Thalapathy Vijay vs Chandrababu Naidu: दक्षिण भारत में निवेश को लेकर तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के बीच मुकाबला अब और तेज होता दिखाई दे रहा है। आंध्र प्रदेश की चंद्रबाबू नायडू सरकार अब तमिलनाडु की कंपनियों को अपने राज्य में निवेश के लिए आकर्षित करने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है। इसके तहत आंध्र प्रदेश पहली बार तमिलनाडु के प्रमुख औद्योगिक शहरों चेन्नई और कोयंबटूर में इन्वेस्टर मीट और रोडशो आयोजित करने जा रहा है।
आंध्र प्रदेश का फोकस खासतौर पर टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर है। कोयंबटूर को टेक्सटाइल उद्योग का बड़ा केंद्र होने की वजह से इस अभियान में खास महत्व दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि आंध्र प्रदेश की यह पहल तमिलनाडु के पारंपरिक औद्योगिक आधार में सीधे निवेश आकर्षित करने की कोशिश है।
इससे दक्षिण भारत के इन दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच निवेश और इंडस्ट्री को लेकर प्रतिस्पर्धा का नया दौर शुरू हो सकता है।
चेन्नई और कोयंबटूर में पहली बार रोडशो
आंध्र प्रदेश इकोनॉमिक डेवलपमेंट बोर्ड (EDB) की ओर से तमिलनाडु में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए रोडशो आयोजित किए जाएंगे। पहला रोडशो चेन्नई में और इसके बाद कोयंबटूर में कार्यक्रम प्रस्तावित है।
चेन्नई तमिलनाडु का प्रमुख ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग हब है, जबकि कोयंबटूर टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और औद्योगिक इकाइयों के लिए जाना जाता है। इसलिए आंध्र प्रदेश ने दोनों शहरों को अपने निवेश अभियान के लिए चुना है।
खास तौर पर कोयंबटूर में होने वाले रोडशो के जरिए राज्य की नजर तमिलनाडु के मजबूत टेक्सटाइल कारोबार पर है। देश की टेक्सटाइल और अपैरल इंडस्ट्री में तमिलनाडु की बड़ी हिस्सेदारी है और राज्य में बड़ी संख्या में कपड़ा एवं गारमेंट इकाइयां मौजूद हैं।
आंध्र प्रदेश की कोशिश है कि इनमें से कुछ कंपनियां नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, विस्तार परियोजनाओं या नए निवेश के लिए राज्य का रुख करें।
नई टेक्सटाइल पॉलिसी के बाद बढ़ी सक्रियता
आंध्र प्रदेश की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब राज्य सरकार ने हाल ही में नई टेक्सटाइल पॉलिसी को मंजूरी दी है। सरकार की कोशिश टेक्सटाइल सेक्टर में नए निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ रोजगार के अवसर पैदा करने की है।
आंध्र प्रदेश के पास बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन, पोर्ट कनेक्टिविटी और कई प्रमुख बाजारों तक पहुंच जैसे फायदे हैं। सरकार इन्हीं खूबियों को निवेशकों के सामने रखकर तमिलनाडु की कंपनियों को आकर्षित करना चाहती है।
नायडू के सत्ता में लौटने के बाद EDB पर फोकस
साल 2024 में एन. चंद्रबाबू नायडू के मुख्यमंत्री बनने के बाद आंध्र प्रदेश ने निवेश आकर्षित करने की अपनी रणनीति को नए सिरे से मजबूत किया है।
राज्य ने आंध्र प्रदेश इकोनॉमिक डेवलपमेंट बोर्ड (EDB) को निवेशकों के साथ संपर्क बढ़ाने और बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स को राज्य में लाने के लिए सक्रिय किया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, तमिलनाडु की निवेश प्रोत्साहन एजेंसी Guidance से जुड़े करीब सात अधिकारियों ने इस्तीफा दिया है और उन्हें आंध्र प्रदेश के EDB से ऑफर मिलने की जानकारी सामने आई है।
अगर यह सिलसिला आगे बढ़ता है, तो इससे दोनों राज्यों की निवेश आकर्षित करने वाली एजेंसियों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।
तमिलनाडु से आंध्र प्रदेश पहुंचीं बड़ी कंपनियां
आंध्र प्रदेश की रणनीति का असर कुछ बड़े निवेश फैसलों में भी दिखाई देने लगा है। दक्षिण कोरियाई फुटवियर निर्माता Hwaseung इसका एक उदाहरण है।
कंपनी ने पहले तमिलनाडु के थूथुकुडी में करीब 1,720 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट की योजना बनाई थी। हालांकि बाद में कंपनी ने अपनी परियोजना को आंध्र प्रदेश के कुप्पम में स्थापित करने का फैसला किया।
यह बदलाव तमिलनाडु के लिए इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि थूथुकुडी और आसपास का क्षेत्र मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है।
Royal Enfield का भी आंध्र प्रदेश में बड़ा विस्तार
दूसरी बड़ी कंपनी Royal Enfield है। करीब 1901 में स्थापना के बाद पहली बार कंपनी ने तमिलनाडु से बाहर अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने का फैसला किया है।
Royal Enfield आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले में नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने की योजना पर आगे बढ़ रही है। यह फैसला आंध्र प्रदेश के लिए ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिहाज से अहम है।
तमिलनाडु लंबे समय से ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री का बड़ा केंद्र रहा है। ऐसे में राज्य की स्थापित कंपनियों और सप्लाई चेन से जुड़े कारोबार को आंध्र प्रदेश की ओर आकर्षित करना नायडू सरकार की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
तमिलनाडु के सामने बढ़ रही चुनौती
तमिलनाडु देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में शामिल है। चेन्नई और उसके आसपास का इलाका ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और आईटी सेक्टर का बड़ा केंद्र है। वहीं कोयंबटूर टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग उद्योग के लिए जाना जाता है।
ऐसे में आंध्र प्रदेश का चेन्नई और कोयंबटूर जैसे शहरों में सीधे रोडशो करना केवल निवेश जुटाने का सामान्य प्रयास नहीं माना जा रहा है। यह इस बात का संकेत भी है कि आंध्र प्रदेश अब तमिलनाडु के पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्रों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए अधिक आक्रामक रणनीति अपना रहा है।
क्यों बढ़ रही है दोनों राज्यों में निवेश की होड़?
तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश दोनों ही दक्षिण भारत के प्रमुख औद्योगिक राज्य हैं। दोनों राज्यों के पास समुद्री बंदरगाह, बड़े शहर, कुशल श्रमबल और देश के दूसरे हिस्सों से बेहतर कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं हैं।
निवेशकों के लिए राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि सरकारें कंपनियों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, जमीन, प्रोत्साहन और सुविधाएं देने की कोशिश करें।
आंध्र प्रदेश की नई रणनीति में खास बात यह है कि वह अब दूसरे राज्यों के निवेशकों को अपने यहां बुलाने के साथ-साथ सीधे उन औद्योगिक क्लस्टरों तक पहुंच बना रहा है, जहां पहले से बड़ी कंपनियों का मजबूत आधार मौजूद है।
आगे क्या होगा?
चेन्नई और कोयंबटूर में होने वाले रोडशो के बाद यह साफ होगा कि तमिलनाडु की कितनी कंपनियां आंध्र प्रदेश में निवेश के प्रस्तावों में दिलचस्पी दिखाती हैं। अगर बड़ी संख्या में कंपनियां आंध्र प्रदेश में विस्तार या नई यूनिट लगाने का फैसला करती हैं, तो इससे राज्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा मिल सकता है।
वहीं तमिलनाडु के लिए भी यह अपने निवेश माहौल को और मजबूत करने की चुनौती होगी। दोनों राज्यों के बीच यह प्रतिस्पर्धा आने वाले वर्षों में टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में और तेज हो सकती है।
कुल मिलाकर, चंद्रबाबू नायडू की सरकार जिस तरह तमिलनाडु के प्रमुख औद्योगिक शहरों में पहुंचकर निवेशकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही है, उससे दक्षिण भारत में ‘इंडस्ट्री और इन्वेस्टमेंट वॉर’ का एक नया अध्याय शुरू होता दिखाई दे रहा है।


