Onion Price: देश के कई हिस्सों में प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने अब अपने बफर स्टॉक का इस्तेमाल तेज कर दिया है। सरकार पिछले 10 दिनों में 17 शहरों में करीब 4,000 टन बफर प्याज बाजार में उतार चुकी है। चुनिंदा जगहों पर इस प्याज की खुदरा बिक्री महज 35 रुपये प्रति किलो की दर से की जा रही है। सरकार की इस पहल से आने वाले दिनों में प्याज की कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने उठाया कदम
देश में प्याज की कीमतों में तेजी के बीच केंद्र सरकार ने अपने सुरक्षित भंडार से प्याज बाजार में भेजना शुरू कर दिया है। इसका मकसद उन शहरों में प्याज की उपलब्धता बढ़ाना है, जहां मांग ज्यादा होने के कारण खुदरा कीमतों में तेजी देखी जा रही है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले करीब 10 दिनों में 17 शहरों में लगभग 4,000 टन बफर प्याज पहुंचाया और बेचा जा चुका है। सरकार इस प्याज को चुनिंदा इलाकों में 35 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध करा रही है।
सरकार को उम्मीद है कि बाजार में सस्ते प्याज की सप्लाई बढ़ने से निजी कारोबारियों पर भी कीमतें कम करने का दबाव बनेगा और इसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिल सकता है।
2026 के लिए 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक
केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 के लिए करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक तैयार रखा है। बाजार में कीमतों में तेजी आने पर इसी भंडार का इस्तेमाल आपूर्ति बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।
सरकारी एजेंसियां NCCF और NAFED प्याज उत्पादक राज्यों से स्टॉक निकालकर उन प्रमुख शहरों तक पहुंचा रही हैं, जहां प्याज की मांग अधिक है। इसके लिए सड़क परिवहन के साथ-साथ रेलवे की मदद भी ली जा रही है।
इस रणनीति का उद्देश्य केवल प्याज को बाजार में पहुंचाना नहीं, बल्कि कम कीमत पर खुदरा बिक्री के जरिए आम उपभोक्ताओं को तत्काल राहत देना भी है।
‘कांदा एक्सप्रेस’ से दिल्ली और चेन्नई पहुंचा प्याज
सरकार ने बफर प्याज को तेजी से बड़े शहरों तक पहुंचाने के लिए विशेष मालगाड़ी का भी इस्तेमाल शुरू किया है। इसे ‘कांदा एक्सप्रेस’ नाम दिया गया है।
इस विशेष ट्रेन के जरिए बड़ी मात्रा में प्याज दिल्ली और चेन्नई तक पहुंचाया जा चुका है। अब इसकी तीसरी खेप गुवाहाटी भेजने की तैयारी है।
सरकार का मानना है कि रेलवे के जरिए एक साथ बड़ी मात्रा में प्याज पहुंचाने से लॉजिस्टिक्स लागत और समय दोनों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इससे उन शहरों में आपूर्ति मजबूत की जा सकती है, जहां कीमतें अपेक्षाकृत ज्यादा हैं।
₹35 प्रति किलो में प्याज बेच रही NCCF
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के मुताबिक, बफर स्टॉक से प्याज की बिक्री शुरू होने के बाद उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है। उन्होंने यह भी बताया कि प्याज की कीमतों में मामूली नरमी देखने को मिली है।
वहीं, NCCF की मैनेजिंग डायरेक्टर अनिस जोसेफ चंद्रा के अनुसार, उनकी संस्था अब तक अलग-अलग शहरों में लगभग 1,500 टन बफर प्याज बेच चुकी है।
फिलहाल NCCF का फोकस खुदरा बिक्री बढ़ाने पर है। इसके तहत उपभोक्ताओं को प्याज 35 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है।
मोबाइल वैन और दुकानों के जरिए बिक्री
सरकार की इस योजना में कई राज्य सरकारें भी दिलचस्पी दिखा रही हैं। बफर प्याज को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए स्थानीय दुकानों, मोबाइल वैन और सहकारी समितियों जैसे माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
दिल्ली-NCR के अलावा तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, केरल, राजस्थान, पंजाब और ओडिशा समेत कई राज्यों में खुदरा बिक्री अभियान चलाया जा रहा है।
प्याज की छंटाई, ग्रेडिंग और पैकिंग के साथ उसे अलग-अलग राज्यों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी केंद्रीय भंडारण निगम (CWC) संभाल रहा है।
क्या आने वाले दिनों में सस्ता होगा प्याज?
सरकारी हस्तक्षेप के बावजूद देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत में अभी बहुत बड़ी गिरावट नहीं आई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 28 अगस्त को जब सस्ते बफर प्याज की बिक्री शुरू हुई थी, तब देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत करीब 48.50 रुपये प्रति किलो थी।
इसके बाद 5 सितंबर तक यह औसत कीमत बढ़कर करीब 50.79 रुपये प्रति किलो हो गई। यानी बफर स्टॉक बाजार में उतारे जाने के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में तत्काल बड़ी गिरावट नहीं आई है।
5 सितंबर को प्रमुख शहरों में प्याज की खुदरा कीमत इस तरह रही:
| शहर | प्याज की कीमत |
|---|---|
| दिल्ली | ₹58 प्रति किलो |
| मुंबई | ₹53 प्रति किलो |
| चेन्नई | ₹63 प्रति किलो |
| रांची | ₹40 प्रति किलो |
इसी दिन देश में प्याज की औसत थोक कीमत करीब 42.79 रुपये प्रति किलो रही।
अब सरकार की नजर आगे की कीमतों पर है। यदि बफर स्टॉक से लगातार सप्लाई बढ़ाई जाती है और ज्यादा शहरों में 35 रुपये प्रति किलो वाला प्याज उपलब्ध कराया जाता है, तो आने वाले दिनों में खुदरा बाजार की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
उपभोक्ताओं को कितनी राहत मिलेगी?
सरकार की रणनीति साफ है—जहां प्याज महंगा बिक रहा है, वहां बफर स्टॉक से अतिरिक्त सप्लाई पहुंचाई जाए और कम कीमत पर खुदरा बिक्री की जाए। इससे बाजार में उपलब्धता बढ़ने के साथ कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, प्याज की कीमतों में वास्तविक और व्यापक गिरावट कितनी होगी, यह आने वाले दिनों में सप्लाई, मांग और अलग-अलग मंडियों में कीमतों पर निर्भर करेगा। फिलहाल सरकार का 1.21 लाख टन का बफर स्टॉक महंगे प्याज के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


