पूर्वी अफ्रीकी देश युगांडा में मौजूद एक एक्सप्रेसवे को दुनिया की सबसे महंगी सड़कों में गिना जाता है। हैरानी की बात यह है कि यह सड़क किसी अमीर देश में नहीं, बल्कि एक विकासशील अफ्रीकी राष्ट्र में बनी है। 51 किलोमीटर लंबे इस हाईवे पर इतना पैसा खर्च हुआ कि इसकी प्रति किलोमीटर लागत कई देशों की पूरी सड़क परियोजनाओं से भी ज्यादा निकल गई।
यह सड़क है एंटेबे-कंपाला एक्सप्रेसवे (Entebbe–Kampala Expressway), जिसने निर्माण लागत और अंतरराष्ट्रीय फाइनेंसिंग मॉडल दोनों वजहों से दुनियाभर में चर्चा बटोरी थी।
क्यों खास है एंटेबे-कंपाला एक्सप्रेसवे?
युगांडा की राजधानी कंपाला को एंटेबे इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ने वाला यह चार-लेन टोल एक्सप्रेसवे देश की सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में शामिल है। इससे पहले एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए लोगों को भारी ट्रैफिक जाम से गुजरना पड़ता था, जिसमें कई बार घंटों लग जाते थे।
इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद यात्रा का समय काफी घट गया और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी बेहतर हुई। यही वजह है कि युगांडा सरकार ने इसे देश की आर्थिक प्रगति के लिए अहम प्रोजेक्ट बताया था। हालांकि, इसकी लागत इतनी ज्यादा रही कि इसे दुनिया की सबसे महंगी सड़कों में गिना जाने लगा।
कितना आया खर्च?
मीडिया रिपोर्ट्स और अंतरराष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर डेटा के मुताबिक इस 51 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे के निर्माण पर करीब 476 मिलियन डॉलर खर्च हुए। भारतीय मुद्रा में देखें तो यह रकम लगभग 4,500 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है। सबसे चौंकाने वाली बात इसकी प्रति किलोमीटर लागत रही। इस सड़क के हर किलोमीटर पर करीब 9.2 मिलियन डॉलर यानी लगभग 88 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए।
विशेषज्ञों के अनुसार इतनी ऊंची लागत के पीछे कई कारण थे, जिनमें शामिल हैं बड़े पैमाने पर पुल और फ्लाईओवर निर्माण, भूमि अधिग्रहण की ऊंची लागत, आधुनिक टोल सिस्टम, अंतरराष्ट्रीय निर्माण मानक, विदेशी तकनीक और उपकरणों का उपयोग
19 फ्लाईओवर और पूर्वी अफ्रीका का लंबा पुल
यह सिर्फ सामान्य सड़क परियोजना नहीं थी। एंटेबे-कंपाला एक्सप्रेसवे पर कुल 19 फ्लाईओवर और पुल बनाए गए हैं, जिनकी संयुक्त लंबाई लगभग 2,770 मीटर है। इसी प्रोजेक्ट का हिस्सा नाम्बिगिरवा ब्रिज (Nambigirwa Bridge) भी है, जिसकी लंबाई 1,400 मीटर से ज्यादा बताई जाती है। इसे पूर्वी अफ्रीका का सबसे लंबा चार-लेन पुल माना जाता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर एक्सपर्ट्स का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में पुल और एलिवेटेड सेक्शन बनने से निर्माण लागत में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई।
चीन ने कैसे निभाई बड़ी भूमिका?
इस हाईवे प्रोजेक्ट के पीछे चीन की बड़ी भूमिका रही। युगांडा सरकार ने चीन के साथ समझौता कर इस परियोजना के लिए फंडिंग हासिल की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन के Export-Import Bank (Exim Bank of China) ने इस परियोजना के लिए लगभग 350 मिलियन डॉलर का लोन दिया था। यह लोन लंबी अवधि के लिए था और इसे करीब 40 वर्षों में चुकाने की व्यवस्था की गई थी। बाकी करीब 126 मिलियन डॉलर युगांडा सरकार ने अपनी तरफ से खर्च किए।
पिछले कुछ वर्षों में चीन ने अफ्रीका में बड़े पैमाने पर सड़क, रेलवे, बंदरगाह और ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश किया है। विशेषज्ञ इसे चीन की “Belt and Road Initiative” रणनीति का हिस्सा मानते हैं, जिसके जरिए वह विकासशील देशों में इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क मजबूत कर रहा है।
किस कंपनी ने बनाया एक्सप्रेसवे?
इस हाईवे का निर्माण चीन की सरकारी कंपनी चाइना कम्युनिकेशंस कंस्ट्रक्शन कंपनी (CCCC) ने किया था। यह दुनिया की बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में गिनी जाती है और कई देशों में सड़क, पुल, बंदरगाह और रेलवे परियोजनाएं बना चुकी है। प्रोजेक्ट मैनेजमेंट से जुड़े अधिकारियों ने उस समय कहा था कि यह एक्सप्रेसवे “चाइनीज स्टैंडर्ड” के हिसाब से डिजाइन और तैयार किया गया है।
युगांडा सरकार का मानना था कि इस प्रोजेक्ट से देश को आधुनिक सड़क निर्माण तकनीक और इंजीनियरिंग अनुभव मिलेगा, जिससे भविष्य की परियोजनाओं में मदद होगी।
इतनी महंगी सड़क बनने पर क्यों उठे सवाल?
हालांकि यह परियोजना युगांडा के लिए बड़ी उपलब्धि मानी गई, लेकिन इसकी लागत को लेकर काफी विवाद भी हुआ। कई अर्थशास्त्रियों और विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए कि आखिर एक गरीब अफ्रीकी देश में सड़क निर्माण की लागत इतनी ज्यादा क्यों आई। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि लागत अनुमान जरूरत से ज्यादा बढ़ गया, विदेशी कर्ज पर निर्भरता बढ़ी, टोल से होने वाली कमाई लागत के मुकाबले कम हो सकती है, चीन पर आर्थिक निर्भरता बढ़ने का खतरा है.
अफ्रीका में चीनी कर्ज को लेकर पहले भी बहस होती रही है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट विकास तो लाते हैं, लेकिन कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देशों पर लंबे समय का कर्ज बोझ भी डाल सकते हैं।
युगांडा की अर्थव्यवस्था के लिए कितना अहम है यह हाईवे?
युगांडा पूर्वी अफ्रीका की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है, लेकिन अभी भी इसे लो-इनकम कंट्री माना जाता है। ऐसे में यह एक्सप्रेसवे देश के लिए सिर्फ सड़क नहीं बल्कि आर्थिक महत्व का प्रोजेक्ट भी है।
इस हाईवे से:
- एयरपोर्ट कनेक्टिविटी बेहतर हुई
- व्यापारिक गतिविधियां बढ़ीं
- ट्रांसपोर्ट टाइम कम हुआ
- पर्यटन को बढ़ावा मिला
- राजधानी क्षेत्र में निवेश आकर्षित हुआ
सरकार का दावा है कि लंबी अवधि में यह प्रोजेक्ट आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाएगा।
दुनिया की सबसे महंगी सड़क क्यों कहलाती है?
दुनिया में कई हाईवे और टनल प्रोजेक्ट बेहद महंगे रहे हैं, लेकिन एंटेबे-कंपाला एक्सप्रेसवे को उसकी प्रति किलोमीटर लागत के कारण सबसे महंगी सड़क परियोजनाओं में शामिल किया जाता है।
कम दूरी के बावजूद जिस स्तर का खर्च इस प्रोजेक्ट पर हुआ, उसने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया। यही वजह है कि आज भी यह सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर, विदेशी निवेश और अफ्रीका में चीन की भूमिका पर होने वाली बहसों में अक्सर उदाहरण के तौर पर सामने आती है।
Also Read:


