नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में किसानों और उर्वरक क्षेत्र के लिए एक बड़ा फैसला लिया गया। सरकार ने नेशनल इन्वेस्टमेंट पॉलिसी फॉर यूरिया-2026 (NIPU-2026) को मंजूरी दे दी है। नई नीति का मुख्य उद्देश्य देश में यूरिया उत्पादन बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और गैस आधारित नए यूरिया संयंत्रों में निवेश को प्रोत्साहित करना है।
सरकार का मानना है कि भारत में लगातार बढ़ रही यूरिया की मांग को देखते हुए घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाना जरूरी है। इससे न केवल किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध होगा बल्कि विदेशी आयात पर होने वाला खर्च भी कम होगा।
क्यों जरूरी थी नई यूरिया नीति?
भारत दुनिया के सबसे बड़े उर्वरक उपभोक्ता देशों में शामिल है। कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए यूरिया की मांग लगातार बढ़ रही है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार देश में हर साल करीब 5% की दर से यूरिया की मांग बढ़ रही है।
पिछले लगभग एक दशक में सरकार ने 12.7 लाख मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता वाले छह नए यूरिया संयंत्र शुरू किए हैं। इसके बावजूद बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अतिरिक्त निवेश और नई उत्पादन क्षमता की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए नई निवेश नीति तैयार की गई है।
नई यूरिया नीति 2026 के 3 बड़े बदलाव
1. सब्सिडी की गणना होगी अधिक पारदर्शी
नई नीति के तहत यूरिया सब्सिडी की गणना में फिक्स्ड कॉस्ट और वैरिएबल कॉस्ट को अलग-अलग माना जाएगा।
इससे:
- परियोजनाओं की वास्तविक लागत का सही आकलन होगा।
- निवेशकों के लिए स्पष्ट नीति ढांचा तैयार होगा।
- सब्सिडी वितरण अधिक पारदर्शी बनेगा।
2. कंपनियों को मिलेगा बेहतर Return on Equity (ROE)
नई नीति में Return on Equity (ROE) की सीमा 12% से 16% निर्धारित की गई है।
इस बदलाव से:
- निजी और सरकारी कंपनियां नए गैस आधारित यूरिया संयंत्र लगाने के लिए प्रेरित होंगी।
- उर्वरक क्षेत्र में नए निवेश बढ़ेंगे।
- उत्पादन क्षमता में तेजी से विस्तार होगा।
3. विदेशी मुद्रा जोखिम होगा कम
नई नीति के तहत डॉलर में होने वाली फिक्स्ड लागत को चार साल बाद भारतीय रुपये में परिवर्तित किया जाएगा।
इसका फायदा:
- डॉलर-रुपया विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का असर कम होगा।
- सरकार और कंपनियों दोनों का वित्तीय जोखिम घटेगा।
- सब्सिडी प्रबंधन अधिक स्थिर और अनुमानित बनेगा।
हर नए प्लांट पर होगी करीब ₹250 करोड़ की बचत
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार नई नीति लागू होने से हर नए यूरिया प्लांट पर लगभग ₹250 करोड़ तक की बचत होने का अनुमान है।
इससे:
- परियोजनाओं की कुल लागत घटेगी।
- निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
- नए संयंत्र तेजी से स्थापित किए जा सकेंगे।
पहले की नीति से क्या उपलब्धि मिली?
सरकार के अनुसार नई निवेश नीति-2012 (NIP-2012) के तहत देश में कुल 6 नई यूरिया इकाइयां स्थापित की गईं।
इनमें शामिल हैं:
- सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की संयुक्त उद्यम (JV) कंपनियों द्वारा स्थापित 4 इकाइयां।
- निजी क्षेत्र द्वारा स्थापित 2 यूरिया इकाइयां।
नई NIPU-2026 नीति इसी मॉडल को आगे बढ़ाते हुए अधिक निवेश आकर्षित करने पर केंद्रित है।
किसानों को क्या मिलेगा फायदा?
नई नीति का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिलने की उम्मीद है।
संभावित फायदे:
- समय पर यूरिया की बेहतर उपलब्धता।
- आयात पर निर्भरता घटने से आपूर्ति अधिक स्थिर होगी।
- घरेलू उत्पादन बढ़ने से भविष्य में उर्वरक आपूर्ति बाधित होने की संभावना कम होगी।
- देश की खाद्य सुरक्षा और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।
भारत की आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का लक्ष्य उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत करना है। यदि घरेलू उत्पादन बढ़ता है तो आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश की उर्वरक सुरक्षा भी मजबूत होगी। नई नीति निवेश, उत्पादन और लागत नियंत्रण के बीच संतुलन बनाते हुए लंबे समय में किसानों और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।


