LPG Storage Buffer: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों के बाद भारत सरकार ने रसोई गैस (LPG) की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। सरकारी तेल कंपनियां अब देश में 30 दिनों का रणनीतिक LPG रिजर्व (Strategic LPG Reserve) बनाने की योजना पर काम कर रही हैं। इसके तहत हजारों करोड़ रुपये का निवेश कर भंडारण क्षमता बढ़ाई जाएगी, ताकि भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट का असर आम उपभोक्ताओं तक न पहुंचे।
Highlights
- भारत 30 दिन का रणनीतिक LPG रिजर्व बनाने की तैयारी में।
- BPCL करीब ₹5,000 करोड़ निवेश कर बढ़ाएगी स्टोरेज क्षमता।
- भारत अपनी 60% LPG जरूरत आयात से पूरी करता है।
- आयातित LPG का लगभग 90% होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है।
- सरकार अमेरिका, रूस और यूरोप से भी गैस खरीद बढ़ाने की योजना बना रही है।
होर्मुज संकट के बाद बदली सरकार की रणनीति
पश्चिम एशिया में हाल के भू-राजनीतिक तनाव ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। रसोई गैस की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा विदेशों से आने के कारण किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ सकता है।
इसी खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार और सरकारी तेल कंपनियां अब देश में 30 दिनों का रणनीतिक LPG स्टॉक तैयार करने की दिशा में काम कर रही हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी कारणवश आयात कुछ समय के लिए बाधित हो जाए, तब भी देशभर में घरेलू गैस सिलेंडर की सप्लाई सामान्य बनी रहे।
BPCL करेगी करीब ₹5,000 करोड़ का निवेश
इस महत्वाकांक्षी योजना में सबसे बड़ा निवेश भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) करने जा रही है।
कंपनी अपनी LPG भंडारण क्षमता को मौजूदा करीब 200 हजार मीट्रिक टन (TMT) से बढ़ाकर 340 हजार मीट्रिक टन तक ले जाएगी।
इस विस्तार परियोजना पर लगभग ₹5,000 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
सूत्रों के अनुसार BPCL के बाद Indian Oil Corporation (IOC) और Hindustan Petroleum Corporation (HPCL) भी अपनी स्टोरेज क्षमता बढ़ाने की योजनाओं को अंतिम रूप दे रही हैं।
भारत क्यों है इतना संवेदनशील?
भारत दुनिया के सबसे बड़े LPG उपभोक्ता देशों में शामिल है। उज्ज्वला योजना और घरेलू गैस कनेक्शनों के विस्तार के बाद LPG की मांग लगातार बढ़ रही है।
वर्तमान स्थिति यह है कि—
- भारत अपनी कुल LPG जरूरत का लगभग 60% आयात करता है।
- आयातित LPG का लगभग 90% हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत पहुंचता है।
यही वजह है कि यदि इस समुद्री मार्ग पर युद्ध, प्रतिबंध या किसी प्रकार की रुकावट आती है तो भारत की गैस सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
ईरान संकट के दौरान बढ़ गई थी चिंता
हाल के पश्चिम एशियाई तनाव के दौरान भारत में LPG सप्लाई को लेकर गंभीर आशंकाएं पैदा हो गई थीं।
स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने कई त्वरित कदम उठाए थे।
- घरेलू रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
- औद्योगिक और कमर्शियल गैस सिलेंडरों की बुकिंग पर अस्थायी नियंत्रण लगाया गया।
- सप्लाई चेन की लगातार निगरानी की गई।
बाद में स्थिति सामान्य होने पर इन प्रतिबंधों को हटा लिया गया, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने सरकार को दीर्घकालिक रणनीति बनाने के लिए प्रेरित किया।
अभी भारत के पास कितना LPG बैकअप है?
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार—
- देश में 214 LPG बॉटलिंग प्लांट संचालित हैं।
- इन प्लांट्स में सामान्य तौर पर 4 से 7 दिन का स्टॉक रहता है।
- औसतन यह बैकअप करीब 5 दिन का होता है।
- यदि सभी इम्पोर्ट टर्मिनल और अन्य स्टोरेज सुविधाओं को जोड़ दिया जाए तो भारत के पास फिलहाल लगभग 18 दिन का LPG कवर उपलब्ध है।
सरकार अब इस क्षमता को बढ़ाकर 30 दिन तक ले जाना चाहती है।
सरकार की रणनीति क्या होगी?
ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के लिए सरकार कई स्तरों पर काम कर रही है।
1. बड़े स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण
केवल जमीन पर बने टैंकों पर निर्भर रहने के बजाय सरकार कई विकल्पों पर विचार कर रही है।
इनमें शामिल हैं—
- बड़े सतही स्टोरेज टैंक
- भूमिगत कैवर्न (Underground Caverns)
- समुद्र में तैरते स्टोरेज जहाज (Floating Storage)
इससे किसी एक स्टोरेज सिस्टम पर निर्भरता कम होगी।
2. आयात के स्रोतों में विविधता
सरकार केवल मध्य-पूर्व पर निर्भर नहीं रहना चाहती।
इसीलिए तेल कंपनियां—
- अमेरिका के साथ लंबी अवधि के LPG अनुबंध कर रही हैं।
- रूस से आयात बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रही हैं।
- यूरोपीय बाजारों से भी खरीद बढ़ाने की रणनीति बना रही हैं।
इससे किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर दूसरे स्रोतों से आपूर्ति जारी रखी जा सकेगी।
आम उपभोक्ताओं को क्या फायदा होगा?
यदि 30 दिनों का रणनीतिक LPG रिजर्व तैयार हो जाता है तो इसके कई फायदे होंगे।
- गैस सिलेंडर की सप्लाई बाधित होने की संभावना कम होगी।
- वैश्विक संकट के दौरान भी घरेलू उपभोक्ताओं को गैस उपलब्ध रहेगी।
- कमर्शियल और घरेलू सिलेंडरों की कृत्रिम कमी की आशंका घटेगी।
- कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
- ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा बड़ा सहारा
भारत लगातार अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित बनाने की दिशा में निवेश बढ़ा रहा है। जिस तरह कच्चे तेल के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाए गए हैं, उसी तरह LPG के लिए भी बड़ा रिजर्व तैयार करने की योजना भविष्य में देश को वैश्विक संकटों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए केवल सस्ती खरीद पर्याप्त नहीं होती, बल्कि मजबूत भंडारण क्षमता भी उतनी ही जरूरी होती है।
निष्कर्ष
होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों ने भारत को यह एहसास कराया है कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक तैयारी जरूरी है। 30 दिनों का रणनीतिक LPG रिजर्व बनने से देश की रसोई गैस सप्लाई अधिक सुरक्षित होगी और किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट के दौरान करोड़ों उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। साथ ही, स्टोरेज क्षमता बढ़ाने और आयात के नए स्रोत विकसित करने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति पहले से कहीं अधिक मजबूत और लचीली बन सकेगी।


