नई दिल्ली: अमेरिका का न्याय विभाग (U.S. Department of Justice), जिसने 2024 में भारतीय उद्योगपति गौतम अदाणी और उनकी कंपनियों के खिलाफ कथित रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी से जुड़ा मामला दर्ज किया था, अब एक नए विवाद की जांच में जुट गया है। इस बार जांच का केंद्र चीन से आने वाली फंडिंग और हार्वर्ड विश्वविद्यालय है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी न्याय विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने चीनी दानदाताओं को ऐसी छात्रवृत्ति योजनाएं बनाने की अनुमति दी, जिनसे अमेरिकी छात्रों के साथ संभावित भेदभाव हो सकता है। यह जांच ट्रंप प्रशासन की विदेशी फंडिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी सख्त नीति का हिस्सा मानी जा रही है।
पहले अदाणी केस, अब चीन की फंडिंग पर फोकस
नवंबर 2024 में अमेरिकी न्याय विभाग ने गौतम अदाणी और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ कथित रिश्वतखोरी और निवेशकों को गुमराह करने से जुड़े आरोपों में मामला दर्ज किया था। हालांकि, बाद में विभाग ने अदालत में इस मामले को वापस लेने के लिए आवेदन भी दायर किया।
अब वही विभाग चीन से जुड़े वित्तीय लेन-देन और अमेरिकी शैक्षणिक संस्थानों में विदेशी प्रभाव की संभावनाओं की जांच कर रहा है। इससे साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका विदेशी फंडिंग को लेकर अपनी निगरानी और कड़ी कर रहा है।
हार्वर्ड विश्वविद्यालय की जांच क्यों हो रही है?
अमेरिकी न्याय विभाग की नई जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने चीनी दानदाताओं को ऐसी छात्रवृत्तियां स्थापित करने की अनुमति दी, जिनमें अमेरिकी छात्रों को बाहर रखा गया हो या उनके साथ किसी तरह का भेदभाव किया गया हो।
विभाग का कहना है कि हार्वर्ड द्वारा विदेशी फंडिंग से जुड़े खुलासों ने कुछ गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और अब तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है।
इसके अलावा विभाग ने यह भी नहीं बताया कि जांच किन विशेष छात्रवृत्ति कार्यक्रमों या किन दानदाताओं पर केंद्रित है।
ट्रंप प्रशासन ने क्यों बढ़ाई सख्ती?
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन का मानना है कि विदेशी देशों, विशेष रूप से चीन जैसे रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी देशों से मिलने वाली बड़ी वित्तीय सहायता राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
इसी वजह से अमेरिकी विश्वविद्यालयों में विदेशी फंडिंग की पारदर्शिता और उसके प्रभाव की व्यापक समीक्षा की जा रही है। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि विदेशी दान के जरिए अमेरिकी शिक्षा व्यवस्था या नीतियों पर अनुचित प्रभाव न डाला जा सके।
हार्वर्ड को चीन से कितनी फंडिंग मिली?
हार्वर्ड विश्वविद्यालय की संघीय रिपोर्ट के अनुसार, उसे पिछले कई दशकों में चीनी स्रोतों से लगभग 630 मिलियन डॉलर की फंडिंग प्राप्त हुई है। वहीं, विश्वविद्यालय ने कुल मिलाकर करीब 4.5 बिलियन डॉलर की विदेशी फंडिंग की जानकारी अमेरिकी अधिकारियों को दी है।
न्याय विभाग ने इन आंकड़ों का उल्लेख किया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि जांच किसी विशेष चीनी दानदाता, संस्था या कार्यक्रम पर केंद्रित है या नहीं।
क्या होगा अगला कदम?
फिलहाल अमेरिकी न्याय विभाग दस्तावेजों और विदेशी फंडिंग से जुड़े खुलासों की समीक्षा कर रहा है। यदि जांच में किसी नियम के उल्लंघन, भेदभाव या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जोखिम के प्रमाण मिलते हैं, तो आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, अभी तक हार्वर्ड विश्वविद्यालय या किसी चीनी दानदाता के खिलाफ कोई औपचारिक आरोप तय नहीं किए गए हैं।
मुख्य बातें
- अमेरिकी न्याय विभाग अब हार्वर्ड विश्वविद्यालय की चीन से मिली फंडिंग की जांच कर रहा है।
- जांच का उद्देश्य विदेशी दान के जरिए संभावित भेदभाव और राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी जोखिमों का आकलन करना है।
- हार्वर्ड को पिछले कई दशकों में चीन से करीब 630 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिली है।
- विभाग ने अभी किसी छात्रवृत्ति कार्यक्रम या दानदाता का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।
- जांच प्रारंभिक चरण में है और फिलहाल किसी निष्कर्ष की घोषणा नहीं की गई है।


