मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के लिए 20 से 24 जुलाई का कारोबारी सप्ताह कई अहम घटनाओं से भरा रहने वाला है। निवेशकों की निगाहें वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की पहली तिमाही (Q1) के नतीजों, PMI (परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) के आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका-ईरान के बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव पर रहेंगी। इन सभी कारकों का सीधा असर बाजार की दिशा और निवेशकों की धारणा पर देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कॉर्पोरेट नतीजे उम्मीद से बेहतर रहते हैं और वैश्विक मोर्चे पर तनाव कम होता है, तो बाजार में तेजी का माहौल बना रह सकता है। वहीं, कच्चे तेल में तेज उछाल या भू-राजनीतिक हालात बिगड़ने पर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
24 जुलाई को आएंगे PMI के आंकड़े
आने वाले सप्ताह की सबसे महत्वपूर्ण घरेलू आर्थिक घटना 24 जुलाई को जारी होने वाले पीएमआई (PMI) आंकड़े होंगे। पीएमआई किसी देश के विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख संकेतक माना जाता है।
यदि पीएमआई मजबूत रहता है तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत देगा, जिससे शेयर बाजार को सकारात्मक समर्थन मिल सकता है। वहीं, कमजोर आंकड़े निवेशकों की धारणा पर दबाव डाल सकते हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से बाजार सतर्क
वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव भी निवेशकों की चिंता का बड़ा कारण बना हुआ है। हालिया घटनाओं में ईरानी हमलों में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा गया है। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान पर नई एयर स्ट्राइक भी की हैं।
भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ती है और इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी नजर
मध्य पूर्व में तनाव का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। यदि संघर्ष और बढ़ता है तो तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका के चलते कीमतों में और तेजी आ सकती है।
शुक्रवार के कारोबार में:
- ब्रेंट क्रूड 4.59% की तेजी के साथ 88.10 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
- डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड 4.48% की मजबूती के साथ 84.49 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई, रुपये और बाजार तीनों पर असर डाल सकती हैं।
इन बड़ी कंपनियों के आएंगे Q1 रिजल्ट
20 से 24 जुलाई के बीच कई दिग्गज कंपनियां अपने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी करेंगी। इनमें शामिल हैं:
- बजाज हेल्थकेयर
- इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB)
- अल्ट्राटेक सीमेंट
- अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस
- बजाज ऑटो
- जेएसडब्ल्यू इंफ्रा
- महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंस
- अदाणी ग्रीन एनर्जी
- अदाणी पावर
- बीपीसीएल
- जेएसडब्ल्यू एनर्जी
- इन्फोसिस
- इंडिगो
इन कंपनियों के नतीजे संबंधित सेक्टरों के शेयरों में तेज हलचल ला सकते हैं।
बीते सप्ताह कैसी रही बाजार की चाल?
पिछले कारोबारी सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार ने सकारात्मक प्रदर्शन किया।
- सेंसेक्स 582.06 अंक यानी 0.75% बढ़कर 78,151.45 पर बंद हुआ।
- निफ्टी 50 127.40 अंक यानी 0.53% चढ़कर 24,334.30 पर पहुंच गया।
यह बढ़त मुख्य रूप से आईटी और चुनिंदा बड़े शेयरों में खरीदारी के कारण देखने को मिली।
सेक्टोरल इंडेक्स का प्रदर्शन
सबसे ज्यादा बढ़ने वाले सेक्टर
- निफ्टी आईटी : +4.34%
- निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स : +3.11%
- निफ्टी मीडिया : +2.50%
- निफ्टी प्राइवेट बैंक : +1.51%
- निफ्टी ऑयल एंड गैस : +1.08%
- निफ्टी ऑटो : +0.89%
- निफ्टी सर्विसेज : +0.87%
- निफ्टी पीएसई : +0.28%
- निफ्टी एनर्जी : +0.09%
गिरावट वाले सेक्टर
- निफ्टी रियल्टी : -2.12%
- निफ्टी मेटल : -1.99%
- निफ्टी इंडिया डिफेंस : -1.48%
- निफ्टी एफएमसीजी : -1.14%
- निफ्टी पीएसयू बैंक : -0.83%
- निफ्टी कमोडिटीज : -0.60%
- निफ्टी हेल्थकेयर : -0.34%
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
आने वाला सप्ताह शेयर बाजार के लिए काफी निर्णायक साबित हो सकता है। एक ओर कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार को दिशा देंगे, वहीं दूसरी ओर पीएमआई के आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति का संकेत देंगे। इसके अलावा अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव विदेशी निवेशकों की रणनीति और घरेलू बाजार की चाल पर भी असर डाल सकते हैं।
अगर वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं और कॉर्पोरेट नतीजे उम्मीद से बेहतर आते हैं, तो बाजार में तेजी का सिलसिला जारी रह सकता है। हालांकि निवेशकों को इस सप्ताह बढ़ी हुई अस्थिरता (Volatility) के लिए तैयार रहना चाहिए।


