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Reading: Russian Oil Imports: 16 मई पर टिकी भारत की नजर, अमेरिकी छूट खत्म हुई तो महंगा पड़ सकता है तेल; IOC-BPCL ने बढ़ाई तैयारी
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Russian Oil Imports: 16 मई पर टिकी भारत की नजर, अमेरिकी छूट खत्म हुई तो महंगा पड़ सकता है तेल; IOC-BPCL ने बढ़ाई तैयारी

Namam Sharma
Last updated: 2026/05/13 at 10:39 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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9 Min Read
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भारत के लिए 16 मई की तारीख बेहद अहम बन गई है। रूस से कच्चे तेल के आयात पर अमेरिकी पाबंदियों में मिली अस्थायी छूट अब खत्म होने वाली है और वॉशिंगटन ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि इसे आगे बढ़ाया जाएगा या नहीं। इसी सस्पेंस ने भारतीय तेल कंपनियों और सरकार दोनों की चिंता बढ़ा दी है।

Contents
अमेरिका ने क्यों बना रखा है सस्पेंस?आंकड़ों से समझिए भारत के लिए कितना अहम है रूसी तेलभारत के लिए मुश्किल क्यों बढ़ सकती है?ईरान युद्ध ने बढ़ाई चिंताIOC और BPCL ने शुरू की तैयारीअब अजरबैजान और अफ्रीका की ओर नजरअमेरिका ने यह छूट क्यों दी थी?क्या भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है?भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?निष्कर्ष

अगर अमेरिका छूट को आगे नहीं बढ़ाता है तो भारतीय रिफाइनरों को रूसी तेल का आयात घटाना पड़ सकता है। इसकी वजह यह है कि अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले नए रूसी कार्गो खरीदना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में भारत को मजबूरन महंगे विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं।

स्थिति इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि दूसरी तरफ ईरान युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजार पहले से ही अस्थिर बना हुआ है और पश्चिम एशिया से सप्लाई प्रभावित होने का खतरा लगातार बना हुआ है।

अमेरिका ने क्यों बना रखा है सस्पेंस?

अमेरिकी प्रशासन ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि 16 मई के बाद भारत सहित अन्य देशों को रूसी तेल खरीदने के लिए मिली छूट जारी रहेगी या नहीं।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय रिफाइनरों से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर छूट खत्म हो जाती है तो कंपनियों को तत्काल बाजार से महंगा ‘स्पॉट ऑयल’ खरीदना पड़ सकता है।

स्पॉट मार्केट में खरीदा गया तेल आमतौर पर लंबी अवधि के अनुबंधों की तुलना में महंगा होता है। इसके अलावा अचानक डिमांड बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय कीमतों में और उछाल आ सकता है।

आंकड़ों से समझिए भारत के लिए कितना अहम है रूसी तेल

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने भारी मात्रा में डिस्काउंट पर रूसी कच्चा तेल खरीदना शुरू किया था। इससे भारत का आयात बिल नियंत्रित रखने में बड़ी मदद मिली।

केप्लर के आंकड़ों के अनुसार:

  • मई 2026 में अब तक भारत का रूसी तेल आयात रिकॉर्ड 23 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है।
  • यह बढ़ोतरी इसलिए हुई क्योंकि पहले से जहाजों में लदे कार्गो को अमेरिकी छूट के तहत अनुमति मिली हुई थी।
  • लेकिन अगर नए जहाज भारत की ओर नहीं आते हैं तो पूरे महीने का औसत आयात घटकर 19 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकता है।

यानी केवल कुछ हफ्तों में भारत के लिए लाखों बैरल प्रतिदिन तेल की कमी की स्थिति पैदा हो सकती है।

भारत के लिए मुश्किल क्यों बढ़ सकती है?

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है। देश अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी तेल आयात करता है। ऐसे में सस्ती सप्लाई रुकने का सीधा असर आयात बिल, पेट्रोल-डीजल कीमतों, रुपये की स्थिति, चालू खाते के घाटे, महंगाई पर पड़ सकता है।

रूस से भारत को लंबे समय तक डिस्काउंट पर तेल मिलता रहा है। कई बार रूसी क्रूड ब्रेंट कीमतों से 10-15 डॉलर प्रति बैरल तक सस्ता रहा। अगर यह फायदा खत्म होता है तो भारतीय रिफाइनरों की लागत तेजी से बढ़ सकती है।

ईरान युद्ध ने बढ़ाई चिंता

स्थिति को और गंभीर बनाने वाला फैक्टर पश्चिम एशिया में जारी तनाव है। ईरान युद्ध के कारण फारस की खाड़ी से तेल सप्लाई को लेकर जोखिम बढ़ गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर संघर्ष और बढ़ता है तो:

  • समुद्री शिपिंग लागत बढ़ सकती है
  • इंश्योरेंस प्रीमियम महंगे हो सकते हैं
  • तेल सप्लाई बाधित हो सकती है
  • कच्चे तेल की कीमतें अचानक उछल सकती हैं

यही वजह है कि भारत अब केवल रूस पर निर्भर रहने के बजाय दूसरे स्रोतों से भी सप्लाई सुरक्षित करने में जुट गया है।

IOC और BPCL ने शुरू की तैयारी

16 मई की डेडलाइन से ठीक पहले भारत की बड़ी सरकारी रिफाइनिंग कंपनियां सक्रिय हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने इस सप्ताह अमेरिका और पश्चिम अफ्रीका से कच्चे तेल की खरीद की है।

ट्रेडर्स के अनुसार ये ‘प्रॉम्प्ट कार्गो’ थे, यानी ऐसे जहाज जिनकी लोडिंग इसी महीने पूरी हो जाएगी। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय कंपनियां संभावित संकट के लिए बैकअप तैयार कर रही हैं।

अब अजरबैजान और अफ्रीका की ओर नजर

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार BPCL फारस की खाड़ी और रूस पर निर्भरता कम करने के लिए नए स्रोत तलाश रही है। कंपनी अजरबैजान, पश्चिम अफ्रीका, अन्य अफ्रीकी देशों से शॉर्ट-टर्म सप्लाई एग्रीमेंट की संभावनाएं तलाश रही है।

भारत की यह रणनीति केवल मौजूदा संकट तक सीमित नहीं है। दरअसल पिछले कुछ वर्षों में भारत लगातार Energy Diversification पर जोर दे रहा है ताकि किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता कम की जा सके।

अमेरिका ने यह छूट क्यों दी थी?

अमेरिका ने पहली बार 5 मार्च को भारत को विशेष छूट दी थी। इसका उद्देश्य वैश्विक तेल बाजार में अचानक सप्लाई शॉक को रोकना था।

उस समय चिंता थी कि अगर रूसी तेल पूरी तरह बाजार से बाहर हो गया तो वैश्विक तेल कीमतें बेकाबू हो सकती हैं, महंगाई तेजी से बढ़ सकती है, ऊर्जा संकट गहरा सकता है इसीलिए पहले सीमित और बाद में वैश्विक स्तर पर कुछ राहत दी गई। अब वही राहत 16 मई को खत्म होने जा रही है।

क्या भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है?

अगर रूसी तेल आयात घटता है, ब्रेंट क्रूड महंगा होता है, ईरान युद्ध लंबा चलता है तो भारत में पेट्रोल-डीजल कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि सरकार और तेल कंपनियां शुरुआती चरण में कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर सकती हैं, लेकिन लंबे समय तक महंगे आयात को absorb करना आसान नहीं होगा।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर कच्चा तेल लगातार ऊंचे स्तर पर बना रहता है तो:

  • महंगाई बढ़ सकती है
  • ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ सकती है
  • FMCG और लॉजिस्टिक्स सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं

भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

भारत के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है:

  1. रूस से सस्ता तेल जारी रखना
  2. पश्चिम एशिया संकट के बीच सप्लाई सुरक्षा बनाए रखना

अगर अमेरिका छूट बढ़ा देता है तो भारत को कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है तो भारतीय रिफाइनरों को तेजी से वैकल्पिक सप्लाई चेन तैयार करनी होगी।

निष्कर्ष

रूसी तेल पर अमेरिकी छूट का भविष्य अब भारत के ऊर्जा बाजार के लिए बड़ा सवाल बन चुका है। 16 मई के बाद अमेरिका क्या फैसला लेता है, इसका असर केवल भारतीय रिफाइनरों पर ही नहीं बल्कि पेट्रोल-डीजल कीमतों, महंगाई और पूरे अर्थतंत्र पर पड़ सकता है।

फिलहाल भारत बैकअप रणनीति पर काम कर रहा है, लेकिन रूस से मिलने वाला सस्ता तेल अगर सीमित होता है तो आने वाले महीनों में ऊर्जा बाजार में दबाव बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है।

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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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