Shashi Tharoor: कांग्रेस नेतृत्व जहां OBC और जाति-आधारित प्रतिनिधित्व पर अपना फोकस बढ़ा रहा है, वहीं तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पार्टी को जाति और वर्ग की सीमाओं से आगे बढ़कर आम लोगों से जुड़े मुद्दे उठाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को ऐसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, जो जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र से अलग हर भारतीय को प्रभावित करते हैं।
‘जाति और धर्म से ऊपर उठने की जरूरत’
News18 को दिए इंटरव्यू में शशि थरूर ने कहा कि कांग्रेस को सीमित सामाजिक समूहों के हितों से आगे बढ़ने की जरूरत है। उनके मुताबिक, पार्टी को आम भारतीयों, मिडिल क्लास, शहरी आबादी और प्रोफेशनल्स से जुड़े मुद्दों को भी मजबूती से उठाना चाहिए।
थरूर ने कहा कि परीक्षाओं से जुड़े विवाद, महंगाई, बढ़ती कीमतें और शहरों में खराब होती नागरिक सुविधाएं ऐसे मुद्दे हैं, जिनका सामना आम लोग रोजाना करते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इन समस्याओं को राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनाना चाहिए।
उन्होंने मिडिल क्लास के लिए शिक्षा के बढ़ते खर्च का भी जिक्र किया और कहा कि ऐसे मुद्दे किसी एक जाति या धर्म तक सीमित नहीं हैं। इनका असर देश के अलग-अलग वर्गों के लोगों पर पड़ता है।
CJP के आंदोलन से कांग्रेस को सीखने की सलाह
शशि थरूर ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP के विरोध प्रदर्शनों का उदाहरण देते हुए कहा कि इस आंदोलन ने ऐसा मुद्दा उठाया, जिसका सीधा संबंध जाति, धर्म, भाषा, राज्य या पंथ से नहीं था। उनके अनुसार, इसी वजह से उसे अलग-अलग वर्गों से समर्थन मिला।
थरूर ने इसे अपनी निजी राय बताते हुए कहा कि सभी राजनीतिक दल इस बात से सीख सकते हैं कि व्यापक जनहित से जुड़े मुद्दे किस तरह लोगों को एक साथ ला सकते हैं।
उन्होंने कहा कि राजनीति में ऐसे विषयों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, जिनसे आम नागरिक सीधे प्रभावित होता है। इससे राजनीतिक दलों को समाज के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
कांग्रेस CJP के प्रदर्शन में शामिल क्यों नहीं हुई?
जब थरूर से पूछा गया कि क्या कांग्रेस को CJP के विरोध प्रदर्शन में आधिकारिक तौर पर शामिल होना चाहिए था, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद पार्टी के इसमें शामिल होने की वकालत की थी।
उन्होंने CJP के प्रदर्शन के साथ सोनम वांगचुक के अनशन का भी जिक्र किया और कहा कि इन गतिविधियों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया था।
हालांकि, थरूर के मुताबिक कांग्रेस के CJP के प्रदर्शन से दूरी बनाने के पीछे संगठन की ओर से भेजा गया एक कथित आपत्तिजनक पत्र वजह बना। उन्होंने कहा कि उस पत्र में कांग्रेस के बारे में ऐसी बातें कही गई थीं, जिन्हें पार्टी ने अपमानजनक माना। इसके बाद कांग्रेस ने आंदोलन से खुद को अलग रखना बेहतर समझा।
‘हर संस्था अपने हितों को ध्यान में रखती है’
थरूर ने कांग्रेस के फैसले को समझने योग्य बताते हुए कहा कि हर संस्था अपने हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेती है। अगर कांग्रेस को लगा कि CJP एक संस्था के तौर पर उसके खिलाफ है या उसका रवैया कांग्रेस के प्रति विरोधी है, तो पार्टी अपना नाम उस आंदोलन से क्यों जोड़ेगी, यह समझा जा सकता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि CJP को लेकर उनकी टिप्पणी किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विरोध में नहीं है। उनका जोर इस बात पर था कि राजनीतिक दलों को उन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, जो व्यापक स्तर पर आम लोगों को प्रभावित करते हैं।
क्या है CJP और क्यों चर्चा में आया?
CJP यानी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम का एक व्यंग्यात्मक आंदोलन सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद शुरू किया गया था। इसके तहत NEET पेपर लीक सहित शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किए गए।
इस आंदोलन ने शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सार्वजनिक बहस को तेज किया। शशि थरूर ने इसी उदाहरण के जरिए कांग्रेस को यह संदेश दिया कि ऐसे व्यापक मुद्दे, जो बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करते हैं, राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
थरूर की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब कांग्रेस सामाजिक प्रतिनिधित्व और OBC समुदाय तक अपनी पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रही है। ऐसे में उनका बयान पार्टी के भीतर व्यापक जनाधार और मुद्दा आधारित राजनीति को लेकर एक अलग दृष्टिकोण के तौर पर देखा जा सकता है।


