ITR Filing Last Date 2026: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 है। डेडलाइन नजदीक आने के साथ ही कई टैक्सपेयर्स जल्दबाजी में रिटर्न फाइल कर रहे हैं। लेकिन आखिरी समय में की गई छोटी-सी गलती भी टैक्स नोटिस, रिफंड में देरी या रिटर्न में खामी का कारण बन सकती है।
इसलिए ITR सबमिट करने से पहले कुछ जरूरी बातों की जांच कर लेना बेहद जरूरी है। खासकर Form 16, Annual Information Statement (AIS), Form 26AS, बैंक ब्याज, कैपिटल गेन और टैक्स डिडक्शन से जुड़ी जानकारी में किसी भी तरह का अंतर परेशानी बढ़ा सकता है।
अगर आपने अभी तक ITR फाइल नहीं किया है, तो बचे हुए दिनों में जल्दबाजी करने के बजाय इन 5 जरूरी चीजों को जरूर चेक कर लें।
1. Form 16, AIS और Form 26AS का मिलान करें
ITR दाखिल करने से पहले सबसे जरूरी काम है कि Form 16 में दी गई जानकारी का मिलान AIS और Form 26AS से किया जाए।
Form 16 में आपकी सैलरी, टैक्स कटौती और TDS की जानकारी होती है, जबकि AIS में इनकम के कई अन्य स्रोतों की जानकारी भी दिखाई देती है। वहीं Form 26AS में आपके नाम पर जमा हुए टैक्स क्रेडिट की जानकारी मिलती है।
अगर इन तीनों दस्तावेजों में कोई अंतर दिखता है, तो पहले उसकी जांच करें। कई बार बैंक ब्याज, डिविडेंड, शेयर बिक्री या अन्य आय की जानकारी AIS में दिखाई देती है, जिसे टैक्स रिटर्न में शामिल करना जरूरी होता है।
गलत जानकारी भरने से भविष्य में इनकम टैक्स विभाग की तरफ से नोटिस आ सकता है।
2. सभी आय और टैक्स बचत से जुड़े दस्तावेज तैयार रखें
कई टैक्सपेयर्स केवल Form 16 के आधार पर ITR भर देते हैं, लेकिन आपकी कुल आय में कई दूसरे स्रोत भी शामिल हो सकते हैं।
ITR फाइल करने से पहले इन दस्तावेजों को तैयार रखें:
- सेविंग अकाउंट और FD से मिलने वाले ब्याज का विवरण
- शेयर और म्यूचुअल फंड से हुए कैपिटल गेन की जानकारी
- किराये से होने वाली आय का रिकॉर्ड
- होम लोन ब्याज प्रमाणपत्र
- इंश्योरेंस, PPF, ELSS और अन्य निवेश से जुड़े दस्तावेज
इन दस्तावेजों की जांच करने से यह सुनिश्चित हो जाता है कि कोई आय छूट न जाए और आपको मिलने वाली टैक्स छूट का पूरा लाभ मिल सके।
3. पुरानी या नई टैक्स व्यवस्था का सही चुनाव करें
ITR भरते समय सही टैक्स रिजीम चुनना बहुत महत्वपूर्ण है। टैक्सपेयर्स को यह तय करना चाहिए कि उनके लिए Old Tax Regime बेहतर है या New Tax Regime।
पुरानी व्यवस्था में 80C, 80D जैसी कई कटौतियों का लाभ मिलता है, जबकि नई व्यवस्था में टैक्स स्लैब अलग होते हैं और कई कटौतियां उपलब्ध नहीं होतीं।
इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले दोनों व्यवस्थाओं के तहत अपनी टैक्स देनदारी की तुलना करें।
इसके अलावा यह भी जांच लें कि TDS कटने के बाद कोई टैक्स बाकी तो नहीं है। अगर सेल्फ असेसमेंट टैक्स देना बाकी है, तो ITR फाइल करने से पहले उसका भुगतान करना जरूरी हो सकता है।
4. सही ITR फॉर्म चुनें और व्यक्तिगत जानकारी जांचें
गलत ITR फॉर्म का चयन करने से आपका रिटर्न अमान्य या डिफेक्टिव घोषित हो सकता है।
इसलिए अपनी आय के स्रोत के अनुसार सही फॉर्म चुनें। उदाहरण के तौर पर नौकरीपेशा व्यक्ति, बिजनेस इनकम वाले व्यक्ति और कैपिटल गेन वाले टैक्सपेयर्स के लिए अलग-अलग ITR फॉर्म लागू हो सकते हैं।
रिटर्न सबमिट करने से पहले इन जानकारियों को जरूर जांच लें:
- PAN नंबर
- आधार नंबर
- बैंक अकाउंट डिटेल
- IFSC कोड
- मोबाइल नंबर
- ईमेल आईडी
बैंक अकाउंट की सही जानकारी देना जरूरी है ताकि रिफंड आने में कोई परेशानी न हो।
5. ITR फाइल करने के बाद ई-वेरिफिकेशन जरूर करें
कई लोग ITR सबमिट करने के बाद ई-वेरिफिकेशन करना भूल जाते हैं। सिर्फ रिटर्न जमा करना पर्याप्त नहीं होता, उसका वेरिफिकेशन पूरा होना भी जरूरी है।
ITR को इन तरीकों से वेरिफाई किया जा सकता है:
- आधार OTP
- नेट बैंकिंग
- EVC (Electronic Verification Code)
- DSC (Digital Signature Certificate)
ई-वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद ITR acknowledgment डाउनलोड करके सुरक्षित रखना चाहिए।
ITR सबमिट करने से पहले आखिरी चेकलिस्ट
रिटर्न फाइनल सबमिट करने से पहले यह जरूर जांच लें:
✅ सही ITR फॉर्म चुना गया है
✅ PAN और आधार की जानकारी सही है
✅ बैंक अकाउंट डिटेल अपडेट है
✅ Form 16 को AIS और Form 26AS से मिलाया गया है
✅ बैंक ब्याज, कैपिटल गेन और अन्य आय शामिल की गई है
✅ टैक्स रिजीम का सही चुनाव किया गया है
✅ सभी जरूरी डिडक्शन की जांच कर ली गई है
✅ कोई बकाया सेल्फ असेसमेंट टैक्स है तो भुगतान कर दिया गया है
✅ ITR सफलतापूर्वक सबमिट हो गया है
✅ रिटर्न ई-वेरिफाई कर दिया गया है
✅ acknowledgment कॉपी सेव कर ली गई है
आखिरी समय में जल्दबाजी से बचें
ITR फाइलिंग की आखिरी तारीख नजदीक होने पर वेबसाइट पर ट्रैफिक बढ़ सकता है और दस्तावेजों की कमी के कारण परेशानी भी हो सकती है। इसलिए आखिरी दिन का इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द रिटर्न दाखिल करना बेहतर है।
सही जानकारी और दस्तावेजों के साथ भरा गया ITR न केवल नोटिस के जोखिम को कम करता है, बल्कि रिफंड प्रक्रिया को भी आसान बनाता है।


