SIP Returns: अगर आपकी इक्विटी SIP को दो साल हो चुके हैं और रिटर्न देखकर निराशा हो रही है, तो जल्दबाजी में निवेश बंद करने से पहले पुराने आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है। एक विश्लेषण में सामने आया कि Nifty 500 TRI में ऐसे कई मौके आए जब दो साल की SIP का रिटर्न 5% या उससे भी कम रहा। लेकिन निवेश जारी रखने पर अगले कुछ वर्षों में तस्वीर काफी बदल गई।
दो साल की SIP में खराब रिटर्न के 50 मामले मिले
फोनपे (PhonePe) के Share.Market के CRISP म्यूचुअल फंड्स स्कोरकार्ड (जून 2026) में Nifty 500 TRI के ऐतिहासिक SIP रिटर्न का विश्लेषण किया गया। इसमें दो दशक से ज्यादा के आंकड़ों के आधार पर यह देखने की कोशिश की गई कि कमजोर शुरुआत के बाद SIP ने आगे कैसा प्रदर्शन किया।
विश्लेषण में ऐसे 50 मामले मिले, जिनमें दो साल की SIP का सालाना रिटर्न 5% या उससे कम रहा। इनमें 32 मामलों में रिटर्न शून्य या नेगेटिव था। वहीं, बाकी 18 मामलों में रिटर्न 0% से ज्यादा लेकिन 5% तक रहा।
यानी ऐसा होना असामान्य नहीं है कि इक्विटी में लगातार दो साल निवेश करने के बाद भी निवेशक को खास मुनाफा दिखाई न दे।
दो साल बाद SIP जारी रखने पर क्या हुआ?
अब इस विश्लेषण का सबसे अहम हिस्सा सामने आता है। जिन 32 मामलों में दो साल बाद SIP का रिटर्न शून्य या नेगेटिव था, उनमें अगले तीन साल तक निवेश जारी रखने पर किसी भी मामले में अंतिम रिटर्न नेगेटिव नहीं रहा।
इन मामलों में:
- 53.1% मामलों में सालाना SIP रिटर्न 15-20% रहा।
- 15.6% मामलों में रिटर्न 10-15% के बीच रहा।
- 21.9% मामलों में रिटर्न 5-10% रहा।
- सिर्फ 9.4% मामलों में रिटर्न 0-5% की सीमा में रहा।
इससे संकेत मिलता है कि बाजार के खराब दौर में सिर्फ दो साल के प्रदर्शन को देखकर लंबी अवधि के निवेश का फैसला करना उचित नहीं हो सकता।
5 साल बाद तस्वीर और बेहतर हुई
जिन 18 मामलों में दो साल की SIP का रिटर्न 0-5% के बीच था, वहां भी पांच साल तक निवेश जारी रखने पर ऐतिहासिक आंकड़ों में कोई मामला 5% से नीचे नहीं रहा।
इनमें करीब 72% मामलों में सालाना रिटर्न 10% या उससे ज्यादा रहा।
इसका मतलब यह नहीं है कि हर SIP पांच साल में निश्चित रूप से इतना रिटर्न देगी। बल्कि ऐतिहासिक डेटा यह दिखाता है कि निवेश की अवधि बढ़ने के साथ बाजार के छोटे और मध्यम अवधि के उतार-चढ़ाव का असर कम हो सकता है।
गिरते बाजार में SIP कैसे मदद करती है?
SIP में निवेश की एक खासियत रुपया-कॉस्ट एवरेजिंग है। इसका मतलब है कि निवेशक हर महीने एक निश्चित रकम निवेश करता है।
जब बाजार गिरता है और म्यूचुअल फंड की NAV कम होती है, तो उसी रकम में ज्यादा यूनिट्स खरीदी जाती हैं। वहीं बाजार बढ़ने पर उन्हीं यूनिट्स की वैल्यू बढ़ सकती है।
उदाहरण के लिए, अगर कोई निवेशक हर महीने ₹5,000 की SIP करता है और किसी महीने NAV ₹50 है, तो उसे 100 यूनिट्स मिलेंगी। अगर बाजार गिरने के कारण अगले महीने NAV ₹40 हो जाती है, तो उसी ₹5,000 में उसे 125 यूनिट्स मिलेंगी।
बाद में बाजार में सुधार आने पर कम NAV पर खरीदी गई अतिरिक्त यूनिट्स भी उस तेजी का फायदा उठा सकती हैं।
5 साल और 10 साल की SIP में क्या दिखा?
रिपोर्ट में पिछले करीब 20 वर्षों के रोलिंग रिटर्न को भी देखा गया। आंकड़ों के मुताबिक पांच साल की SIP अवधि में केवल करीब 1% मामलों में सालाना रिटर्न नेगेटिव रहा।
वहीं सात और दस साल की SIP अवधि के ऐतिहासिक आंकड़ों में नेगेटिव सालाना रिटर्न नहीं दिखा।
दस साल की अवधि में:
- करीब 65% मामलों में सालाना रिटर्न 10-15% रहा।
- करीब 26% मामलों में सालाना रिटर्न 15-20% रहा।
- यानी लगभग 90% मामलों में सालाना रिटर्न 10% या उससे ज्यादा रहा।
ये आंकड़े बताते हैं कि इक्विटी SIP में निवेश की अवधि बढ़ने के साथ ऐतिहासिक तौर पर नतीजों में स्थिरता देखने को मिली है।
क्या दो साल बाद SIP बंद कर देनी चाहिए?
सिर्फ इसलिए SIP बंद कर देना कि दो साल बाद रिटर्न जीरो या बहुत कम है, ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर जरूरी नहीं है। इक्विटी बाजार में दो साल की अवधि कई बार बाजार के एक कमजोर चक्र के साथ खत्म हो सकती है।
हालांकि, इसका यह मतलब भी नहीं है कि हर SIP को बिना समीक्षा के जारी रखा जाए। निवेशक को समय-समय पर फंड की क्वालिटी, पोर्टफोलियो, जोखिम, लक्ष्य और अपनी वित्तीय स्थिति की समीक्षा करनी चाहिए।
अगर किसी म्यूचुअल फंड का प्रदर्शन लगातार अपने बेंचमार्क और समान कैटेगरी के फंडों से कमजोर है, तो विशेषज्ञ की सलाह लेकर बदलाव पर विचार किया जा सकता है।
SIP में धैर्य क्यों जरूरी है?
SIP का उद्देश्य आमतौर पर छोटी अवधि में तेज रिटर्न हासिल करना नहीं होता। यह नियमित निवेश के जरिए लंबी अवधि में संपत्ति बनाने की रणनीति है।
बाजार में गिरावट आने पर SIP बंद करने के बजाय उसी अवधि में नियमित निवेश जारी रखने से निवेशक को कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स खरीदने का मौका मिलता है। लेकिन बाजार कब और कितनी तेजी से रिकवर करेगा, इसकी गारंटी कोई नहीं दे सकता।
इसलिए दो साल के जीरो रिटर्न को देखकर घबराने के बजाय यह देखना जरूरी है कि निवेश का लक्ष्य क्या है और उसके लिए कितना समय बाकी है।
जरूरी बात: रिटर्न की कोई गारंटी नहीं
यह विश्लेषण जून 2026 तक पिछले 20 वर्षों में हर महीने के अंत में Nifty 500 TRI के ऐतिहासिक रोलिंग रिटर्न पर आधारित है। यह किसी एक म्यूचुअल फंड की भविष्य की कमाई की गारंटी नहीं देता।
ऐतिहासिक प्रदर्शन से सिर्फ यह समझने में मदद मिलती है कि अलग-अलग बाजार परिस्थितियों में लंबी अवधि के SIP निवेश ने अतीत में कैसा प्रदर्शन किया। भविष्य में बाजार का प्रदर्शन अलग हो सकता है।
इसलिए अगर आपकी SIP को दो साल हो चुके हैं और रिटर्न अभी जीरो के आसपास है, तो सिर्फ इसी आधार पर निवेश बंद करने का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को जरूर देखें।
डिस्क्लेमर: newsjagran.in पर प्रकाशित यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। इसमें दिए गए आंकड़े ऐतिहासिक बाजार प्रदर्शन पर आधारित हैं। म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिम के अधीन है और भविष्य के रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखते हुए प्रमाणित वित्तीय सलाहकार की सलाह लें।


