Gold Silver Price: सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 10 हफ्ते के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है, जबकि चांदी ने महज एक सप्ताह में 11 फीसदी से ज्यादा की छलांग लगाई है। कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों ने कीमती धातुओं की मांग को मजबूत किया है।
इसके अलावा दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की लगातार सोने की खरीदारी, गोल्ड ETF में लौटता निवेश और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने भी गोल्ड और सिल्वर को सपोर्ट दिया है। निवेशकों के बीच सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से दोनों कीमती धातुओं की कीमतों को अतिरिक्त मजबूती मिली है।
सोने की कीमत 10 हफ्ते के हाई पर
हालिया कारोबारी सप्ताह में स्पॉट गोल्ड की कीमत करीब 4,435 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। यह जून के मध्य के बाद सोने का सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है। हालांकि, खबर लिखे जाने के समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 4,375 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था।
भारत में भी सोने की कीमतों में तेजी का असर देखने को मिला। घरेलू बाजार में सोना करीब 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता नजर आया। हालांकि, घरेलू कीमतें अंतरराष्ट्रीय भाव, डॉलर-रुपया विनिमय दर, आयात लागत और स्थानीय मांग के आधार पर बदलती रहती हैं।
चांदी ने एक सप्ताह में लगाई 11 फीसदी से ज्यादा छलांग
सोने के मुकाबले चांदी में तेजी और भी तेज रही है। Comex Silver में इस सप्ताह 11 फीसदी से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई। स्पॉट सिल्वर करीब 64 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई।
घरेलू वायदा बाजार यानी MCX पर भी चांदी में मजबूत तेजी रही। सप्ताह के दौरान MCX सिल्वर में करीब 6.58 फीसदी की बढ़त देखने को मिली और कीमत लगभग 2,31,804 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गई।
चांदी की कीमत में तेजी सिर्फ निवेश मांग की वजह से नहीं है। चांदी का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और कई औद्योगिक उत्पादों में भी होता है। इसलिए निवेश मांग के साथ औद्योगिक मांग की उम्मीदें भी इसकी कीमत को प्रभावित करती हैं।
अमेरिकी जॉब्स डेटा ने बदली बाजार की उम्मीद
सोने और चांदी में अचानक आई तेजी के पीछे सबसे महत्वपूर्ण कारणों में से एक कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़े हैं।
अमेरिकी ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स (BLS) की 7 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में अमेरिका के नॉन-फार्म पेरोल में 23,000 की गिरावट आई। बाजार को इसके विपरीत करीब 80,000 नई नौकरियों की उम्मीद थी।
इसके अलावा जून के रोजगार आंकड़ों को भी नीचे की ओर संशोधित किया गया। मई और जून के संयुक्त संशोधनों से पहले के अनुमानों की तुलना में करीब 103,000 नौकरियों की कमी सामने आई।
कमजोर जॉब्स डेटा ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती को लेकर निवेशकों के बीच सवाल खड़े किए हैं। इसके साथ ही बाजार में यह उम्मीद बढ़ी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर ज्यादा नरम रुख अपना सकता है।
सितंबर में फेड के फैसले पर बाजार की नजर
कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की उम्मीदों में बदलाव आया है।
बाजार में सितंबर में 25 बेसिस पॉइंट की ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना करीब 44 फीसदी आंकी जा रही थी, जबकि एक सप्ताह पहले यह संभावना करीब 67 फीसदी थी।
सोना और चांदी ब्याज देने वाली संपत्तियां नहीं हैं। ऐसे में जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो निवेशकों के लिए ब्याज देने वाले विकल्प अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकते हैं। इसके उलट ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद बढ़ने पर सोने जैसे एसेट की अवसर लागत कम होती है और इसकी मांग बढ़ सकती है।
यही वजह है कि अमेरिकी रोजगार डेटा के बाद गोल्ड और सिल्वर दोनों में खरीदारी बढ़ी।
फेड ने जुलाई में ब्याज दरें रखीं स्थिर
अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ने 29 जुलाई को अपनी बेंचमार्क ब्याज दर को 3.50 फीसदी से 3.75 फीसदी के दायरे में बनाए रखने के लिए 9-3 से मतदान किया था।
फेड की ओर से फिलहाल किसी बड़े नीतिगत बदलाव का स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया है। हालांकि, कमजोर रोजगार बाजार और ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले ने बाजार में आगे की दर बढ़ोतरी को लेकर उम्मीदों को कमजोर किया है।
अब निवेशकों की नजर अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों पर है। अगर महंगाई उम्मीद से कम रहती है तो फेड के लिए दरों को नरम करने की गुंजाइश बढ़ सकती है। वहीं, महंगाई उम्मीद से ज्यादा रहने पर ब्याज दरों को लेकर बाजार की धारणा फिर बदल सकती है, जिसका असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ सकता है।
केंद्रीय बैंकों की रिकॉर्ड खरीदारी से गोल्ड को सपोर्ट
सोने की मौजूदा तेजी को सिर्फ अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीदों से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। पिछले कुछ समय से केंद्रीय बैंक लगातार बड़ी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं।
World Gold Council की Gold Demand Trends Q2 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में केंद्रीय बैंकों की शुद्ध सोने की खरीदारी 289 टन रही। यह पहली तिमाही के मुकाबले करीब पांच गुना ज्यादा थी और किसी दूसरी तिमाही के लिए रिकॉर्ड स्तरों में शामिल रही।
एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी करीब 62 फीसदी ज्यादा रही।
पोलैंड के नेशनल बैंक ने दूसरी तिमाही में करीब 51 टन सोना खरीदा और उसके गोल्ड रिजर्व का स्तर 632 टन तक पहुंच गया। वहीं, पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने करीब 33 टन सोना जोड़ा। यह दिसंबर 2023 के बाद उसकी सबसे बड़ी तिमाही खरीदारी बताई गई।
केंद्रीय बैंक आगे भी खरीदारी जारी रख सकते हैं
केंद्रीय बैंकों की सोने में बढ़ती दिलचस्पी लंबी अवधि के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
World Gold Council के सर्वे में करीब 89 फीसदी उत्तरदाताओं ने उम्मीद जताई कि अगले एक साल में वैश्विक आधिकारिक गोल्ड रिजर्व बढ़ सकता है। वहीं करीब 45 फीसदी उत्तरदाताओं ने अपने देश के गोल्ड रिजर्व में बढ़ोतरी की उम्मीद जताई।
केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी सोने की कीमतों के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर सकती है। खासकर ऐसे समय में जब दुनिया की अर्थव्यवस्था, करेंसी और भू-राजनीतिक स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
Gold ETF में भी लौट रहा निवेश
सोने की कीमतों को दूसरा बड़ा सपोर्ट गोल्ड ETF में लौटते निवेश से मिल रहा है।
20 जुलाई के बाद से एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स की कुल बुलियन होल्डिंग में करीब 24 टन की बढ़ोतरी हुई है। यह अप्रैल की शुरुआत के बाद निवेश प्रवाह में सबसे तेज बढ़ोतरी में से एक है।
ETF में पैसा आने का मतलब है कि संस्थागत और बड़े निवेशक सोने में अपनी एक्सपोजर बढ़ा रहे हैं। केंद्रीय बैंक की खरीदारी के साथ ETF में निवेश की वापसी सोने की निवेश मांग को मजबूत कर रही है।
हालांकि, सोने की कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर होने के कारण आभूषणों की मांग पर दबाव बना रह सकता है। यानी मौजूदा तेजी में निवेश मांग की भूमिका ज्यादा महत्वपूर्ण दिखाई दे रही है।
होर्मुज को लेकर भू-राजनीतिक तनाव भी बड़ा कारण
सोने को पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है। जब दुनिया में युद्ध, राजनीतिक तनाव या व्यापारिक अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक अक्सर जोखिम वाले एसेट से पैसा निकालकर सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों की तरफ रुख करते हैं।
Strait of Hormuz यानी होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने भी बाजार में चिंता बढ़ाई है। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। यहां किसी भी तरह का तनाव तेल की कीमतों और वैश्विक महंगाई पर असर डाल सकता है।
ऐसी स्थिति में निवेशक महंगाई, आर्थिक विकास और बाजार जोखिम से बचाव के लिए गोल्ड और सिल्वर जैसे एसेट में निवेश बढ़ा सकते हैं।
चांदी की तेजी में निवेश के साथ औद्योगिक मांग भी अहम
चांदी को केवल कीमती धातु मानना सही नहीं होगा। इसकी मांग का बड़ा हिस्सा औद्योगिक क्षेत्र से भी आता है।
सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक उपकरणों और कई अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में चांदी का इस्तेमाल होता है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर ऊर्जा परिवर्तन और टेक्नोलॉजी से जुड़ी मांग चांदी के लिए लंबी अवधि में सकारात्मक कारक बन सकती है।
हालांकि, चांदी सोने की तुलना में ज्यादा अस्थिर मानी जाती है। इसलिए इसमें तेजी के दौरान कीमतों में तेज उछाल के साथ अचानक गिरावट भी देखने को मिल सकती है।
सोने पर ब्रोकरेज हाउस का क्या अनुमान है?
सोने की रिकॉर्ड तेजी के बीच कई बड़े वित्तीय संस्थानों ने इसकी कीमतों को लेकर सकारात्मक अनुमान दिए हैं।
JPMorgan का अनुमान है कि सोने की कीमत लंबी अवधि में 6,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। वहीं Goldman Sachs ने इस साल के अंत तक सोने के करीब 5,400 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान जताया है।
Metals Focus का अनुमान भी करीब 6,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर का है। वहीं Deutsche Bank, HSBC और ING जैसे संस्थानों के अनुमान के मुताबिक कैलेंडर वर्ष की चौथी तिमाही में सोना करीब 4,600 से 4,900 डॉलर प्रति औंस के बीच रह सकता है।
हालांकि, ये सभी अनुमान हैं और वास्तविक कीमतें अमेरिकी ब्याज दर, डॉलर इंडेक्स, महंगाई, केंद्रीय बैंक की खरीदारी, ETF फ्लो और भू-राजनीतिक घटनाओं के आधार पर बदल सकती हैं।
आगे सोने-चांदी के लिए क्या होगा अहम?
आने वाले दिनों में निवेशकों को मुख्य रूप से अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के संकेतों पर नजर रखनी होगी। अगर अमेरिकी आर्थिक आंकड़े कमजोर रहते हैं और ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद बढ़ती है तो सोने-चांदी को फायदा मिल सकता है।
इसके अलावा केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और ETF में निवेश का प्रवाह भी महत्वपूर्ण रहेगा। दूसरी ओर, अगर अमेरिकी महंगाई उम्मीद से ज्यादा आती है और फेड सख्त रुख अपनाता है तो कीमती धातुओं में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।
इसलिए मौजूदा तेजी के बावजूद निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि सोना और खासकर चांदी लगातार एकतरफा ऊपर नहीं बढ़ते। तेज उछाल के बाद इनमें करेक्शन भी आ सकता है।
निष्कर्ष
Gold और Silver दोनों में हालिया तेजी के पीछे कई बड़े वैश्विक कारण एक साथ काम कर रहे हैं। कमजोर अमेरिकी रोजगार डेटा ने ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें बदली हैं, जबकि केंद्रीय बैंकों की लगातार सोने की खरीदारी और गोल्ड ETF में लौटता निवेश कीमतों को मजबूत आधार दे रहा है।
इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ाई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिकी महंगाई के आंकड़े और फेडरल रिजर्व का रुख सोने-चांदी की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
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