भारतीय शेयर बाजार में कई ऐसी कहानियां हैं जहां कंपनियों के शेयर आसमान से जमीन पर आए और फिर धीरे-धीरे वापसी की कोशिश करते नजर आए। Reliance Power का नाम भी उन्हीं में शामिल है। एक समय 500 रुपये से ऊपर ट्रेड करने वाला यह शेयर 2 रुपये से नीचे तक गिर गया था, लेकिन अब हालिया दिनों में इसमें फिर से हलचल देखने को मिल रही है।
पिछले 7 ट्रेडिंग सेशंस में इस स्टॉक ने 25% से ज्यादा की तेजी दिखाई है, जिससे निवेशकों के बीच फिर से चर्चा शुरू हो गई है कि क्या यह सिर्फ शॉर्ट-टर्म उछाल है या फिर लंबे समय की वापसी का संकेत।
हालिया तेजी: अचानक क्यों भागा शेयर?
पिछले कुछ दिनों के डेटा पर नजर डालें तो साफ दिखता है कि स्टॉक में तेजी अचानक नहीं आई, बल्कि धीरे-धीरे momentum बना।
30 मार्च 2026 को यह शेयर करीब ₹20.23 के स्तर पर था, जो इसका 52-हफ्ते का लो भी था। इसके बाद लगातार खरीदारी देखने को मिली और 10 अप्रैल 2026 तक यह बढ़कर ₹25.68 तक पहुंच गया।
इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान भी इसमें लगभग 4% की तेजी दर्ज की गई, जो यह दिखाती है कि बाजार में इस स्टॉक को लेकर interest बढ़ रहा है। पिछले 5 दिनों में लगभग 15% का उछाल और 7 दिनों में 25% की तेजी — यह संकेत देता है कि short-term traders और momentum investors दोनों सक्रिय हैं।
538 रुपये से 1.15 रुपये तक: एक लंबी गिरावट की कहानी
Reliance Power की असली कहानी समझने के लिए हमें पीछे जाना होगा।
11 फरवरी 2008 को यह शेयर ₹538 के स्तर तक पहुंच गया था। उस समय कंपनी को लेकर उम्मीदें काफी ऊंची थीं और यह भारत के पावर सेक्टर का बड़ा नाम बनने की राह पर मानी जा रही थी।
लेकिन इसके बाद हालात तेजी से बदले। प्रोजेक्ट डिले, फाइनेंशियल प्रेशर और सेक्टर की चुनौतियों ने कंपनी को प्रभावित किया। धीरे-धीरे निवेशकों का भरोसा कम होता गया और शेयर लगातार गिरता चला गया।
स्थिति इतनी खराब हो गई कि 27 मार्च 2020 को यह शेयर ₹1.15 तक गिर गया — यानी अपने पीक से लगभग पूरी वैल्यू खो चुका था।
हालांकि, इसी निचले स्तर से इसमें जबरदस्त रिकवरी भी देखने को मिली। 1.15 रुपये से लेकर हाल के स्तर तक यह स्टॉक 5000% से ज्यादा उछल चुका है।
लेकिन यहां एक जरूरी बात समझनी चाहिए — इतनी बड़ी गिरावट के बाद आने वाली तेजी हमेशा sustainable नहीं होती।
क्या वजह है हालिया उछाल की?
हालिया तेजी के पीछे कोई एक बड़ा कारण सामने नहीं आया है, लेकिन बाजार के ट्रेंड को देखें तो कुछ संभावित कारण हो सकते हैं:
पहला, low base effect — जब कोई शेयर बहुत नीचे के स्तर पर होता है, तो उसमें छोटी खरीदारी भी बड़े प्रतिशत उछाल में बदल जाती है।
दूसरा, operator-driven movement — कई बार low-priced stocks में ट्रेडिंग activity बढ़ने पर तेजी अचानक दिखती है।
तीसरा, sector sentiment — पावर सेक्टर में हाल के महीनों में interest बढ़ा है, जिससे संबंधित कंपनियों के शेयरों में भी हलचल देखने को मिलती है।
चौथा, retail participation — कम कीमत वाले शेयर छोटे निवेशकों को आकर्षित करते हैं, जिससे वॉल्यूम बढ़ता है और कीमत में तेजी आती है।
बोनस शेयर का इतिहास: निवेशकों को मिल चुका है फायदा
Reliance Power ने अपने निवेशकों को पहले बोनस शेयर का फायदा भी दिया है।
मई 2008 में कंपनी ने 3:5 के रेशियो में बोनस शेयर जारी किए थे। यानी हर 5 शेयर पर 3 अतिरिक्त शेयर दिए गए थे।
यह उस समय कंपनी की मजबूत स्थिति और निवेशकों के भरोसे को दर्शाता था। हालांकि, इसके बाद कंपनी की परफॉर्मेंस उस उम्मीद पर खरी नहीं उतर सकी।
शेयरहोल्डिंग पैटर्न क्या बताता है?
दिसंबर 2025 तिमाही के अनुसार:
- प्रमोटर होल्डिंग: 24.98%
- पब्लिक होल्डिंग: 75.02%
यह डेटा बताता है कि कंपनी में पब्लिक शेयरहोल्डिंग काफी ज्यादा है। इसका मतलब यह है कि स्टॉक की कीमत पर retail investors और छोटे ट्रेडर्स का प्रभाव ज्यादा हो सकता है।
क्या यह रैली टिकाऊ है?
यह सबसे बड़ा सवाल है जो हर निवेशक के मन में आता है।
शेयर का तेजी से बढ़ना हमेशा अच्छा संकेत नहीं होता, खासकर जब उसके पीछे मजबूत फंडामेंटल्स का सपोर्ट न हो।
Reliance Power के मामले में:
- कंपनी का इतिहास काफी volatile रहा है
- पहले भी sharp rallies और गिरावट देखने को मिली हैं
- long-term stability अभी भी सवालों के घेरे में है
इसलिए यह कहना मुश्किल है कि यह तेजी लंबी चलेगी या नहीं।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
अगर आप इस स्टॉक को देख रहे हैं, तो कुछ बातें ध्यान में रखना जरूरी है:
यह स्टॉक short-term trading के लिए आकर्षक लग सकता है, लेकिन long-term investment के लिए इसमें जोखिम ज्यादा है।
कम कीमत देखकर निवेश करना हमेशा सही रणनीति नहीं होती। जरूरी यह है कि कंपनी के fundamentals मजबूत हों और future growth की clear visibility हो।
कई बार “सस्ता शेयर” सबसे महंगा साबित हो जाता है।
मार्केट कैप और वर्तमान स्थिति
10 अप्रैल 2026 तक कंपनी का मार्केट कैप ₹10,500 करोड़ के पार पहुंच गया है।
यह दिखाता है कि despite volatility, कंपनी अभी भी market में एक significant presence रखती है।
हालांकि, इसका 52-हफ्ते का हाई ₹76.49 है, जो यह बताता है कि अभी भी यह अपने peak से काफी नीचे ट्रेड कर रहा है।
निष्कर्ष: वापसी या सिर्फ शॉर्ट टर्म खेल?
Reliance Power का शेयर एक classic example है कि stock market में कुछ भी स्थायी नहीं होता।
जहां एक समय यह निवेशकों का favorite था, वहीं बाद में यह सबसे बड़े wealth destroyers में शामिल हो गया। अब फिर से इसमें हलचल दिख रही है, लेकिन यह तय करना आसान नहीं है कि यह असली recovery है या सिर्फ temporary rally।
निवेशकों के लिए सबसे जरूरी है — भावनाओं से नहीं, बल्कि डेटा और समझ से फैसले लेना।
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