3.833 रखा गया है
- पेंशनर्स को भी वही लाभ मिलना चाहिए जो कर्मचारियों को मिलता है
- 1 जनवरी 2026 से एरियर देने की मांग
इसका सीधा मतलब है कि रिटायर कर्मचारियों और कार्यरत कर्मचारियों के बीच वेतन अंतर कम किया जाए।
2. One Rank One Pension (OROP) जैसी व्यवस्था
सबसे महत्वपूर्ण और विवादित मांगों में से एक है—सिविलियन पेंशनर्स के लिए OROP लागू करना।
प्रस्ताव के अनुसार:
- एक ही रैंक और पद के सभी रिटायर्ड कर्मचारियों को समान पेंशन मिले
- चाहे वे 2010 में रिटायर हुए हों या 2025 में
यह मांग रक्षा क्षेत्र की OROP नीति की तरह सभी केंद्रीय कर्मचारियों पर लागू करने की सिफारिश करती है।
3. पुरानी पेंशन योजना (OPS) की वापसी
NC-JCM ने National Pension System (NPS) और Unified Pension Scheme (UPS) को खत्म कर पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की मांग की है।
उनका तर्क:
- NPS बाजार आधारित है और अस्थिर है
- वृद्धावस्था में सुरक्षा की गारंटी नहीं देता
- OPS अधिक स्थिर और सुरक्षित है
4. ग्रेच्युटी सीमा ₹25 लाख से बढ़ाकर ₹75 लाख
सबसे बड़ी वित्तीय मांगों में से एक यह है कि रिटायरमेंट ग्रेच्युटी (DCRG) की सीमा को बढ़ाया जाए।
मांग:
- वर्तमान सीमा ₹25 लाख → बढ़ाकर ₹75 लाख
- महंगाई के अनुसार पुनर्गणना
- 30 दिन के बजाय 25 दिन के आधार पर गणना
यह बदलाव रिटायरमेंट बेनिफिट्स को काफी हद तक बढ़ा देगा।
5. पेंशन कम्यूटेशन अवधि में कमी
वर्तमान में पेंशनर्स को कम्यूट की गई पेंशन 15 वर्षों में वापस मिलती है।
प्रस्ताव:
- इसे घटाकर 11 वर्ष किया जाए
इससे पेंशनर्स को जल्दी पूर्ण पेंशन मिलने लगेगी।
6. पूर्ण और फैमिली पेंशन में बढ़ोतरी
NC-JCM ने पेंशन प्रतिशत बढ़ाने की भी मांग की है:
- पूर्ण पेंशन: 50% → 67%
- फैमिली पेंशन: 30% → 50%
साथ ही यह भी प्रस्ताव है कि फैमिली पेंशन की अवधि 70 वर्ष तक बढ़ाई जाए।
7. उम्र के आधार पर बढ़ती पेंशन
एक और महत्वपूर्ण सुझाव यह है कि उम्र बढ़ने के साथ पेंशन भी बढ़ाई जाए।
प्रस्तावित ढांचा:
- 65 वर्ष: 70% पेंशन
- 70 वर्ष: 75%
- 75 वर्ष: 80%
- 80 वर्ष: 85%
- 85 वर्ष: 90%
- 90 वर्ष: 100%
यह मॉडल वरिष्ठ नागरिकों के बढ़ते खर्चों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
8. DR (Dearness Relief) को बेसिक पे में मर्ज करने की मांग
महंगाई राहत (DR) जब 25% तक पहुंच जाए तो उसे बेसिक पे में मर्ज करने की सिफारिश की गई है।
इसका फायदा:
- बेसिक सैलरी बढ़ेगी
- भविष्य में DR की वृद्धि अधिक प्रभावी होगी
9. लीव एनकैशमेंट 600 दिन तक बढ़ाने की मांग
वर्तमान में:
- रिटायरमेंट पर 300 दिन की छुट्टी कैश कराई जा सकती है
नई मांग:
- इसे बढ़ाकर 600 दिन किया जाए
10. CGHS स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
NC-JCM ने स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी बड़ा प्रस्ताव दिया है:
- CGHS केंद्र 81 से बढ़ाकर 150 शहरों में किए जाएं
- कैशलेस इलाज की सुविधा बढ़ाई जाए
- पेंशनर्स के योगदान शुल्क को सरकार वहन करे
विश्लेषण: यह मांगें क्यों महत्वपूर्ण हैं?
यह सभी प्रस्ताव केवल आर्थिक सुधार नहीं हैं, बल्कि एक बड़े सिस्टम रिफॉर्म की ओर इशारा करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार:
- भारत में पेंशन सिस्टम तेजी से बदल रहा है
- रिटायर्ड कर्मचारियों की संख्या बढ़ रही है
- महंगाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है
ऐसे में यह मांगें सरकार पर वित्तीय और नीतिगत दोनों स्तर पर दबाव बढ़ा सकती हैं।
निष्कर्ष
8th Pay Commission को लेकर NC-JCM का यह 51 पेज का मेमोरेंडम आने वाले समय में बड़ी बहस को जन्म दे सकता है। जहां एक तरफ पेंशनर्स इसे अपने अधिकारों की बहाली मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार के लिए यह एक बड़ा वित्तीय निर्णय होगा।
अब सबकी नजर इस पर है कि सरकार इन मांगों में से कितनी स्वीकार करती है और नया वेतन आयोग किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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