Semiconductor Mission 2.0: भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में बड़ी ताकत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने ₹1.27 लाख करोड़ के India Semiconductor Mission (ISM 2.0) को मंजूरी दे दी है। यह बजट पहले चरण के ₹76,000 करोड़ की तुलना में लगभग 68% अधिक है। इस मिशन का उद्देश्य केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को भारत में विकसित करना है ताकि देश आयात पर निर्भरता कम कर सके और वैश्विक सप्लाई चेन में अहम भूमिका निभा सके।
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 5G और डिफेंस जैसे क्षेत्रों में सेमीकंडक्टर की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में सरकार का यह कदम देश को तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा बढ़ावा देगा।
क्या है India Semiconductor Mission (ISM 2.0)?
India Semiconductor Mission (ISM) की शुरुआत देश में सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। पहले चरण में सरकार का फोकस चिप मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित कराने पर था, जबकि ISM 2.0 में पूरा सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन विकसित करने की योजना बनाई गई है।
इस मिशन के तहत सरकार चिप डिजाइन, रिसर्च, निर्माण, पैकेजिंग, टेस्टिंग, मशीनरी, केमिकल, गैस और स्किल डेवलपमेंट सहित सभी क्षेत्रों में निवेश और सहयोग को बढ़ावा देगी।
ISM 2.0 के छह प्रमुख स्तंभ
सरकार ने इस मिशन को छह बड़े हिस्सों में विभाजित किया है।
1. चिप डिजाइन को मिलेगा बढ़ावा
भारत को केवल चिप निर्माण ही नहीं बल्कि चिप डिजाइन में भी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए स्टार्टअप, डिजाइन कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों को वित्तीय एवं तकनीकी सहायता दी जाएगी।
2. मजबूत होगी सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन
सेमीकंडक्टर निर्माण में उपयोग होने वाली मशीनें, स्पेशलिटी केमिकल, गैस, सिलिकॉन वेफर और अन्य कच्चे माल के घरेलू उत्पादन पर जोर दिया जाएगा। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी।
3. नई फैब्रिकेशन यूनिट्स की स्थापना
सरकार नई Silicon Fab, Compound Semiconductor Fab, Display Fab और अन्य निर्माण इकाइयों में निवेश को प्रोत्साहित करेगी ताकि भारत बड़े पैमाने पर चिप उत्पादन कर सके।
4. एडवांस पैकेजिंग और टेस्टिंग
ATMP (Assembly, Testing, Marking and Packaging) और OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test) क्षमताओं का विस्तार किया जाएगा ताकि भारत केवल चिप बनाए ही नहीं बल्कि उनकी पैकेजिंग और टेस्टिंग भी देश में कर सके।
5. रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D)
सरकार अगली पीढ़ी की चिप तकनीकों पर अनुसंधान को बढ़ावा देगी। इसका उद्देश्य भारत को भविष्य की तकनीकों में भी प्रतिस्पर्धी बनाना है।
6. स्किल डेवलपमेंट
सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए बड़ी संख्या में इंजीनियर, डिजाइन एक्सपर्ट और तकनीकी विशेषज्ञ तैयार किए जाएंगे ताकि उद्योग को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो सके।
105 भारतीय स्टार्टअप पहले से कर रहे हैं काम
सरकार के अनुसार, देश में 105 स्टार्टअप पहले से सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन पर कार्य कर रहे हैं। ISM 2.0 के तहत इन स्टार्टअप्स को तकनीकी सहयोग, फंडिंग और वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी के अवसर दिए जाएंगे।
इससे भारत में डिजाइन आधारित नवाचार को गति मिलने की उम्मीद है।
2028 तक शुरू हो सकती है पहली सेमीकंडक्टर फैब
सरकार का अनुमान है कि देश की पहली Semiconductor Fabrication (Fab) यूनिट वर्ष 2028 तक उत्पादन शुरू कर सकती है। यह भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।
ISM 1.0 में क्या रही उपलब्धियां?
सरकार के अनुसार पहले चरण में कई महत्वपूर्ण प्रगति हुई हैं।
- 12 सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग परियोजनाओं को मंजूरी।
- 1 Silicon Fab।
- 1 Silicon Carbide Fab।
- 1 Gallium Nitride Micro LED Display Fab।
- 9 ATMP एवं पैकेजिंग यूनिट्स।
- कुल ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक निवेश को मंजूरी।
इसके अलावा Micron, Kaynes और CG Semi जैसी कंपनियों में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो चुका है, जबकि एक और यूनिट इस वर्ष के अंत तक उत्पादन शुरू कर सकती है।
68 हजार से अधिक छात्रों को दी गई ट्रेनिंग
सरकार सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर भी जोर दे रही है।
- 315 विश्वविद्यालयों में आधुनिक Electronic Design Automation (EDA) टूल्स के माध्यम से प्रशिक्षण।
- अब तक 68,000 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
- भविष्य में उद्योग की मांग के अनुसार और अधिक इंजीनियर तैयार किए जाएंगे।
विदेशी कंपनियों का भारत पर बढ़ता भरोसा
भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर में कई वैश्विक कंपनियां निवेश की घोषणा कर चुकी हैं।
- AMD – 40 करोड़ डॉलर
- Applied Materials – 40 करोड़ डॉलर
- Microchip Technology – 30 करोड़ डॉलर
- Lam Research – 110 करोड़ डॉलर
- KLA – 40 करोड़ डॉलर
इसके अलावा ASML, Merck और IBL Electron ने टाटा ग्रुप के साथ साझेदारी की है ताकि भारत में मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित किया जा सके।
किन सेक्टरों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
ISM 2.0 का प्रभाव कई उद्योगों पर देखने को मिलेगा।
- इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग
- स्मार्टफोन और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स
- ऑटोमोबाइल एवं इलेक्ट्रिक व्हीकल
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- 5G एवं टेलीकॉम
- डिफेंस एवं एयरोस्पेस
- मेडिकल डिवाइसेज
- डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर
भारत क्यों बना रहा है अपना सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम?
दुनिया भर में सेमीकंडक्टर को रणनीतिक उद्योग माना जाता है। कोविड-19 महामारी और वैश्विक सप्लाई चेन संकट के दौरान चिप की भारी कमी देखने को मिली थी। इससे ऑटोमोबाइल, मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग प्रभावित हुए थे।
इसी अनुभव के बाद भारत ने भी घरेलू उत्पादन बढ़ाने की रणनीति अपनाई है ताकि भविष्य में वैश्विक आपूर्ति संकट का असर कम हो और देश तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बन सके।
सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत केवल चिप आयात करने वाला देश नहीं रहेगा, बल्कि पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन विकसित करेगा। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में भारत में सेमीकंडक्टर की मांग 50 अरब डॉलर से बढ़कर 100 अरब डॉलर से अधिक हो सकती है। सरकार चाहती है कि इस मांग का बड़ा हिस्सा देश के भीतर ही पूरा किया जाए, जिससे रोजगार, निवेश और निर्यात तीनों को बढ़ावा मिले।
निष्कर्ष
India Semiconductor Mission 2.0 भारत के तकनीकी भविष्य के लिए एक निर्णायक पहल माना जा रहा है। ₹1.27 लाख करोड़ के इस मिशन के जरिए सरकार केवल चिप निर्माण ही नहीं बल्कि डिजाइन, रिसर्च, पैकेजिंग, सप्लाई चेन और स्किल डेवलपमेंट सहित पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को विकसित करना चाहती है। यदि योजनाएं तय समय पर आगे बढ़ती हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक चिप उद्योग में एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार एवं संबंधित क्षेत्रों में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। NewsJagran किसी भी प्रकार की निवेश सलाह प्रदान नहीं करता।

