देश के टेलीकॉम सेक्टर में लंबे समय से दबदबा रखने वाली कंपनी भारती एयरटेल ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में बड़ा इतिहास रच दिया। कंपनी ने मार्केट कैपिटलाइजेशन के मामले में देश के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी बैंक को पीछे छोड़ते हुए भारत की दूसरी सबसे वैल्यूएबल कंपनी बनने का गौरव हासिल कर लिया।
शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बीच एयरटेल के शेयरों में मजबूत तेजी देखने को मिली, जबकि एचडीएफसी बैंक के शेयर दबाव में रहे। इसी के साथ एयरटेल का मार्केट कैप बढ़कर 11.8 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। दूसरी ओर एचडीएफसी बैंक का मार्केट कैप घटकर करीब 11.7 लाख करोड़ रुपये रह गया।
फिलहाल मार्केट कैप के मामले में मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज करीब 18 लाख करोड़ रुपये के वैल्यूएशन के साथ देश की सबसे बड़ी कंपनी बनी हुई है। लेकिन जिस तेजी से एयरटेल का विस्तार और निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है, उसने पूरे टेलीकॉम सेक्टर की तस्वीर बदल दी है।
क्यों खास है एयरटेल की यह उपलब्धि?
कुछ साल पहले तक भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में रिलायंस जियो के आक्रामक विस्तार के बाद ऐसा माना जा रहा था कि एयरटेल की स्थिति कमजोर हो सकती है। लेकिन कंपनी ने पिछले तीन-चार वर्षों में जिस तरह से अपनी रणनीति बदली, उसने निवेशकों का भरोसा दोबारा मजबूत कर दिया।
एयरटेल ने केवल मोबाइल सेवाओं पर ही फोकस नहीं किया, बल्कि 5G नेटवर्क, एंटरप्राइज बिजनेस, डेटा सेंटर, ब्रॉडबैंड और अफ्रीका कारोबार में भी तेजी से विस्तार किया। यही वजह है कि अब निवेशक एयरटेल को सिर्फ टेलीकॉम कंपनी नहीं बल्कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के रूप में देखने लगे हैं।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत में डेटा खपत और 5G सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ने वाली है, जिसका सबसे बड़ा फायदा एयरटेल और जियो जैसी कंपनियों को मिल सकता है।
शेयर में 5 साल में 270% की जबरदस्त तेजी
भारती एयरटेल का शेयर पिछले पांच साल में निवेशकों के लिए मल्टीबैगर साबित हुआ है। जहां एयरटेल के शेयर में करीब 270 फीसदी की तेजी आई है, वहीं इसी अवधि में एचडीएफसी बैंक का शेयर लगभग 49 फीसदी ही चढ़ पाया है। यह अंतर साफ दिखाता है कि पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों का झुकाव पारंपरिक बैंकिंग सेक्टर से हटकर डिजिटल और टेलीकॉम कंपनियों की तरफ तेजी से बढ़ा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना महामारी के बाद भारत में डिजिटल सेवाओं की मांग में विस्फोटक बढ़ोतरी हुई। ऑनलाइन स्ट्रीमिंग, डिजिटल पेमेंट, वर्क फ्रॉम होम और AI आधारित सेवाओं ने डेटा उपयोग को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा दिया। इसका सबसे ज्यादा फायदा एयरटेल जैसी कंपनियों को मिला।
5G ने बदल दी कंपनी की तस्वीर
एयरटेल की तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण उसका आक्रामक 5G विस्तार माना जा रहा है। कंपनी ने देश के ज्यादातर बड़े शहरों और हजारों कस्बों तक अपनी 5G सेवा पहुंचा दी है। इसके अलावा कंपनी लगातार अपने Average Revenue Per User (ARPU) यानी प्रति ग्राहक औसत कमाई को बढ़ाने पर फोकस कर रही है।
टेलीकॉम इंडस्ट्री में ARPU को सबसे महत्वपूर्ण संकेतकों में माना जाता है। एयरटेल का ARPU लगातार मजबूत हुआ है, जिससे कंपनी की कमाई और मार्जिन दोनों बेहतर हुए हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर आने वाले समय में टैरिफ हाइक यानी मोबाइल रिचार्ज महंगे होते हैं, तो एयरटेल की कमाई में और तेजी आ सकती है।
विदेशी निवेशकों का भी बढ़ा भरोसा
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (FIIs) की गतिविधियां भी एयरटेल के पक्ष में दिखाई दे रही हैं। ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के अनुसार, विदेशी फंड्स टेलीकॉम सेक्टर को भारत की लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्टोरी का अहम हिस्सा मान रहे हैं। एयरटेल का मजबूत कैश फ्लो, बेहतर ग्राहक आधार और लगातार बढ़ता डेटा उपयोग निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। कई वैश्विक ब्रोकरेज हाउस ने एयरटेल पर सकारात्मक रुख बनाए रखा है।
क्या कहते हैं ब्रोकरेज हाउस?
अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म बोफा सिक्योरिटीज ने एयरटेल के शेयर पर 2,320 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। जेपी मॉर्गन ने भी एयरटेल पर भरोसा जताते हुए 2,250 रुपये का लक्ष्य रखा है। वहीं गोल्डमैन सैक्स ने ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस को 2,250 रुपये से घटाकर 2,210 रुपये किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि टेलीकॉम सेक्टर में सीमित प्रतिस्पर्धा और बढ़ती डेटा मांग एयरटेल के लिए लंबे समय तक सकारात्मक साबित हो सकती है।
आज शेयर में कितना रहा उतार-चढ़ाव?
सोमवार को बीएसई पर एयरटेल का शेयर करीब 1.88 फीसदी की तेजी के साथ 1,940.35 रुपये के आसपास ट्रेड करता दिखा। पिछले कारोबारी सत्र में यह शेयर 1,904.60 रुपये पर बंद हुआ था। सोमवार को यह 1,909.35 रुपये पर खुला और कारोबार के दौरान 1,953.95 रुपये तक पहुंच गया।
कंपनी का 52 हफ्तों का उच्चतम स्तर 2,174.70 रुपये है, जबकि निचला स्तर 1,745 रुपये रहा है। दूसरी तरफ एचडीएफसी बैंक के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। बैंक का शेयर कारोबार के दौरान 751.50 रुपये तक फिसल गया। पिछले सत्र में यह 767.80 रुपये पर बंद हुआ था।
एचडीएफसी बैंक का 52 हफ्तों का उच्चतम स्तर 1,020.35 रुपये जबकि न्यूनतम स्तर 726.75 रुपये रहा है।
मार्केट कैपिटलाइजेशन में कौन-कौन सी कंपनियां आगे?
मार्केट कैप के हिसाब से भारत की टॉप कंपनियों की सूची में अब बड़ा बदलाव देखने को मिला है। रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर बनी हुई है, जबकि एयरटेल दूसरे नंबर पर पहुंच गई है। इसके बाद एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, हिंदुस्तान यूनिलीवर और एलआईसी जैसी कंपनियां शामिल हैं।
यह बदलाव इस बात का संकेत है कि भारतीय बाजार में डिजिटल और टेक्नोलॉजी आधारित बिजनेस मॉडल को निवेशक ज्यादा महत्व दे रहे हैं।
क्या अभी भी शेयर में दम बाकी है?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि एयरटेल के शेयर में अभी भी लंबी अवधि के लिए संभावनाएं बनी हुई हैं। अगर कंपनी 5G विस्तार, ARPU ग्रोथ और डिजिटल सेवाओं में अपनी बढ़त बनाए रखती है, तो आने वाले वर्षों में इसका वैल्यूएशन और मजबूत हो सकता है। हालांकि निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि टेलीकॉम सेक्टर में भारी कैपेक्स, स्पेक्ट्रम लागत और प्रतिस्पर्धा जैसे जोखिम हमेशा बने रहते हैं।
इसके अलावा वैश्विक बाजार में अस्थिरता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर भी शेयर पर पड़ सकता है। फिर भी मौजूदा समय में एयरटेल भारतीय शेयर बाजार की सबसे मजबूत ग्रोथ स्टोरी में से एक बनकर उभरी है।
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