Gold Price Outlook: सोने की कीमतों में इस सप्ताह जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड ने तेजी दिखाते हुए 4,500 डॉलर प्रति औंस का स्तर पार किया और कुछ समय के लिए करीब 4,550 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। हालांकि, इसके बाद ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू होने से कीमतों में नरमी देखने को मिली।
भारत में भी सोने की कीमतों में मिला-जुला रुख रहा। 4 सितंबर को दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना लगातार दूसरे दिन बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी दोनों पर दबाव दिखाई दिया। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सोना एक बार फिर तेजी पकड़कर 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर पाएगा?
1.60 लाख रुपये का स्तर गोल्ड के लिए बड़ी बाधा
कमोडिटी मार्केट के जानकारों के मुताबिक, MCX Gold Futures के लिए 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर फिलहाल एक महत्वपूर्ण तकनीकी रेजिस्टेंस है। अगर सोना इस स्तर को मजबूती से पार करने में सफल रहता है तो इसमें आगे भी तेजी की गुंजाइश बन सकती है।
विश्लेषकों के अनुसार, 1.60 लाख रुपये का स्तर टूटने के बाद गोल्ड फ्यूचर्स 1.65 लाख से 1.70 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने की कोशिश कर सकता है।
वहीं, नीचे की तरफ 1.50 लाख से 1.52 लाख रुपये का क्षेत्र सोने के लिए अहम सपोर्ट माना जा रहा है। अगर कीमत इस दायरे के ऊपर बनी रहती है तो तेजी की संभावना बरकरार रह सकती है।
हालांकि, अगर गोल्ड फ्यूचर्स 1.48 लाख रुपये के नीचे फिसलता है तो इसमें आगे और कमजोरी देखने को मिल सकती है।
सोने की कीमतों को प्रभावित करेंगे ये 5 बड़े फैक्टर
आने वाले दिनों में गोल्ड की दिशा कई महत्वपूर्ण आर्थिक और वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को खासतौर पर इन पांच चीजों पर नजर रखनी होगी:
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति
- अमेरिकी डॉलर की चाल
- अमेरिकी बॉन्ड यील्ड
- अमेरिकी अर्थव्यवस्था और महंगाई के आंकड़े
- दुनिया के केंद्रीय बैंकों की गोल्ड खरीदारी और रुपये की चाल
इनमें से किसी भी फैक्टर में बड़ा बदलाव सोने की कीमतों पर सीधा असर डाल सकता है।
अगस्त की महंगाई के आंकड़ों पर बाजार की नजर
अमेरिका में आने वाले महंगाई के आंकड़े सोने के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर ने संकेत दिया है कि अगर महंगाई के आंकड़ों से पता चलता है कि इनफ्लेशन में दोबारा तेजी नहीं आ रही है, तो सितंबर की फेड बैठक में ब्याज दरों को लेकर बड़ा बदलाव जरूरी नहीं हो सकता।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली बैठक 15-16 सितंबर को होने वाली है। इससे पहले आने वाले अगस्त के इनफ्लेशन डेटा पर बाजार की खास नजर रहेगी।
आम तौर पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी या लंबे समय तक ऊंची दरें सोने के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं, क्योंकि इससे बिना ब्याज वाले एसेट गोल्ड की आकर्षकता कम हो सकती है। इसके उलट ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ने पर सोने को सपोर्ट मिल सकता है।
डॉलर और बॉन्ड यील्ड की दिशा भी अहम
सोने की कीमतों के लिए अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। डॉलर मजबूत होने पर आमतौर पर गोल्ड पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि डॉलर में कमजोरी सोने के लिए सकारात्मक साबित हो सकती है।
हाल के दिनों में जापानी येन में मजबूती के बीच डॉलर की चाल में भी बदलाव देखने को मिला है। साथ ही अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड में पिछले कुछ समय में उछाल आया है।
अगर बॉन्ड यील्ड और डॉलर दोनों में तेजी बनी रहती है तो सोने पर दबाव आ सकता है। इसके विपरीत यील्ड में गिरावट और डॉलर में कमजोरी गोल्ड की तेजी को सहारा दे सकती है।
फेड के सामने महंगाई सबसे बड़ी चुनौती
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लिए इस समय महंगाई पर नियंत्रण एक प्रमुख प्राथमिकता है। अमेरिका में इनफ्लेशन का लक्ष्य 2 फीसदी रखा गया है।
आने वाले महंगाई आंकड़े यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं कि फेड सितंबर की बैठक में ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है। अगर महंगाई उम्मीद से कम रहती है तो बाजार में नरम मौद्रिक नीति की उम्मीद बढ़ सकती है, जिसका फायदा सोने को मिल सकता है।
वहीं, महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा मजबूत रहे तो ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हो सकती है और गोल्ड पर दबाव देखने को मिल सकता है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी दे रही सोने को मजबूत सपोर्ट
सोने की कीमतों के लिए सबसे मजबूत सपोर्ट में से एक दुनिया के केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी है। कई देशों के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिशों के बीच केंद्रीय बैंकों की गोल्ड खरीदारी बढ़ी है। इससे सोने की कीमतों को लंबी अवधि में सपोर्ट मिल रहा है।
गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक इस साल औसतन हर महीने करीब 50 टन सोना खरीद सकते हैं। बैंक ने सोने के लिए साल के अंत तक 4,900 डॉलर प्रति औंस का लक्ष्य भी बताया है।
क्या 1.60 लाख रुपये के पार जाएगा सोना?
फिलहाल गोल्ड के सामने 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर सबसे महत्वपूर्ण बाधाओं में से एक है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी जारी रहती है, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी मजबूत रहती है और डॉलर-बॉन्ड यील्ड में नरमी आती है, तो घरेलू बाजार में सोने के लिए 1.60 लाख रुपये का स्तर पार करना संभव हो सकता है।
इसके बाद 1.65 लाख से 1.70 लाख रुपये के स्तर बाजार की अगली बड़ी मंजिल बन सकते हैं। हालांकि, यह पूरी तरह बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
दूसरी तरफ, अगर अमेरिकी महंगाई के आंकड़े मजबूत आते हैं, डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी जारी रहती है तथा फेड की ओर से सख्त रुख दिखाई देता है, तो सोने में मुनाफावसूली बढ़ सकती है।
इसलिए निवेशकों के लिए फिलहाल 1.60 लाख रुपये का रेजिस्टेंस और 1.50-1.52 लाख रुपये का सपोर्ट जोन बेहद महत्वपूर्ण रहेगा।


