Taapsee Pannu: बॉलीवुड एक्ट्रेस तापसी पन्नू ने फिल्मों में महिलाओं के चित्रण और उन्हें ग्लैमर के नाम पर ‘ऑब्जेक्ट’ की तरह पेश किए जाने को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि फिल्म इंडस्ट्री में इस तरह के कंटेंट को अक्सर दर्शकों की मांग बताकर सही ठहराया जाता है। तापसी के मुताबिक, जब तक दर्शकों का नजरिया नहीं बदलेगा, तब तक कलाकार अकेले इस लड़ाई को नहीं जीत सकते।
तापसी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राम चरण की ‘पेड्डी’ और यश की ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ में महिला किरदारों के चित्रण को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है। दोनों फिल्मों में महिलाओं को दिखाने के तरीके पर दर्शकों के एक वर्ग ने सवाल उठाए हैं।
‘लोग कहते हैं जनता यही मांग रही है’
जूम टीवी के साथ बातचीत में तापसी पन्नू ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि अगर दर्शक किसी खास तरह का कंटेंट देखना चाहते हैं, तो मेकर्स उसे बनाने के लिए मजबूर हैं।
एक्ट्रेस ने कहा, “लोगों को लगता है कि जनता मांग रही है तो हमें देना चाहिए, वरना हम पैसे कैसे कमाएंगे? इसलिए कला पीछे छूट जाती है, हुनर पीछे छूट जाता है।”
तापसी के मुताबिक, यह पूरा मामला ‘डिमांड और सप्लाई’ से जुड़ा हुआ है। अगर दर्शकों के बीच किसी तरह के कंटेंट की मांग मौजूद है और उसे सोशल मीडिया पर लगातार बढ़ावा मिलता है, तो मेकर्स भी उसी दिशा में आगे बढ़ते हैं।
सोशल मीडिया को लेकर भी तापसी ने कही बड़ी बात
तापसी ने सोशल मीडिया पर महिलाओं की तस्वीरों और वीडियो को लेकर लोगों के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि फिल्म में किसी महिला को जिस तरह दिखाया जाता है, उसकी आलोचना करने वाले लोग मिल जाएंगे, लेकिन उसी कंटेंट को वायरल करने वाले दर्शक भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर लोग तस्वीरों को जूम करके देखते हैं और अलग-अलग एंगल से वीडियो या तस्वीरें बनाकर वायरल करते हैं। ऐसे में इंडस्ट्री के लिए दर्शकों को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराना भी आसान हो जाता है।
‘कोविड से पहले हम काफी आगे बढ़े थे’
तापसी ने भारतीय सिनेमा में आए बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि कोविड से पहले फिल्मों में काफी प्रगति देखने को मिली थी। उस दौर में कहानी, कला और कलाकारों के हुनर को लेकर बेहतर काम हो रहा था।
उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री बेहतरीन फिल्मों के स्तर तक पहुंच रही थी, लेकिन अब उन्हें लगता है कि सिनेमा दोबारा पीछे जा रहा है।
एक्ट्रेस के मुताबिक, जब भी इस तरह के कंटेंट पर सवाल उठाए जाते हैं तो कई मेकर्स इसका दोष दर्शकों पर डाल देते हैं। ऐसे में एक्टर्स के पास इसका कोई ठोस जवाब नहीं होता।
‘दर्शकों के सपोर्ट के बिना ये लड़ाई नहीं जीत सकते’
तापसी ने इस मुद्दे को कलाकारों और दर्शकों के बीच जुड़ी एक बड़ी लड़ाई बताया। उनका कहना है कि एक्टर्स अपनी तरफ से आवाज जरूर उठा सकते हैं, लेकिन दर्शकों के समर्थन के बिना बदलाव लाना मुश्किल है।
उन्होंने कहा कि यह ऐसी लड़ाई है जिसे कलाकार अकेले हार सकते हैं और इसे जीतने में सिर्फ दर्शक ही उनकी मदद कर सकते हैं।
‘पेड्डी’ में जाह्नवी कपूर के किरदार पर भी हुआ विवाद
तापसी की टिप्पणी ऐसे वक्त आई है जब ‘पेड्डी’ में जाह्नवी कपूर के किरदार को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई। फिल्म में उनके किरदार के कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा हाइपरसेक्सुअलाइज्ड चित्रण को लेकर सवाल उठाए गए।
दर्शकों के एक वर्ग ने कैमरा वर्क, रोमांटिक दृश्यों और जाह्नवी के किरदार को उसकी कहानी एवं व्यक्तित्व के बजाय उसके शारीरिक रूप पर केंद्रित किए जाने की आलोचना की।
विवाद बढ़ने के बाद फिल्म से संबंधित कुछ दृश्यों को हटाया गया और निर्देशक की ओर से माफी भी मांगी गई।
‘टॉक्सिक’ में महिलाओं के चित्रण पर भी उठे सवाल
यश की फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ भी महिला किरदारों को लेकर चर्चा में रही। फिल्म की रिलीज से पहले ही इसके कुछ पहलुओं पर बहस शुरू हो गई थी।
रिलीज के बाद आलोचना और तेज हुई। कुछ दर्शकों ने आरोप लगाया कि फिल्म में महिला किरदारों को उनके व्यक्तित्व और कहानी के बजाय ग्लैमर, कामुकता और मुख्य पुरुष किरदार के साथ उनके रिश्तों के जरिए ज्यादा पेश किया गया।
इसी वजह से फिल्म में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठते रहे।
‘गांधारी’ में नजर आईं तापसी पन्नू
वर्कफ्रंट की बात करें तो तापसी पन्नू हाल ही में नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘गांधारी’ में दिखाई दी हैं। देवाशीष मखीजा के निर्देशन में बनी यह एक्शन-थ्रिलर फिल्म है।
फिल्म में तापसी के साथ इश्वाक सिंह, छाया कदम, स्वस्तिका मुखर्जी और मीता वशिष्ठ भी अहम भूमिकाओं में हैं। ‘गांधारी’ नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है।
तापसी का ताजा बयान एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि फिल्मों में महिलाओं को किस नजरिए से पेश किया जाना चाहिए और इस बदलाव की जिम्मेदारी केवल फिल्म इंडस्ट्री की है या दर्शकों की भी इसमें बराबर भूमिका है।


