नई दिल्ली: भारत की कंपनियां अब सिर्फ घरेलू बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भी अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं। ‘मेक इन इंडिया’ के साथ-साथ कई भारतीय कंपनियां दुनिया के 40 से 50 देशों में अपनी फैक्ट्रियां और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स संचालित कर रही हैं। ऑटोमोबाइल, फार्मा, एग्रोकेमिकल्स और स्टील जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियां वैश्विक सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बन चुकी हैं।
सबसे खास बात यह है कि इन कंपनियों के ग्राहक दुनिया के बड़े-बड़े ब्रांड हैं। लग्जरी कार निर्माता Audi, BMW और Mercedes-Benz से लेकर दुनिया के कई देशों की हेल्थकेयर और कृषि इंडस्ट्री तक भारतीय कंपनियों के उत्पाद पहुंच रहे हैं।
Highlights
- 47 देशों में संवधर्न मदरसन के 450 से अधिक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट।
- UPL के उत्पाद 130 से ज्यादा देशों में उपलब्ध।
- सन फार्मा के 6 महाद्वीपों में 40 से अधिक प्लांट।
- टाटा ग्रुप की मैन्युफैक्चरिंग यूरोप, यूके, एशिया और अफ्रीका तक फैली।
- डॉ. रेड्डीज और टोरेंट फार्मा का 50 से अधिक देशों में मजबूत नेटवर्क।
1. संवधर्न मदरसन ग्रुप
भारत की सबसे बड़ी ऑटो कंपोनेंट कंपनियों में शामिल संवधर्न मदरसन ग्रुप आज वैश्विक ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की महत्वपूर्ण सप्लायर बन चुकी है। Audi, BMW, Mercedes-Benz, Volkswagen, Ford और कई अन्य वैश्विक वाहन निर्माता इसके ग्राहक हैं।
कंपनी के दुनिया के 47 देशों में 450 से अधिक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट और इंजीनियरिंग फैसिलिटी मौजूद हैं। यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, एशिया और अफ्रीका में इसका बड़ा नेटवर्क है, जिससे यह वैश्विक सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।
2. UPL लिमिटेड
एग्रोकेमिकल्स और फसल सुरक्षा उत्पादों के क्षेत्र में UPL लिमिटेड दुनिया की अग्रणी कंपनियों में शामिल है। कंपनी की 48 से अधिक मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी विभिन्न देशों में मौजूद हैं।
UPL के कीटनाशक, बीज और कृषि समाधान 130 से अधिक देशों में उपलब्ध हैं। अमेरिका, लैटिन अमेरिका, यूरोप और एशिया में कंपनी की मजबूत मौजूदगी इसे भारतीय कृषि उद्योग की वैश्विक पहचान बनाती है।
3. सन फार्मा
भारत की सबसे बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनी सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज का कारोबार दुनिया के लगभग हर प्रमुख बाजार में फैला हुआ है।
कंपनी के 6 महाद्वीपों में 40 से अधिक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट संचालित हैं। अमेरिका और यूरोप जैसे कड़े नियामकीय बाजारों में भी सन फार्मा की मजबूत स्थिति है। कंपनी की दवाइयां 100 से अधिक देशों में मरीजों तक पहुंचती हैं।
4. टाटा ग्रुप
भारतीय उद्योग जगत का सबसे प्रतिष्ठित नाम टाटा ग्रुप भी वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग में अग्रणी है।
टाटा मोटर्स के पास Jaguar Land Rover (JLR) जैसे प्रीमियम ऑटो ब्रांड हैं, जबकि टाटा स्टील की उत्पादन इकाइयां यूरोप, ब्रिटेन, एशिया और अफ्रीका सहित कई देशों में संचालित हैं।
कमर्शियल वाहन, स्टील और लग्जरी ऑटोमोबाइल सेगमेंट में टाटा की वैश्विक मौजूदगी लगातार मजबूत हो रही है।
5. डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज और टोरेंट फार्मा
भारतीय फार्मा उद्योग की दो प्रमुख कंपनियां डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज और टोरेंट फार्मा भी दुनिया के 50 से अधिक देशों में कारोबार और मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क स्थापित कर चुकी हैं।
ब्राजील, जर्मनी, अमेरिका, ब्रिटेन और कई अन्य देशों में इनके उत्पादन केंद्र और सप्लाई नेटवर्क मौजूद हैं, जिससे ये वैश्विक दवा बाजार में भारत की मजबूत पहचान बनाती हैं।
आखिर भारतीय कंपनियां विदेशों में फैक्ट्री क्यों लगा रही हैं?
भारतीय कंपनियों के विदेशी मैन्युफैक्चरिंग विस्तार के पीछे कई रणनीतिक कारण हैं।
- स्थानीय ग्राहकों तक कम समय में उत्पाद पहुंचाने के लिए।
- आयात शुल्क और भारी टैक्स से बचने के लिए स्थानीय उत्पादन करना।
- विदेशी कंपनियों का अधिग्रहण कर नए बाजारों में तेजी से विस्तार करना।
- वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बनकर उत्पादन लागत कम करना।
- स्थानीय नियमों और मांग के अनुसार उत्पाद तैयार करना।
भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय कंपनियों ने दुनिया के कई देशों में निवेश बढ़ाया है। ऑटोमोबाइल, फार्मा, स्टील, केमिकल्स और एग्रीकल्चर जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियां अब सिर्फ निर्यातक नहीं, बल्कि स्थानीय निर्माता भी बन चुकी हैं।
‘Made in India’ के साथ अब ‘Made by India’ की पहचान भी तेजी से मजबूत हो रही है। इससे भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं और भारत की अर्थव्यवस्था को भी दीर्घकालिक मजबूती मिल रही है।


