नई दिल्ली: भारत की महारत्न कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता मिली है। कंपनी की विदेशी इकाई ONGC विदेश लिमिटेड (OVL) को दुनिया के सबसे बड़े सिद्ध तेल भंडार (Oil Reserves) वाले देश वेनेजुएला में तेल और गैस परियोजनाओं के संचालन की पूरी आज़ादी मिल गई है। इसके लिए कंपनी को अमेरिका के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) से आवश्यक लाइसेंस भी प्राप्त हो गया है।
यह फैसला ONGC के लिए इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते कंपनी लंबे समय से वेनेजुएला में अपने निवेश का पूरा फायदा नहीं उठा पा रही थी। अब नए लाइसेंस और वेनेजुएला के संशोधित पेट्रोलियम कानून के बाद कंपनी अपने प्रोजेक्ट्स का संचालन सीधे कर सकेगी।
Highlights
- ONGC विदेश को वेनेजुएला में तेल परियोजनाओं के संचालन की मंजूरी मिली।
- अमेरिकी OFAC ने कंपनी को जरूरी लाइसेंस जारी किया।
- PDVSA से कुछ प्रोजेक्ट्स की ऑपरेटरशिप ONGC के पास आएगी।
- वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े सिद्ध तेल भंडार वाला देश है।
- भारत से वेनेजुएला की दूरी करीब 14,000 से 15,000 किलोमीटर है।
वेनेजुएला में ONGC की मजबूत मौजूदगी
ONGC विदेश पहले से ही वेनेजुएला की कई अहम परियोजनाओं में भागीदार है। कंपनी की San Cristobal Oil Field में 40% हिस्सेदारी है। इसके अलावा भारतीय कंपनियों के समूह के साथ मिलकर Carabobo-1 Project में भी इसकी 18% हिस्सेदारी है।
अब नए लाइसेंस मिलने के बाद कंपनी इन परियोजनाओं में अपनी भूमिका और मजबूत करेगी तथा उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देगी।
अमेरिकी OFAC लाइसेंस क्यों है महत्वपूर्ण?
वेनेजुएला पर लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंध लागू हैं, जिसके कारण वहां विदेशी कंपनियों के लिए काम करना आसान नहीं था। किसी भी अंतरराष्ट्रीय कंपनी को वहां संचालन के लिए US Office of Foreign Assets Control (OFAC) की अनुमति आवश्यक होती है।
ONGC विदेश को यह लाइसेंस मिलने का मतलब है कि कंपनी अब निर्धारित नियमों के तहत बिना कानूनी बाधाओं के अपने तेल और गैस प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ा सकेगी।
ONGC ने क्या कहा?
कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) और निदेशक (वित्त) अनुपम अग्रवाल ने जून तिमाही के नतीजों के बाद आयोजित एनालिस्ट कॉल में कहा कि अब कंपनी को वेनेजुएला परियोजनाओं पर काम करने की पूरी स्वतंत्रता मिल गई है।
उन्होंने बताया कि पहले अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़े जोखिमों के कारण कंपनी अपने कामकाज को सीमित रख रही थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं और वेनेजुएला का नया पेट्रोलियम कानून विदेशी निवेशकों के लिए अतिरिक्त अवसर उपलब्ध करा रहा है।
PDVSA से ONGC संभालेगी संचालन
अनुपम अग्रवाल के मुताबिक, ONGC विदेश जल्द ही वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA (Petróleos de Venezuela S.A.) से कुछ प्रोजेक्ट्स की ऑपरेटरशिप अपने हाथ में लेगी।
इसका मतलब है कि परियोजनाओं के दैनिक संचालन, उत्पादन बढ़ाने और तकनीकी फैसलों में ONGC की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होगी।
भारत के अनुभव का मिलेगा फायदा
ONGC का मानना है कि वेनेजुएला की कई भू-वैज्ञानिक संरचनाएं भारत के कुछ तेल क्षेत्रों से मिलती-जुलती हैं। ऐसे में भारत में वर्षों से तेल और गैस उत्पादन का अनुभव कंपनी को वेनेजुएला में उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने में मदद करेगा।
कंपनी को उम्मीद है कि आने वाले समय में नए समझौते भी होंगे, जिससे उसके अंतरराष्ट्रीय कारोबार को नई गति मिलेगी।
ONGC के लिए क्यों है बड़ी उपलब्धि?
यह उपलब्धि ONGC के लिए कई मायनों में अहम है।
- अंतरराष्ट्रीय तेल उत्पादन बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
- वेनेजुएला की विशाल तेल संपदा तक बेहतर पहुंच बनेगी।
- कंपनी की विदेशी परिसंपत्तियों से आय बढ़ सकती है।
- भारत की ऊर्जा सुरक्षा को भी दीर्घकाल में मजबूती मिलेगी।
- ONGC की वैश्विक उपस्थिति और रणनीतिक महत्व बढ़ेगा।
PDVSA क्या है?
PDVSA (Petróleos de Venezuela S.A.) वेनेजुएला की सरकारी तेल एवं गैस कंपनी है। यह देश में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज, उत्पादन, रिफाइनिंग, परिवहन, निर्यात और विपणन का काम करती है। वेनेजुएला के ऊर्जा क्षेत्र में PDVSA की केंद्रीय भूमिका है और ONGC अब इसके साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का संचालन करेगी।
निष्कर्ष
वेनेजुएला में संचालन की नई मंजूरी ONGC के लिए एक रणनीतिक और व्यावसायिक दोनों दृष्टि से बड़ी सफलता मानी जा रही है। अमेरिकी OFAC लाइसेंस और वेनेजुएला के नए पेट्रोलियम कानून के बाद कंपनी को अब उन परियोजनाओं में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा, जहां पहले प्रतिबंधों के कारण उसकी गतिविधियां सीमित थीं। यदि आने वाले महीनों में नए समझौते और उत्पादन विस्तार की योजनाएं सफल रहती हैं, तो इससे ONGC के वैश्विक कारोबार और भारत की ऊर्जा सुरक्षा दोनों को महत्वपूर्ण लाभ मिल सकता है।


