देशभर में उच्च शिक्षा हासिल करने की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए बड़ी खबर है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने एक बार फिर फर्जी विश्वविद्यालयों (Fake Universities) और बिना मान्यता वाले संस्थानों को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है। आयोग ने पूरे देश में 32 फर्जी यूनिवर्सिटी की पहचान की है और छात्रों को इनमें प्रवेश न लेने की सख्त सलाह दी है।
UGC ने यह भी चेतावनी दी है कि कई EdTech कंपनियां ऐसे संस्थानों के कोर्स का प्रचार कर छात्रों को गुमराह कर सकती हैं। इसलिए किसी भी ऑनलाइन या ऑफलाइन कोर्स में दाखिला लेने से पहले उसकी मान्यता जरूर जांचें।
UGC ने क्यों जारी किया अलर्ट?
राज्यसभा में 5 अगस्त को दिए गए एक लिखित जवाब में शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने बताया कि UGC लगातार उन संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है जो बिना वैधानिक मंजूरी के खुद को विश्वविद्यालय बताकर छात्रों को डिग्री देने का दावा करते हैं।
इन संस्थानों को आयोग की ओर से—
- चेतावनी नोटिस
- कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice)
- कंप्लायंस नोटिस
- स्पष्टीकरण नोटिस
जारी किए गए हैं। जांच में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर इन्हें फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची में शामिल किया गया।
32 फर्जी यूनिवर्सिटी की पहचान
UGC द्वारा फरवरी 2026 में जारी नवीनतम सूची के अनुसार, देशभर में 32 संस्थानों को फर्जी विश्वविद्यालय घोषित किया गया है।
इन संस्थानों की डिग्रियां वैध नहीं मानी जातीं और इनमें पढ़ाई करने वाले छात्रों को भविष्य में नौकरी, उच्च शिक्षा या सरकारी भर्ती में गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
राज्यों को दिए गए सख्त निर्देश
UGC ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव एवं शिक्षा सचिवों को पत्र लिखकर कहा है कि ऐसे संस्थानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
निर्देशों में कहा गया है कि—
- फर्जी विश्वविद्यालयों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए।
- बिना अनुमति “University” शब्द का उपयोग करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई हो।
- छात्रों को गुमराह करने वाले संस्थानों को बंद कराया जाए।
- यदि राज्य में कोई नया फर्जी संस्थान मिलता है तो उसकी जानकारी तुरंत UGC को भेजी जाए।
EdTech कंपनियों को लेकर भी चेतावनी
UGC ने छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी है कि केवल किसी ऑनलाइन विज्ञापन, सोशल मीडिया प्रचार या EdTech प्लेटफॉर्म के दावे पर भरोसा न करें।
कई बार कुछ प्लेटफॉर्म बिना मान्यता वाले कोर्स या संस्थानों का प्रचार करते हैं। इसलिए एडमिशन लेने से पहले संबंधित कोर्स और संस्थान की वैधता की जांच स्वयं करें।
एडमिशन से पहले जरूर करें ये जांच
UGC ने छात्रों से कहा है कि किसी भी कोर्स में दाखिला लेने से पहले उसकी मान्यता (Recognition Status) अवश्य जांच लें।
ध्यान रखें—
- संस्थान UGC से मान्यता प्राप्त है या नहीं।
- संबंधित कोर्स की वैधता जांचें।
- Distance Learning या Online Program की मंजूरी की पुष्टि करें।
- केवल आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी पर भरोसा करें।
- किसी एजेंट या विज्ञापन के भरोसे प्रवेश न लें।
शिकायत मिलने पर कैसे होती है कार्रवाई?
UGC के अनुसार यदि किसी संस्थान के खिलाफ बिना अनुमति डिग्री देने या खुद को विश्वविद्यालय बताने की शिकायत मिलती है तो आयोग पहले नोटिस जारी करता है।
इसके बाद—
- संस्थान से स्पष्टीकरण मांगा जाता है।
- दस्तावेजों की जांच होती है।
- यदि जवाब संतोषजनक नहीं होता तो उसका नाम फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची में शामिल कर दिया जाता है।
- इसके बाद संबंधित राज्य सरकार को कानूनी कार्रवाई के लिए निर्देश भेजे जाते हैं।
1996 में बनाया गया था AMPC
फर्जी विश्वविद्यालयों और बिना मान्यता वाले संस्थानों पर नजर रखने के लिए UGC ने 30 मई 1996 को Anti-Malpractice Cell (AMPC) की स्थापना की थी।
यह सेल ऐसे संस्थानों की पहचान करता है जो UGC Act, 1956 का उल्लंघन करते हुए अवैध रूप से डिग्री या शैक्षणिक कार्यक्रम चला रहे हैं।
छात्रों और अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण सलाह
यदि आप इस साल कॉलेज या विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने की तैयारी कर रहे हैं, तो जल्दबाजी में किसी भी संस्थान में एडमिशन न लें। पहले उसकी मान्यता की पुष्टि करें। फर्जी विश्वविद्यालय में दाखिला लेने से आपका समय, मेहनत और लाखों रुपये की फीस बर्बाद हो सकती है। किसी भी संस्थान की वैधता जांचने के लिए केवल UGC की आधिकारिक वेबसाइट और DEB पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी का ही उपयोग करें।


