AI से बदल रही कस्टमर सर्विस इंडस्ट्री की तस्वीर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल कर्मचारियों की मदद करने वाला एक डिजिटल टूल नहीं रह गया है, बल्कि यह कई कंपनियों के लिए लागत कम करने और काम को ऑटोमेट करने का बड़ा माध्यम बन चुका है। खासतौर पर कस्टमर सर्विस और कॉल सेंटर इंडस्ट्री में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।
दुनिया की बड़ी कंपनियां अब ग्राहकों के सवालों का जवाब देने, शिकायतें सुलझाने और सामान्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए AI चैटबॉट और ऑटोमेटेड फोन सिस्टम का सहारा ले रही हैं। इसका सीधा असर उन नौकरियों पर पड़ रहा है, जिनमें लाखों लोग कॉल सेंटर और बीपीओ सेक्टर में काम करते हैं।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Microsoft, Uber, Hyatt Hotels और Commonwealth Bank of Australia जैसी कई बड़ी कंपनियां कस्टमर सर्विस ऑपरेशन में AI का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं। इससे कई जगहों पर कर्मचारियों की संख्या कम करने की जरूरत महसूस हुई है।
भारत और फिलीपींस पर पड़ सकता है सबसे बड़ा असर
कॉल सेंटर इंडस्ट्री लंबे समय से ऑटोमेशन के खतरे का सामना कर रही थी, लेकिन जनरेटिव AI आने के बाद यह बदलाव काफी तेज हो गया है। अब AI सिर्फ सामान्य सवालों के जवाब ही नहीं दे रहा, बल्कि ग्राहकों की बातचीत को समझकर समाधान भी सुझा रहा है।
रिसर्च फर्म Forrester की एनालिस्ट केट लेगेट के अनुसार, अमेरिका में कस्टमर सर्विस नौकरियों की संख्या में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। अनुमान है कि साल 2030 तक कस्टमर सर्विस से जुड़ी करीब आधी नौकरियां AI के प्रभाव में आ सकती हैं।
इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर भारत और फिलीपींस जैसे देशों पर पड़ सकता है, क्योंकि अमेरिका और यूरोप की कई कंपनियां अपने कॉल सेंटर और ग्राहक सहायता सेवाओं को इन देशों में आउटसोर्स करती हैं।
भारत में लाखों युवा बीपीओ और कॉल सेंटर सेक्टर में रोजगार पाते हैं। ऐसे में AI आधारित ऑटोमेशन आने वाले समय में इस इंडस्ट्री के रोजगार मॉडल को पूरी तरह बदल सकता है।
Microsoft ने घटाई कस्टमर सर्विस टीम
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, Microsoft ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी कस्टमर सर्विस वर्कफोर्स को लगभग 50,000 से घटाकर करीब 40,000 कर दिया है।
कंपनी AI सिस्टम की मदद से ग्राहकों की समस्याओं को तेजी से हल करने की कोशिश कर रही है। Microsoft का कहना है कि AI के इस्तेमाल से उसे हर साल करीब 750 मिलियन डॉलर की बचत हो रही है।
हालांकि, कंपनी अभी भी जटिल समस्याओं और संवेदनशील मामलों के लिए मानव कर्मचारियों पर निर्भर है। यानी AI पूरी तरह इंसानों की जगह नहीं ले रहा, लेकिन सामान्य और दोहराए जाने वाले कामों में इसकी भूमिका तेजी से बढ़ रही है।
Uber ने भी बढ़ाया AI का इस्तेमाल
राइड-हेलिंग कंपनी Uber ने भी अपने कस्टमर सपोर्ट सिस्टम में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने हाल ही में अपनी कस्टमर सर्विस टीम में करीब 10 फीसदी की कटौती की।
अब Uber ग्राहकों को ऐप के अंदर AI चैटबॉट के जरिए सहायता देने पर ज्यादा ध्यान दे रही है। टिकट, भुगतान, अकाउंट और सामान्य शिकायतों जैसे मामलों को AI के जरिए हल करने की कोशिश की जा रही है।
इससे कंपनी का ऑपरेशनल खर्च कम हो रहा है और ग्राहकों को 24 घंटे सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।
बैंक और होटल इंडस्ट्री में भी AI की एंट्री
Commonwealth Bank of Australia ने भी AI आधारित कस्टमर सपोर्ट सिस्टम अपनाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे बैंक को कई ऐसे काम ऑटोमेट करने में मदद मिली, जिनके लिए पहले बड़ी संख्या में कर्मचारियों की जरूरत होती थी।
होटल सेक्टर में Hyatt Hotels भी AI का इस्तेमाल बढ़ा रहा है। होटल बुकिंग में बदलाव, रसीद भेजना और सामान्य ग्राहक अनुरोध जैसे काम अब AI सिस्टम संभाल रहे हैं।
होम सिक्योरिटी कंपनी Brinks Home ने भी AI के जरिए अपने कॉल वॉल्यूम को लगभग दो-तिहाई तक कम किया। कंपनी ने अपने कॉल सेंटर कर्मचारियों की संख्या करीब 800 से घटाकर 400 कर दी।
आउटसोर्सिंग कंपनियों के लिए बढ़ी चुनौती
AI के बढ़ते इस्तेमाल से आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री पर भी दबाव बढ़ रहा है। Teleperformance, Concentrix और TTEC जैसी बड़ी बीपीओ कंपनियां पहले ही संकेत दे चुकी हैं कि कम जटिल और दोहराए जाने वाले काम AI की वजह से प्रभावित हो सकते हैं।
इन कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे AI के साथ अपने बिजनेस मॉडल को कैसे बदलें। आने वाले समय में कॉल सेंटर कंपनियों को कर्मचारियों को नए AI आधारित कौशल सिखाने और ज्यादा जटिल सेवाओं पर ध्यान देने की जरूरत होगी।
क्या AI पूरी तरह खत्म कर देगा कॉल सेंटर नौकरियां?
विशेषज्ञों का मानना है कि AI पूरी तरह से इंसानी कर्मचारियों को खत्म नहीं करेगा, लेकिन नौकरी की प्रकृति जरूर बदल देगा। जिन कर्मचारियों के काम केवल स्क्रिप्ट आधारित जवाब देने तक सीमित हैं, उन पर सबसे ज्यादा दबाव आ सकता है।
भविष्य में ग्राहक सेवा कर्मचारियों को AI टूल्स के साथ काम करने, जटिल समस्याओं को हल करने और बेहतर कम्युनिकेशन स्किल विकसित करने की जरूरत होगी।
भारत जैसे देशों के लिए चुनौती यह है कि लाखों बीपीओ कर्मचारियों को नई तकनीक के हिसाब से तैयार किया जाए। अगर कंपनियां समय रहते स्किल अपग्रेडेशन पर ध्यान देती हैं, तो AI खतरे के साथ-साथ नए अवसर भी पैदा कर सकता है।
निष्कर्ष
AI के बढ़ते इस्तेमाल ने कस्टमर सर्विस इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव शुरू कर दिया है। Microsoft, Uber और दूसरी ग्लोबल कंपनियां लागत कम करने के लिए AI को तेजी से अपना रही हैं। इसका असर आने वाले वर्षों में भारत और फिलीपींस जैसे देशों के कॉल सेंटर सेक्टर पर साफ दिखाई दे सकता है।
हालांकि, AI जहां कुछ नौकरियों को प्रभावित करेगा, वहीं नई तरह की नौकरियां और तकनीकी भूमिकाएं भी पैदा कर सकता है। आने वाला समय उन कर्मचारियों के लिए बेहतर होगा, जो बदलती तकनीक के साथ खुद को अपडेट कर पाएंगे।


