मुंबई/नई दिल्ली: देश की प्रमुख IT कंपनी Tech Mahindra एक नए विवाद के केंद्र में आ गई है, जहां सोशल मीडिया पर इसके गोरेगांव स्थित BPO ऑफिस को लेकर “Mini Pakistan” जैसे संवेदनशील आरोप लगाए गए। हालांकि कंपनी ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें “बेबुनियाद और गलत” बताया है।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पहले से ही Tata Consultancy Services (TCS) के नाशिक कैंपस में यौन उत्पीड़न और धार्मिक दबाव से जुड़े गंभीर आरोपों की जांच चल रही है। ऐसे में IT सेक्टर की कार्यसंस्कृति और निष्पक्षता पर एक व्यापक बहस शुरू हो गई है।
सोशल मीडिया से शुरू हुआ विवाद
Received a concerning message from an employee at a Tech Mahindra BPO in Goregaon, alleging biased hiring practices, unequal workplace policies, and religious favoritism during festivals.
If true, this raises serious questions about corporate neutrality and fair work culture.… pic.twitter.com/r7bRimczzk
— ADV. ASHUTOSH J. DUBEY 🇮🇳 (@AdvAshutoshBJP) April 12, 2026 इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब बॉम्बे हाई कोर्ट के वकील Ashutosh Dubey ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में Twitter) पर एक पोस्ट साझा किया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें एक व्यक्ति से संदेश मिला है, जो खुद को Tech Mahindra के गोरेगांव BPO का कर्मचारी बता रहा है।
उस संदेश में आरोप लगाए गए कि:
- कंपनी में भर्ती प्रक्रिया में धार्मिक पक्षपात हो रहा है
- कुछ कर्मचारियों को विशेष छूट दी जा रही है
- कार्यस्थल पर धार्मिक आधार पर अलग व्यवहार किया जा रहा है
Dubey ने यह भी कहा कि अगर ये आरोप सही हैं, तो यह कॉर्पोरेट निष्पक्षता और कार्यस्थल समानता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
वायरल मैसेज में क्या-क्या आरोप लगाए गए?
सोशल मीडिया पर वायरल हुए मैसेज में कई विवादित और संवेदनशील दावे किए गए। इनमें कहा गया कि:
- ऑफिस में 60% से अधिक कर्मचारी एक ही समुदाय से हैं
- रमजान के दौरान विशेष सुविधाएं दी जाती हैं
- रोजाना इफ्तार पार्टियां आयोजित होती हैं
- कुछ HR अधिकारियों पर पक्षपातपूर्ण भर्ती का आरोप है
सबसे विवादित लाइन वह थी जिसमें कर्मचारी ने दावा किया कि उसे “Mini Pakistan” जैसा माहौल महसूस होता है।
यह शब्दावली अपने आप में काफी संवेदनशील है और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई।
“Footwear-Free Zone” नोटिस का दावा
Received Instagram DM of girl employee: At Tech Mahindra office, pantry declared “Footwear-Free Zone” till Ramzan for prayers & iftar.
Colleagues asked to follow it in the name of “unity”.
Question is simple: Is workplace policy now religion-based, or should it remain neutral… pic.twitter.com/pL1u3l79f7
— ADV. ASHUTOSH J. DUBEY 🇮🇳 (@AdvAshutoshBJP) April 12, 2026 विवाद तब और बढ़ गया जब एक और दावा सामने आया कि ऑफिस के पैंट्री एरिया को रमजान के दौरान “Footwear-Free Zone” घोषित किया गया था।
वायरल तस्वीरों में एक नोटिस दिखाया गया जिसमें लिखा था कि:
- पैंट्री में जूते पहनकर न जाएं
- यह स्थान नमाज और रोजा खोलने के लिए इस्तेमाल हो रहा है
- सभी कर्मचारियों से सहयोग की अपील की गई
इस दावे ने बहस को और भड़का दिया और इसे धार्मिक पक्षपात के रूप में देखा जाने लगा।
Tech Mahindra का आधिकारिक जवाब
इन आरोपों के बाद Tech Mahindra ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि:
- सभी आरोप “गलत और निराधार” हैं
- वायरल “Footwear-Free Zone” की तस्वीर उनके किसी ऑफिस की नहीं है
- भर्ती में पक्षपात के आरोप पूरी तरह झूठे हैं
कंपनी ने कहा कि उन्होंने आंतरिक जांच की है और उसमें कोई भी आरोप सही नहीं पाया गया।
“Inclusive Workplace” पर कंपनी का जोर
Tech Mahindra ने अपने बयान में कहा कि:
“हम एक ऐसा कार्यस्थल बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं जहां हर व्यक्ति के साथ समानता और सम्मान का व्यवहार हो, चाहे उसका धर्म कुछ भी हो।”
कंपनी ने यह भी कहा कि:
- किसी भी तरह के भेदभाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
- नीतियों की लगातार समीक्षा की जाती है
- कर्मचारियों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता है
बड़ा संदर्भ: TCS केस के बाद बढ़ी संवेदनशीलता
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब Tata Consultancy Services के नाशिक BPO में यौन शोषण और कथित धार्मिक दबाव के मामले की SIT जांच चल रही है।
उस केस के कारण:
- IT सेक्टर पहले से ही जांच के दायरे में है
- कार्यस्थल सुरक्षा और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं
- हर नए आरोप को ज्यादा गंभीरता से देखा जा रहा है
इस वजह से Tech Mahindra का यह विवाद और ज्यादा चर्चा में आ गया।
क्या यह “सोशल मीडिया ट्रायल” है?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में दो पहलुओं को समझना जरूरी है:
पहला — क्या आरोपों में सच्चाई है?
दूसरा — क्या सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के फैल रही जानकारी नुकसान पहुंचा सकती है?
कई बार:
- अधूरी जानकारी वायरल हो जाती है
- संस्थानों की छवि को नुकसान होता है
- जांच पूरी होने से पहले ही निष्कर्ष निकाल लिए जाते हैं
इसलिए ऐसे मामलों में आधिकारिक जांच और तथ्य बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
निष्कर्ष: सच्चाई क्या है, यह जांच बताएगी
“Mini Pakistan” विवाद ने एक बार फिर यह दिखाया है कि कॉर्पोरेट सेक्टर में पारदर्शिता और विश्वास कितना जरूरी है।
एक तरफ कर्मचारी की शिकायत है, दूसरी तरफ कंपनी का स्पष्ट खंडन। ऐसे में अंतिम सच्चाई केवल जांच और तथ्यों के आधार पर ही सामने आ सकती है।
लेकिन इतना तय है कि:
- IT कंपनियों को अपनी नीतियों को और मजबूत करना होगा
- कार्यस्थल पर समानता और संवेदनशीलता बनाए रखना जरूरी है
- सोशल मीडिया पर फैलने वाली सूचनाओं को जिम्मेदारी से लेना होगा
आने वाले दिनों में अगर इस मामले में कोई आधिकारिक जांच होती है, तो उससे पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।
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