नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के साथ बड़े स्तर पर हुई कथित धोखाधड़ी के खिलाफ भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। सेबी ने करीब 143.79 करोड़ रुपये के ‘पंप एंड डंप’ (Pump and Dump) शेयर घोटाले का खुलासा करते हुए 221 संस्थाओं और व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई की है।
इस मामले में हनीफ शेख को पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड मानते हुए 7 वर्षों के लिए प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके अलावा उन पर 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है और अवैध कमाई को ब्याज सहित वापस जमा कराने का आदेश भी दिया गया है।
HighLights
- सेबी ने 143.79 करोड़ रुपये के शेयर हेरफेर घोटाले का किया खुलासा।
- 221 संस्थाओं और व्यक्तियों पर बाजार से प्रतिबंध।
- मास्टरमाइंड हनीफ शेख पर 7 साल का बैन और 10 करोड़ रुपये का जुर्माना।
- पांच सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में ‘पंप एंड डंप’ स्कीम के जरिए हेरफेर।
- अक्टूबर 2020 से 12% वार्षिक ब्याज सहित अवैध कमाई लौटाने का आदेश।
क्या है पूरा मामला?
सेबी की कई वर्षों तक चली विस्तृत जांच में सामने आया कि 2017 से 2020 के बीच एक संगठित नेटवर्क ने पांच सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में कृत्रिम तरीके से तेजी पैदा कर निवेशकों को गुमराह किया। जांच के अनुसार इस नेटवर्क ने पहले शेयरों की कीमत और ट्रेडिंग वॉल्यूम को बढ़ाया और फिर खुदरा निवेशकों को खरीदारी के लिए प्रेरित कर ऊंचे भाव पर अपने शेयर बेच दिए।
इस प्रकार नेटवर्क से जुड़े लोगों ने करोड़ों रुपये का अवैध मुनाफा कमाया।
किन कंपनियों के शेयरों में हुई हेरफेर?
सेबी की जांच के अनुसार निम्नलिखित पांच सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों का इस्तेमाल इस कथित हेरफेर में किया गया—
- मौर्या उद्योग
- 7NR Retail
- दार्जिलिंग रोपवे कंपनी
- GBL Industries
- विशाल फैब्रिक्स
इन कंपनियों के शेयरों में ट्रेडिंग गतिविधि और कीमतों को कृत्रिम रूप से बढ़ाया गया, ताकि निवेशकों को तेजी का भ्रम पैदा हो।
कैसे चलता था ‘पंप एंड डंप’ खेल?
सेबी के अनुसार यह पूरी योजना कई चरणों में संचालित की गई।
1. पहले बनाई गई कृत्रिम मांग
नेटवर्क से जुड़े ट्रेडर्स ने आपस में सिंक्रोनाइज्ड ट्रेडिंग और सर्कुलर ट्रेडिंग के जरिए शेयरों में लगातार खरीद-बिक्री की। इससे ऐसा माहौल बना कि संबंधित शेयरों में भारी निवेश हो रहा है।
2. शेयर की कीमतें बढ़ाईं
लगातार ट्रेडिंग के कारण शेयरों की कीमत और वॉल्यूम दोनों तेजी से बढ़े। इससे बाजार में यह संदेश गया कि कंपनी के शेयरों में तेजी आने वाली है।
3. SMS और WhatsApp से निवेशकों को फंसाया
जब शेयरों की कीमत पर्याप्त बढ़ गई, तब हजारों निवेशकों को बड़े पैमाने पर SMS अभियान चलाकर इन शेयरों को खरीदने की सलाह दी गई।
सेबी के मुताबिक कई संदेश ऐसे Sender ID से भेजे गए जो प्रतिष्ठित ब्रोकरेज कंपनियों जैसे दिखाई देते थे, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ गया।
4. ऊंचे दाम पर शेयर बेच दिए
जैसे ही खुदरा निवेशकों ने खरीदारी शुरू की, नेटवर्क से जुड़े लोगों ने अपने शेयर ऊंची कीमत पर बेचकर करोड़ों रुपये का मुनाफा कमा लिया।
सेबी ने कैसे जुटाए सबूत?
इस मामले की जांच में सेबी ने केवल ट्रेडिंग रिकॉर्ड पर निर्भर नहीं किया बल्कि डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों का व्यापक विश्लेषण किया।
जांच में शामिल प्रमुख साक्ष्य—
- ट्रेडिंग रिकॉर्ड
- बैंक ट्रांजैक्शन
- मोबाइल फोन डेटा
- WhatsApp चैट
- वेबसाइट डोमेन रजिस्ट्रेशन
- Bulk SMS Gateway रिकॉर्ड
- एयरलाइन टिकट बुकिंग
- होटल रिजर्वेशन
- फूड डिलीवरी ऐप डेटा
- कर्मचारियों के रिकॉर्ड
- टेलीकॉम कंपनियों से प्राप्त जानकारी
- वित्तीय संस्थानों की रिपोर्ट
इन सभी जानकारियों के आधार पर सेबी ने पूरे नेटवर्क की गतिविधियों को जोड़कर हनीफ शेख की भूमिका स्थापित की।
394 पन्नों का अंतिम आदेश
सेबी ने इस मामले में 394 पन्नों का विस्तृत अंतिम आदेश जारी किया है।
इसमें बताया गया है कि शेयर हेरफेर कोई अलग-अलग घटनाएं नहीं थीं, बल्कि एक सुनियोजित नेटवर्क के माध्यम से कई वर्षों तक संचालित किया गया संगठित ऑपरेशन था।
हनीफ शेख पर सबसे बड़ी कार्रवाई
सेबी ने हनीफ शेख को इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड माना है।
उनके खिलाफ प्रमुख कार्रवाई—
- 7 वर्षों के लिए प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंध।
- 10 करोड़ रुपये का मौद्रिक जुर्माना।
- अवैध कमाई वापस करने का आदेश।
अन्य संस्थाओं पर भी कड़ी कार्रवाई
सेबी ने हनीफ शेख से जुड़ी 5 संस्थाओं को भी गंभीर दोषी माना।
इन पर—
- 6 वर्षों का बाजार प्रतिबंध।
- प्रत्येक पर 2 करोड़ रुपये का जुर्माना।
इसके अलावा नेटवर्क से जुड़े अन्य प्रतिभागियों को—
- अधिकतम 5 वर्षों तक बाजार से प्रतिबंध।
- 5 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना।
221 संस्थाओं की क्या थी भूमिका?
सेबी के अनुसार इस पूरे ऑपरेशन में शामिल 200 से अधिक संस्थाओं की अलग-अलग जिम्मेदारियां थीं।
इनमें शामिल थे—
- ट्रेडर्स
- ब्रोकर
- मध्यस्थ कंपनियां
- फाइनेंसर
- प्रमोटर समूह
- विदेशी मुद्रा कारोबारी
- SMS सेवा प्रदाता
- अन्य सहयोगी संस्थाएं
हर संस्था ने नेटवर्क को सफल बनाने में अलग भूमिका निभाई।
कैसे छिपाई गई अवैध कमाई?
सेबी की जांच में सामने आया कि अवैध कमाई को सीधे लाभार्थियों तक नहीं पहुंचाया गया।
इसके बजाय रकम को—
- विभिन्न कंपनियों
- फाइनेंसरों
- लेयरिंग नेटवर्क
- विदेशी मुद्रा कारोबारियों
के माध्यम से कई चरणों में घुमाया गया, ताकि वास्तविक लाभार्थियों की पहचान छिपाई जा सके।
143.79 करोड़ रुपये की अवैध कमाई वापस करनी होगी
सेबी ने अनुमान लगाया कि पूरे ऑपरेशन से 143.79 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई।
नियामक ने सभी संबंधित पक्षों को निर्देश दिया है कि वे—
- पूरी अवैध कमाई वापस जमा करें।
- अक्टूबर 2020 से 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी अदा करें।
‘Pump and Dump’ स्कीम क्या होती है?
‘पंप एंड डंप’ शेयर बाजार में होने वाली सबसे सामान्य लेकिन गंभीर धोखाधड़ी मानी जाती है।
इसमें पहले किसी कम कारोबार वाले शेयर की कीमत कृत्रिम रूप से बढ़ाई जाती है। इसके बाद सोशल मीडिया, SMS, WhatsApp या फर्जी निवेश सलाह के जरिए लोगों को शेयर खरीदने के लिए प्रेरित किया जाता है। जब बड़ी संख्या में निवेशक खरीदारी करने लगते हैं तो पहले से शेयर रखने वाले लोग ऊंचे दाम पर अपने शेयर बेच देते हैं। इसके बाद शेयर की कीमत तेजी से गिर जाती है और आम निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
निवेशकों के लिए क्या सबक?
यह मामला निवेशकों के लिए भी महत्वपूर्ण सीख देता है।
- केवल SMS या WhatsApp पर मिली सलाह के आधार पर निवेश न करें।
- किसी भी शेयर में निवेश से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन की जांच करें।
- केवल SEBI-पंजीकृत निवेश सलाहकारों की सलाह पर भरोसा करें।
- असामान्य तेजी वाले छोटे शेयरों में निवेश करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें।
- सोशल मीडिया पर वायरल हो रही “मल्टीबैगर” सलाह से बचें।
निष्कर्ष
सेबी की यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के हितों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ नियामक अब और अधिक सख्त रुख अपना रहा है। 221 संस्थाओं पर प्रतिबंध, 143.79 करोड़ रुपये की अवैध कमाई वापस लेने का आदेश और मास्टरमाइंड हनीफ शेख पर 7 साल का प्रतिबंध यह दर्शाता है कि संगठित शेयर हेरफेर को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों से बचने के लिए निवेशकों को भी केवल विश्वसनीय स्रोतों पर भरोसा करना चाहिए और किसी भी निवेश से पहले पूरी जांच-पड़ताल करनी चाहिए।


