California Diwali Holiday: अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य में दिवाली को आधिकारिक सरकारी मान्यता देने वाले कानून पर अब कानूनी संकट खड़ा हो गया है। पिछले साल लागू हुए असेंबली बिल 268 (AB 268) के अहम प्रावधानों को अमेरिकी सुपीरियर कोर्ट ने रद्द कर दिया है। अदालत का कहना है कि यह कानून धार्मिक आधार पर विशेष प्राथमिकता देता है, जो अमेरिकी संविधान के Establishment Clause का उल्लंघन करता है। इस फैसले के बाद भारतीय-अमेरिकी समुदाय, शिक्षा संस्थानों और सरकारी कर्मचारियों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है।
कोर्ट ने क्यों रद्द किया दिवाली की सरकारी छुट्टी वाला कानून?
जुलाई में आए फैसले में यूनाइटेड स्टेट्स सुपीरियर कोर्ट के जज स्टीफन एक्विस्टो ने कहा कि AB 268 का मसौदा मुख्य रूप से दिवाली के धार्मिक महत्व पर आधारित था। अदालत के अनुसार किसी भी धार्मिक त्योहार को सरकारी स्तर पर विशेष दर्जा देने के लिए उसके पीछे स्पष्ट धर्मनिरपेक्ष (Secular) उद्देश्य होना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि यह कानून प्रशासनिक या नागरिक हितों के बजाय धार्मिक आधार पर तैयार किया गया था। इसी वजह से इसे अमेरिकी संघीय संविधान और कैलिफोर्निया राज्य के संविधान के Establishment Clause के खिलाफ माना गया।
क्या था कैलिफोर्निया का AB 268 कानून?
कैलिफोर्निया स्टेट असेंबली के सदस्य एश कालरा द्वारा पेश किए गए AB 268 पर गवर्नर गेविन न्यूसम ने अक्टूबर 2025 में हस्ताक्षर किए थे। यह कानून 1 जनवरी 2026 से लागू हुआ था।
इस कानून के तहत कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल थे।
- राज्य कर्मचारियों को दिवाली पर पेड लीव का उपयोग करने की सुविधा।
- K-12 स्कूलों और कम्युनिटी कॉलेजों को स्थानीय समझौते के आधार पर दिवाली की छुट्टी घोषित करने का अधिकार।
- स्कूलों के पाठ्यक्रम में दिवाली के सांस्कृतिक इतिहास को शामिल करने की व्यवस्था।
- सरकारी स्तर पर दिवाली को औपचारिक मान्यता।
हालांकि कोर्ट के फैसले के बाद इन अधिकांश प्रावधानों पर फिलहाल रोक लग गई है।
स्कूलों और सरकारी कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा?
इस फैसले का सबसे बड़ा असर शिक्षा संस्थानों और सरकारी कर्मचारियों पर पड़ा है।
जिन स्कूल जिलों और कम्युनिटी कॉलेजों ने अपने शैक्षणिक कैलेंडर में दिवाली की छुट्टी शामिल कर ली थी, उन्हें अब नए सत्र के लिए कानूनी स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार करना होगा।
इसी तरह राज्य कर्मचारियों के लिए दिवाली पर मिलने वाली विशेष छुट्टी की सुविधा भी फिलहाल निलंबित कर दी गई है। मामला अपील में जाने तक इस व्यवस्था पर रोक बनी रह सकती है।
हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने क्या कहा?
कोर्ट के फैसले के बाद हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने इस निर्णय पर चिंता जताई है।
संगठन का कहना है कि AB 268 का उद्देश्य किसी धर्म का प्रचार करना नहीं था, बल्कि भारतीय मूल के छात्रों और कर्मचारियों को बिना शैक्षणिक या पेशेवर नुकसान के दिवाली मनाने की सुविधा देना था।
HAF का तर्क है कि अदालत ने कानून के व्यावहारिक उद्देश्य के बजाय उसकी शब्दावली पर अधिक जोर दिया।
कानूनी विशेषज्ञ क्यों बता रहे हैं इसे अहम फैसला?
विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका में पहले से क्रिसमस जैसी छुट्टियों को लंबे समय से सांस्कृतिक और नागरिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है। लेकिन यदि किसी नए धार्मिक त्योहार को सरकारी मान्यता दी जाती है, तो अदालत उसकी संवैधानिक वैधता की अधिक सख्ती से जांच करती है।
यही वजह है कि दिवाली से जुड़े इस कानून को भी अदालत ने संवैधानिक कसौटी पर परखा।
अमेरिका के किन राज्यों में दिवाली को मिली है मान्यता?
कैलिफोर्निया के अलावा अमेरिका के कई राज्यों और शहरों में अलग-अलग स्तर पर दिवाली को मान्यता दी गई है।
- पेनसिल्वेनिया ने दिवाली को आधिकारिक राज्य अवकाश घोषित किया है।
- कनेक्टिकट ने भी दिवाली को सार्वजनिक अवकाश के रूप में मान्यता दी है।
- न्यूयॉर्क सिटी के सरकारी स्कूलों में दिवाली पर छुट्टी रहती है।
- लॉस एंजिल्स काउंटी ने 2022 से दिवाली को आधिकारिक मान्यता दी हुई है।
- न्यू जर्सी, टेक्सास, वर्जीनिया और मैसाचुसेट्स के कई स्कूल जिलों में स्थानीय स्तर पर दिवाली की छुट्टी दी जाती है।
व्हाइट हाउस में दिवाली का इतिहास
हालांकि अमेरिका में दिवाली अभी संघीय अवकाश नहीं है, लेकिन पिछले दो दशकों से व्हाइट हाउस में दिवाली समारोह आयोजित होते रहे हैं।
- जॉर्ज डब्ल्यू. बुश प्रशासन के दौरान पहली बार आधिकारिक दिवाली समारोह आयोजित हुआ।
- बराक ओबामा ओवल ऑफिस में दीया जलाने वाले पहले कार्यरत अमेरिकी राष्ट्रपति बने।
- डोनाल्ड ट्रंप ने भी भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ दिवाली कार्यक्रमों की परंपरा जारी रखी।
- जो बाइडेन प्रशासन ने अब तक का सबसे बड़ा व्हाइट हाउस दिवाली समारोह आयोजित किया।
अब आगे क्या होगा?
सुपीरियर कोर्ट के फैसले के बाद कैलिफोर्निया सरकार के सामने दो विकल्प हैं।
पहला, राज्य सरकार इस फैसले को California Court of Appeal में चुनौती दे सकती है।
दूसरा, कानून में संशोधन कर उसकी भाषा को पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष बनाते हुए नया विधेयक पेश किया जा सकता है, ताकि वह संवैधानिक मानकों पर खरा उतर सके।
कैलिफोर्निया में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की आबादी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इस मामले का अंतिम फैसला केवल दिवाली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि भविष्य में अमेरिका में अन्य सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को किस प्रकार सरकारी मान्यता दी जा सकती है।


