भारत के कॉर्पोरेट जगत में सोमवार को एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। टेलीकॉम दिग्गज Bharti Airtel ने मार्केट कैपिटलाइजेशन के मामले में HDFC Bank को पीछे छोड़ते हुए देश की दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी बनने का गौरव हासिल कर लिया। इस उपलब्धि के पीछे सिर्फ शेयर बाजार की तेजी नहीं, बल्कि एक ऐसे कारोबारी की चार दशक लंबी संघर्ष और विजन की कहानी छिपी है, जिसने महज 20 हजार रुपये उधार लेकर अपना सफर शुरू किया था।
आज जिस एयरटेल का नेटवर्क भारत से लेकर अफ्रीका तक फैला हुआ है, उसकी नींव एक ऐसे युवा ने रखी थी जिसने पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि होने के बावजूद नौकरी या राजनीति के बजाय बिजनेस को चुना। यह कहानी है Sunil Bharti Mittal की, जिन्हें आज भारत के सबसे सफल उद्यमियों में गिना जाता है।
शेयर बाजार में एयरटेल ने कैसे रचा इतिहास?
सोमवार को शेयर बाजार में एयरटेल के शेयरों में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी दर्ज की गई। निवेशकों की मजबूत खरीदारी के चलते कंपनी का मार्केट कैप एक समय 11.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसी दौरान HDFC बैंक का मार्केट कैप करीब 11.74 लाख करोड़ रुपये पर था।
हालांकि बाद में बैंकिंग शेयरों में रिकवरी देखने को मिली और दोनों कंपनियों के बीच दूसरे स्थान की लड़ाई काफी दिलचस्प हो गई। दोपहर तक एयरटेल और HDFC बैंक के मार्केट कैप में बेहद मामूली अंतर रह गया था। इसके बावजूद बाजार में सबसे ज्यादा चर्चा एयरटेल की ऐतिहासिक छलांग को लेकर रही।
फिलहाल Reliance Industries करीब 18 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के मार्केट कैप के साथ देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है। लेकिन एयरटेल का तेजी से ऊपर आना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि भारत में डिजिटल और टेलीकॉम सेक्टर का महत्व लगातार बढ़ रहा है।
सिर्फ 18 साल की उम्र में शुरू किया कारोबार
सुनील भारती मित्तल का जन्म 23 अक्टूबर 1957 को पंजाब के लुधियाना में हुआ था। उनके पिता सत पाल मित्तल राजनीति में सक्रिय थे और राज्यसभा सांसद भी रहे। सामान्यतः ऐसे परिवारों के बच्चों के लिए राजनीति या स्थापित कारोबार आसान रास्ता होता है, लेकिन मित्तल ने शुरुआत से ही अलग रास्ता चुना।
उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद मात्र 18 साल की उम्र में बिजनेस शुरू करने का फैसला लिया। इसके लिए उन्होंने अपने पिता से 20 हजार रुपये उधार लिए। आज के समय में यह रकम छोटी लग सकती है, लेकिन 1970 के दशक में यह एक बड़ी पूंजी मानी जाती थी।
इस पैसे से उन्होंने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर लुधियाना में साइकिल के पुर्जे बनाने का छोटा कारोबार शुरू किया। उस समय पंजाब साइकिल उद्योग का बड़ा केंद्र था और हीरो जैसी कंपनियां तेजी से बढ़ रही थीं। मित्तल ने इसी इंडस्ट्री में अवसर देखा।
हालांकि यह बिजनेस बहुत बड़ा नहीं बन पाया, लेकिन इसी दौर में उन्होंने सप्लाई चेन, ट्रेडिंग, मैन्युफैक्चरिंग और ग्राहक व्यवहार को समझना शुरू किया। यही अनुभव आगे चलकर उनके लिए सबसे बड़ी पूंजी साबित हुआ।
पहला बड़ा झटका और फिर नई शुरुआत
1980 के दशक की शुरुआत में सुनील मित्तल ने अपने भाइयों के साथ मिलकर मुंबई में ‘भारती ओवरसीज ट्रेडिंग कंपनी’ शुरू की। इस बिजनेस के तहत वे जापान से पोर्टेबल जनरेटर आयात करते थे।
उस समय भारत में बिजली संकट काफी बड़ा मुद्दा था, इसलिए जनरेटर की मांग तेजी से बढ़ रही थी। शुरुआती वर्षों में उनका कारोबार तेजी से बढ़ा। लेकिन अचानक सरकार ने स्थानीय निर्माण को बढ़ावा देने के लिए जनरेटर आयात पर प्रतिबंध लगा दिया।
यह फैसला मित्तल के लिए बड़ा झटका था। उनका तेजी से बढ़ता कारोबार लगभग रातोंरात बंद हो गया। कई उद्यमी ऐसी स्थिति में हार मान लेते, लेकिन मित्तल ने इस संकट को नए अवसर में बदल दिया।
यहीं से शुरू हुई टेलीकॉम क्रांति
1984 में उन्होंने Bharti Telecom की स्थापना की। उस समय भारत में पुराने रोटरी फोन का दौर था। मित्तल ने जर्मनी की Siemens के साथ साझेदारी कर ‘Beetel’ ब्रांड के तहत पुश-बटन टेलीफोन लॉन्च किए।
यह भारत के टेलीकॉम बाजार में बड़ा बदलाव था। लोगों को पहली बार आधुनिक टेलीफोन का अनुभव मिला। इसके बाद कंपनी ने फैक्स मशीन, कॉर्डलेस फोन और अन्य टेलीकॉम उपकरणों में भी विस्तार किया।
यहीं से मित्तल को समझ आया कि भारत में संचार सेवाओं का भविष्य बहुत बड़ा होने वाला है।
जब भारत में आया मोबाइल क्रांति का दौर
1990 के दशक में भारत सरकार ने टेलीकॉम सेक्टर में निजी कंपनियों को अवसर देना शुरू किया। उस समय बहुत कम लोगों को अंदाजा था कि मोबाइल फोन आने वाले वर्षों में पूरी दुनिया बदल देंगे। लेकिन सुनील मित्तल ने इस अवसर को सबसे पहले पहचाना।
उन्होंने मोबाइल सेवाओं के लाइसेंस हासिल किए और एयरटेल ब्रांड लॉन्च किया। शुरुआती दौर में मोबाइल कॉल बेहद महंगी होती थी। incoming कॉल तक के पैसे लगते थे। लेकिन एयरटेल ने धीरे-धीरे नेटवर्क विस्तार, बेहतर सर्विस और आक्रामक निवेश के जरिए बाजार में मजबूत पकड़ बना ली।
इसके बाद कंपनी ने देशभर में नेटवर्क विस्तार किया, डेटा सेवाओं पर फोकस बढ़ाया, 4G और फिर 5G नेटवर्क में भारी निवेश किया अफ्रीका समेत कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश किया आज एयरटेल भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में शामिल है और करोड़ों ग्राहक उसकी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं।
एयरटेल की सफलता के पीछे कौन से फैक्टर रहे?
विशेषज्ञ मानते हैं कि एयरटेल की सफलता के पीछे सिर्फ नेटवर्क विस्तार नहीं, बल्कि बिजनेस मॉडल भी बड़ी वजह रहा है।
1. Asset-light strategy
कंपनी ने कई इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेशन आउटसोर्स किए, जिससे लागत कम रही।
2. ग्राहक अनुभव पर फोकस
बेहतर नेटवर्क और प्रीमियम सर्विस पर लगातार ध्यान दिया गया।
3. डिजिटल बिजनेस में विस्तार
Airtel Payments Bank, Airtel Xstream और enterprise solutions जैसे नए क्षेत्रों में विस्तार किया गया।
4. डेटा क्रांति का फायदा
भारत में इंटरनेट उपयोग बढ़ने के साथ एयरटेल को जबरदस्त ग्रोथ मिली।
HDFC बैंक को पछाड़ना क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा?
भारत में लंबे समय से बैंकिंग और वित्तीय कंपनियां मार्केट कैप के मामले में शीर्ष स्थानों पर रही हैं। ऐसे में एक टेलीकॉम कंपनी का HDFC बैंक जैसी दिग्गज कंपनी को पीछे छोड़ना इस बात का संकेत है कि निवेशक अब डिजिटल और कनेक्टिविटी आधारित बिजनेस को भविष्य का इंजन मान रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक 5G विस्तार, डेटा खपत में तेजी, डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग, एंटरप्राइज बिजनेस ग्रोथ जैसे फैक्टर एयरटेल के भविष्य को मजबूत बना रहे हैं।
कितनी है सुनील भारती मित्तल की संपत्ति?
आज सुनील भारती मित्तल दुनिया के बड़े अरबपतियों में गिने जाते हैं। विभिन्न वैश्विक अरबपति सूचियों के अनुसार उनकी नेटवर्थ करीब 34 अरब डॉलर के आसपास पहुंच चुकी है।
लेकिन उनकी कहानी सिर्फ दौलत की नहीं है। यह उस सोच की कहानी है जिसमें असफलता के बाद वापसी, नए अवसर पहचानने की क्षमता, लंबी अवधि की रणनीति, और बदलती तकनीक को जल्दी अपनाने का साहस शामिल है।
भारत के युवाओं के लिए क्यों खास है यह कहानी?
स्टार्टअप और बिजनेस की दुनिया में अक्सर लोग रातोंरात सफलता की बातें करते हैं। लेकिन सुनील भारती मित्तल की यात्रा बताती है कि बड़ा साम्राज्य खड़ा करने में दशकों लगते हैं। 20 हजार रुपये से शुरू हुआ सफर छोटे मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस से गुजरा, सरकारी नीतियों के झटके देखे, कई बार बिजनेस मॉडल बदले, और अंततः भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में से एक खड़ी की।
यही वजह है कि आज एयरटेल का HDFC बैंक को पीछे छोड़ना सिर्फ एक मार्केट कैप की खबर नहीं, बल्कि भारतीय उद्यमिता की एक बड़ी मिसाल माना जा रहा है।
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