E20 Petrol: इथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल को लेकर देश में लगातार बहस चल रही है। कई वाहन मालिकों का कहना है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद उनकी गाड़ी का माइलेज कम हुआ है। अब केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि किसी वाहन के माइलेज में कमी के लिए केवल पेट्रोल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। माइलेज कई दूसरे कारकों पर भी निर्भर करता है।
E20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर सरकार का क्या कहना है?
केंद्र सरकार के अनुसार, इथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल गुणवत्ता से जुड़े निर्धारित मानकों को पूरा करता है। सरकार का कहना है कि E20 ईंधन के इस्तेमाल को लेकर वाहनों पर परीक्षण किए जा चुके हैं और इसके इस्तेमाल को लेकर जरूरी मानकों का ध्यान रखा गया है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि अलग-अलग वाहनों का प्रदर्शन उनकी उम्र, रखरखाव और इस्तेमाल की परिस्थितियों के आधार पर अलग हो सकता है।
किन वजहों से कम हो सकता है गाड़ी का माइलेज?
सरकार के मुताबिक, वाहन का माइलेज सिर्फ ईंधन की गुणवत्ता पर निर्भर नहीं करता। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे:
- गाड़ी का नियमित रखरखाव न होना
- ड्राइविंग स्टाइल
- शहरों में ज्यादा ट्रैफिक
- टायरों में सही एयर प्रेशर न होना
- लगातार एसी का इस्तेमाल
- वाहन की उम्र और उसकी तकनीकी स्थिति
- ड्राइविंग कंडीशन और सड़क की स्थिति
इसलिए अगर किसी वाहन का माइलेज कम हो रहा है तो केवल पेट्रोल को इसकी वजह मानने से पहले इन सभी पहलुओं की जांच करना जरूरी है।
E20 पेट्रोल का हो चुका है परीक्षण
सरकार पहले भी कई मौकों पर कह चुकी है कि E20 पेट्रोल का वाहनों पर परीक्षण किया गया है। हालांकि, अलग-अलग मॉडल और उनकी उम्र के आधार पर E20 के इस्तेमाल का प्रभाव अलग हो सकता है।
विशेष रूप से पुराने वाहनों को लेकर सरकार ने पहले यह स्पष्ट किया है कि कुछ मामलों में इंजन की क्षमता या प्रदर्शन पर असर देखने को मिल सकता है। नए वाहनों को E20 ईंधन के अनुरूप तैयार किए जाने पर भी जोर दिया गया है।
तेल कंपनियों ने भी की जांच
E20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच तेल मार्केटिंग कंपनियों ने भी कई स्तर पर जांच की है। भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल जैसी कंपनियों ने अलग-अलग पेट्रोल पंपों पर ईंधन की गुणवत्ता की जांच की।
इन जांचों में पेट्रोल की गुणवत्ता के साथ-साथ क्लोराइड स्तर और अन्य मानकों को भी देखा गया। तेल कंपनियों ने करीब 90,000 ईंधन स्टेशनों के भूमिगत स्टोरेज टैंकों का निरीक्षण भी किया। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि कहीं पानी या अन्य बाहरी तत्वों के पेट्रोल में मिल जाने की संभावना तो नहीं है।
E20 को बढ़ावा देने के पीछे क्या है सरकार की रणनीति?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने या सप्लाई में बाधा आने पर देश के आयात बिल पर सीधा असर पड़ता है।
इथेनॉल घरेलू स्तर पर उपलब्ध होने वाला ईंधन मिश्रण है। सरकार E20 जैसे मिश्रित ईंधन को बढ़ावा देकर पेट्रोल में कच्चे तेल की निर्भरता कम करना चाहती है। इससे भविष्य में देश के पेट्रोलियम आयात बिल को कम करने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
E20 पेट्रोल को लेकर माइलेज कम होने की शिकायतों के बीच सरकार का कहना है कि वाहन का माइलेज कई कारकों से प्रभावित होता है और केवल पेट्रोल को इसका एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता। हालांकि, पुराने वाहनों में E20 के प्रभाव को लेकर वाहन मॉडल और उसकी तकनीकी क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है। वाहन मालिकों के लिए नियमित सर्विसिंग, सही टायर प्रेशर और बेहतर ड्राइविंग आदतें भी माइलेज बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।


