भारत का शेयर बाजार आने वाले दशक में दुनिया के सबसे बड़े वेल्थ क्रिएशन प्लेटफॉर्म्स में से एक बन सकता है। यह दावा किसी छोटे निवेशक या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने नहीं, बल्कि भारतीय शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक और Ramdeo Agrawal ने किया है।
Motilal Oswal Financial Services के चेयरमैन और को-फाउंडर रामदेव अग्रवाल का मानना है कि भारत अभी भी दुनिया का सबसे बड़ा “मल्टीबैगर मार्केट” बना हुआ है। उनका कहना है कि आने वाले वर्षों में भारत का कैपिटल मार्केट इकोसिस्टम, क्विक कॉमर्स और डिजिटल फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म निवेशकों के लिए सबसे बड़े अवसर बन सकते हैं।
Groww के 10वें फाउंडेशन इवेंट ‘India Investor Festival’ में बोलते हुए अग्रवाल ने भारतीय बाजार की तुलना Ferrari से की और कहा कि भारत की लंबी अवधि की ग्रोथ स्टोरी अभी भी बेहद मजबूत है।
2036 तक 3 लाख पहुंच सकता है सेंसेक्स

रामदेव अग्रवाल ने कहा कि आने वाले 10-12 वर्षों में भारतीय शेयर बाजार में कंपाउंडिंग का असर और तेज दिखाई दे सकता है। उन्होंने अनुमान जताया कि 2030 तक सेंसेक्स 1.5 लाख अंक तक पहुंच सकता है, 2036 तक सेंसेक्स 3 लाख अंक छू सकता है उनका कहना था कि:
“12 साल में सेंसेक्स का 3 लाख पहुंचना, 6 साल में 1.5 लाख पहुंचने से ज्यादा निश्चित लगता है। यही कंपाउंडिंग की ताकत है।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब भारतीय बाजार लगातार वैश्विक अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया तनाव, महंगे कच्चे तेल और अमेरिकी ब्याज दरों के दबाव के बीच उतार-चढ़ाव झेल रहा है। इसके बावजूद घरेलू निवेशकों का भरोसा बाजार पर बना हुआ है।
क्यों बुलिश हैं रामदेव अग्रवाल?
रामदेव अग्रवाल का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था अभी उस दौर में है जहां लंबी अवधि की संरचनात्मक ग्रोथ दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि भारत की प्रति व्यक्ति आय अगले 6-7 वर्षों में दोगुनी हो सकती है। इसका सीधा असर खपत, निवेश, बैंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपिटल मार्केट सेक्टर पर पड़ेगा।
अग्रवाल के मुताबिक मल्टीबैगर शेयर वहीं बनते हैं जहां अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही हो, उद्योग विस्तार के शुरुआती चरण में हों, निवेशकों की भागीदारी बढ़ रही हो, कंपनियों की कमाई लगातार बढ़ रही हो उन्होंने मोतीलाल ओसवाल की एक इंटरनल स्टडी का जिक्र करते हुए कहा कि NSE 500 की लगभग 20 फीसदी कंपनियों ने एक दशक में 25 फीसदी से ज्यादा CAGR रिटर्न दिया। यानी वे 10-बैगर स्टॉक्स साबित हुईं।
तुलना में अमेरिकी बाजार के S&P 500 में ऐसा प्रदर्शन करने वाली कंपनियों की संख्या काफी कम रही।
भारत को बताया ‘Ferrari’
रामदेव अग्रवाल ने भारतीय बाजार की तुलना Ferrari कार से करते हुए कहा कि दुनिया के कई एशियाई बाजार इस समय AI और टेक्नोलॉजी थीम के कारण तेजी देख रहे हैं, लेकिन भारत की लंबी अवधि की कहानी सबसे मजबूत है।
उन्होंने भारत और दक्षिण कोरिया के बाजारों की तुलना करते हुए कहा कि:
- 1980 में भारत का सेंसेक्स और दक्षिण कोरिया का KOSPI लगभग समान स्तर पर थे
- आज KOSPI करीब 5,000 अंक के आसपास है
- जबकि सेंसेक्स 80,000 के पार पहुंच चुका है
उनके मुताबिक पिछले दो दशकों में भारत का मार्केट कैपिटलाइजेशन डॉलर टर्म्स में करीब 14 फीसदी सालाना की दर से बढ़ा, जबकि अमेरिकी बाजार में यह वृद्धि लगभग 7 फीसदी रही।
यह तुलना इस बात का संकेत मानी जा रही है कि भारत अब केवल उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि ग्लोबल कैपिटल मार्केट का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है।
क्विक कॉमर्स में दिख रहा अगला बड़ा मौका
रामदेव अग्रवाल ने भारतीय क्विक कॉमर्स सेक्टर को आने वाले समय का बड़ा वेल्थ क्रिएशन थीम बताया। उन्होंने कहा कि यह सेक्टर आज उसी दौर में है जहां कभी भारत की टेलीकॉम इंडस्ट्री थी। उन्होंने इसे “भारती मोमेंट” कहा। यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इस समय:
- क्विक कॉमर्स कंपनियां भारी कैश बर्न कर रही हैं
- डिस्काउंटिंग और लॉजिस्टिक्स पर बड़े खर्च हो रहे हैं
- निवेशकों के बीच profitability को लेकर चिंता बनी हुई है
इसके बावजूद अग्रवाल का मानना है कि नेटवर्क इफेक्ट्स भविष्य में इन कंपनियों को बेहद बड़ा बिजनेस बना सकते हैं।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत में डिजिटल पेमेंट्स, इंस्टेंट डिलीवरी, ऑनलाइन ग्रोसरी, हाइपरलोकल लॉजिस्टिक्स का बाजार अभी शुरुआती चरण में है। ऐसे में आने वाले वर्षों में यह सेक्टर बड़े वैल्यूएशन और कंसोलिडेशन का गवाह बन सकता है।
डीमैट अकाउंट्स में विस्फोटक बढ़ोतरी का अनुमान
रामदेव अग्रवाल ने कहा कि भारत में निवेशकों की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि देश में डीमैट अकाउंट्स की संख्या 22 करोड़ के पार पहुंच चुकी है और 2031-32 तक यह 50-60 करोड़ तक पहुंच सकती है।
अगर ऐसा होता है तो इसका सबसे बड़ा फायदा इन सेक्टर्स को मिल सकता है ब्रोकिंग कंपनियां, स्टॉक एक्सचें, एसेट मैनेजमेंट कंपनियां, वेल्थ मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म, फिनटेक कंपनियां विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत में SIP निवेश, रिटेल ट्रेडिंग और डिजिटल इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म्स की लोकप्रियता आने वाले दशक में बाजार की दिशा बदल सकती है।
किन कंपनियों में निवेश से बचते हैं रामदेव अग्रवाल?
रामदेव अग्रवाल ने अपने निवेश फिलॉसफी पर भी खुलकर बात की।
उन्होंने कहा कि वे ऐसी कंपनियों से दूरी बनाकर रखते हैं जिनका Return on Equity (ROE) 20 फीसदी से कम हो। उनके मुताबिक उच्च ROE यह दिखाता है कि कंपनी पूंजी का बेहतर इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने मैनेजमेंट क्वालिटी को सबसे बड़ा फिल्टर बताया।
अग्रवाल ने कहा:
“कमजोर गवर्नेंस वाले प्रमोटर्स निवेशकों की संपत्ति भी नष्ट कर सकते हैं।”
यानी केवल तेजी से बढ़ती कंपनी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पारदर्शी मैनेजमेंट, मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस, लगातार प्रॉफिट ग्रोथ, कैश फ्लो क्वालिटी भी निवेश के लिए बेहद जरूरी हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बयान?
रामदेव अग्रवाल का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारतीय बाजार में:
- वैल्यूएशन ऊंचे हैं
- ग्लोबल अनिश्चितता बनी हुई है
- विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी है
- जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ा हुआ है
इसके बावजूद घरेलू निवेशकों का भरोसा भारतीय अर्थव्यवस्था पर कायम है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर भारत 6-7% GDP growth बनाए रखता है, मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल सेक्टर में विस्तार जारी रहता है, घरेलू निवेशकों की भागीदारी बढ़ती रहती है तो भारतीय बाजार अगले दशक में दुनिया के सबसे बड़े wealth creation engines में से एक बन सकता है।
Also Read:


