Shankar Sharma Stock Market Outlook: भारतीय शेयर बाजार में पिछले दो दशकों के दौरान निवेशकों ने शानदार रिटर्न कमाया है, लेकिन आने वाले वर्षों में तस्वीर कुछ अलग हो सकती है। दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा का मानना है कि भारत में अगला बड़ा बुल रन जरूर आएगा, लेकिन उसके लिए निवेशकों को अभी 1 से 2 साल तक इंतजार करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में मिलने वाला रिटर्न पहले की तुलना में काफी कम रह सकता है।
मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में शंकर शर्मा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। देश का आर्थिक आकार तेजी से बढ़ा है और अब भारत 4 से 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। ऐसे में पहले जैसी विस्फोटक ग्रोथ और शेयर बाजार में 20-25% सालाना रिटर्न की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं होगा।
अगले 1-2 साल में आ सकता है मजबूत बुल रन
शंकर शर्मा के अनुसार, बाजार में फिलहाल उतार-चढ़ाव का दौर जारी रह सकता है, लेकिन अगले एक से दो वर्षों के भीतर एक मजबूत और टिकाऊ बुल मार्केट देखने को मिल सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह तेजी पिछले बुल रन जैसी तेज नहीं होगी।
उनका कहना है कि निवेशकों को अब लंबी अवधि की रणनीति अपनानी चाहिए और बाजार से मिलने वाले संभावित रिटर्न को लेकर अपनी अपेक्षाओं को यथार्थवादी बनाना होगा।
अब 14-15% नहीं, 8-10% रिटर्न को मानें सामान्य
शंकर शर्मा का मानना है कि बीते 20 वर्षों में भारतीय शेयर बाजार ने निवेशकों को औसतन 14% से 15% तक का वार्षिक रिटर्न दिया है। लेकिन भविष्य में यह स्तर घट सकता है।
उनके मुताबिक अब निवेशकों को लंबी अवधि में 8% से 10% सालाना रिटर्न की उम्मीद रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत अब उस दौर में पहुंच चुका है जहां अर्थव्यवस्था और बाजार दोनों का आकार इतना बड़ा हो गया है कि पहले जैसी तेज ग्रोथ दोहराना आसान नहीं होगा।
क्या है शंकर शर्मा की ‘1.6 बुल मार्केट्स’ थ्योरी?
शंकर शर्मा ने भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का विश्लेषण करते हुए अपनी ‘1.6 बुल मार्केट्स’ थ्योरी भी समझाई।
उनके अनुसार:
- 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद भारत ने वास्तव में केवल एक बड़ा और टिकाऊ बुल मार्केट देखा, जो 2003 से 2007 के बीच चला।
- हर्षद मेहता के दौर की तेजी को उन्होंने प्राकृतिक और टिकाऊ बुल मार्केट नहीं माना।
- कोविड-19 महामारी के बाद आई तेजी को उन्होंने पूर्ण बुल मार्केट की बजाय लगभग 0.6 बुल मार्केट बताया।
उन्होंने बताया कि 2003-2007 के बुल रन में निफ्टी ने करीब 55% का सालाना रिटर्न दिया था, जबकि कोविड के बाद आई तेजी में यह आंकड़ा करीब 31% रहा। उनके अनुसार अगला बुल रन इससे भी कम रिटर्न देने वाला हो सकता है।
आखिर क्यों धीमी होगी बाजार की रफ्तार?
शंकर शर्मा का मानना है कि बाजार की संभावित धीमी चाल का कारण AI, ब्याज दरें या वैश्विक राजनीति नहीं है।
असल वजह भारत की बढ़ती आर्थिक क्षमता और उसका विशाल आकार है।
उन्होंने कहा कि जब कोई अर्थव्यवस्था छोटी होती है तो उसकी ग्रोथ तेज होती है, लेकिन जैसे-जैसे उसका आकार बढ़ता है, ग्रोथ की रफ्तार स्वाभाविक रूप से धीमी होने लगती है। भारत अब ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है, इसलिए हर साल ऊंची प्रतिशत ग्रोथ हासिल करना पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होगा।
HDFC Bank और Infosys का दिया उदाहरण
अपनी बात को समझाने के लिए शंकर शर्मा ने HDFC Bank और Infosys जैसी बड़ी कंपनियों का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि कोई भी निवेशक आज इन कंपनियों से 35% या 40% की सालाना ग्रोथ की उम्मीद नहीं करता क्योंकि इनका आकार बहुत बड़ा हो चुका है। ठीक यही सिद्धांत किसी देश की अर्थव्यवस्था पर भी लागू होता है।
लार्ज-कैप नहीं, स्मॉल-कैप में दिख रहा बड़ा अवसर
भविष्य के निवेश को लेकर शंकर शर्मा की राय काफी स्पष्ट है। उनका मानना है कि अगली बड़ी तेजी की अगुवाई मौजूदा ब्लू-चिप कंपनियां नहीं करेंगी।
उनके अनुसार:
- स्मॉल-कैप कंपनियों में कमाई बढ़ाने की क्षमता अधिक है।
- नई और उभरती कंपनियों में वेल्थ क्रिएशन के अवसर ज्यादा हैं।
- टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर जैसे सेक्टर आने वाले वर्षों में मजबूत प्रदर्शन कर सकते हैं।
शंकर शर्मा ने कहां लगाया है निवेश?
शंकर शर्मा ने बताया कि उन्होंने स्वयं करीब ₹100 से ₹200 करोड़ का निवेश स्मॉल-कैप कंपनियों में किया है।
उनका फोकस विशेष रूप से उन कंपनियों पर है जो:
- डेटा सेंटर इन्फ्रास्ट्रक्चर
- डिजिटल टेक्नोलॉजी
- टेक इंफ्रास्ट्रक्चर
- भविष्य की डिजिटल इकोनॉमी
से जुड़े कारोबार में काम कर रही हैं। उनका मानना है कि ये सेक्टर अभी अपने शुरुआती विकास चरण में हैं और लंबी अवधि में बेहतर अवसर प्रदान कर सकते हैं।
निवेशकों के लिए क्या है सीख?
शंकर शर्मा की राय बताती है कि आने वाले वर्षों में भारतीय शेयर बाजार में अवसर खत्म नहीं होंगे, लेकिन निवेश की रणनीति बदलनी होगी। केवल तेज रिटर्न की उम्मीद करने के बजाय मजबूत कंपनियों, लंबी अवधि के निवेश और सही सेक्टर चयन पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण होगा।
यदि उनकी भविष्यवाणी सही साबित होती है, तो अगले 1-2 वर्षों में भारतीय शेयर बाजार एक नए बुल रन की शुरुआत कर सकता है। हालांकि इस बार रफ्तार पहले जैसी तेज नहीं होगी, लेकिन धैर्य रखने वाले निवेशकों के लिए अच्छे अवसर जरूर मौजूद रहेंगे।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। NewsJagran किसी भी प्रकार की निवेश सलाह नहीं देता। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।


