मुंबई: देश की सबसे बड़ी निजी कंपनियों में शामिल रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सरकारी खजाने में 2.16 लाख करोड़ रुपये से अधिक का योगदान दिया है। कंपनी की ताजा एनुअल रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। इसमें टैक्स, एक्साइज ड्यूटी, कस्टम ड्यूटी, रॉयल्टी और सरकार को किए गए अन्य भुगतान शामिल हैं। खास बात यह है कि कंपनी ने सिर्फ सरकारी राजस्व में ही योगदान नहीं बढ़ाया, बल्कि सामाजिक कार्यों यानी CSR खर्च में भी इजाफा किया है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने गुरुवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बताया कि FY26 के दौरान कंपनी ने कुल 2,16,472 करोड़ रुपये सरकार को दिए। एक साल पहले यानी FY25 में यह आंकड़ा 2,10,269 करोड़ रुपये था। इस तरह सालाना आधार पर कंपनी का सरकारी योगदान करीब 2.95 फीसदी बढ़ा है।
हर 100 रुपये की वैल्यू में 47 रुपये सरकार को
कंपनी के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कुल 4,63,448 करोड़ रुपये की वैल्यू क्रिएट की। इसमें से लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा सीधे सरकार के पास टैक्स और अन्य शुल्क के रूप में गया। दूसरे शब्दों में कहें तो कंपनी द्वारा बनाए गए हर 100 रुपये के आर्थिक मूल्य में करीब 47 रुपये सरकारी खजाने में पहुंचे। यह आंकड़ा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि भारत सरकार का टैक्स कलेक्शन काफी हद तक बड़े कॉरपोरेट समूहों और पेट्रोलियम सेक्टर पर निर्भर रहता है। रिलायंस का ऑयल-टू-केमिकल (O2C) कारोबार देश के सबसे बड़े राजस्व स्रोतों में से एक माना जाता है।
10 साल में 15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का योगदान
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि पिछले 10 वर्षों में कंपनी का कुल राष्ट्रीय योगदान 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। इसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष टैक्स, निर्यात शुल्क, रॉयल्टी, डिविडेंड और अन्य सरकारी भुगतान शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे विकासशील देश में बड़े कॉरपोरेट समूहों का टैक्स योगदान सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं, सामाजिक कल्याण योजनाओं और सब्सिडी व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है।
पेट्रोलियम बिजनेस अभी भी सबसे बड़ा आधार
हालांकि रिलायंस अब रिटेल, टेलीकॉम, डिजिटल सर्विसेज और ग्रीन एनर्जी जैसे सेक्टर में तेजी से विस्तार कर रही है, लेकिन कंपनी की कमाई और सरकारी योगदान का सबसे बड़ा हिस्सा अभी भी पेट्रोलियम और रिफाइनिंग बिजनेस से आता है। रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में शामिल है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर कंपनी के राजस्व और सरकार को मिलने वाले टैक्स पर भी पड़ता है। बीते वित्त वर्ष में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी अस्थिरता देखने को मिली थी। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई संबंधी चिंताओं के कारण तेल बाजार में कई बार तेजी आई। इसके बावजूद रिलायंस ने मजबूत रिफाइनिंग मार्जिन और एक्सपोर्ट बिजनेस के दम पर अच्छा प्रदर्शन किया।
CSR खर्च भी बढ़ा, सामाजिक योजनाओं पर जोर
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने FY26 में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत 2,248 करोड़ रुपये खर्च किए। FY25 में कंपनी का CSR खर्च 2,156 करोड़ रुपये था। इस तरह इसमें 4.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। कंपनी का कहना है कि कोविड महामारी के बाद से अब तक उसका कुल CSR खर्च 9,500 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। रिलायंस फाउंडेशन के जरिए कंपनी शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, खेल और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में कई बड़े प्रोजेक्ट चला रही है। नीता अंबानी की अगुवाई वाला रिलायंस फाउंडेशन देश के बड़े कॉरपोरेट फाउंडेशनों में गिना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा, अस्पतालों की सुविधा और खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए कंपनी लगातार निवेश कर रही है।
ग्रीन एनर्जी और डिजिटल कारोबार पर बड़ा दांव
रिलायंस इंडस्ट्रीज अब पारंपरिक पेट्रोलियम कारोबार से आगे बढ़कर ग्रीन एनर्जी और डिजिटल सेक्टर पर बड़ा दांव लगा रही है। कंपनी गुजरात के जामनगर में बड़े ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स का निर्माण कर रही है। इसमें सोलर मॉड्यूल, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज और अन्य स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं पर काम हो रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में रिलायंस का ग्रीन बिजनेस कंपनी की कमाई और वैल्यूएशन का बड़ा आधार बन सकता है। इसके अलावा Jio Platforms और Reliance Retail भी कंपनी के विकास को नई दिशा दे रहे हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था में क्यों अहम है रिलायंस?
रिलायंस इंडस्ट्रीज सिर्फ एक निजी कंपनी नहीं बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बड़ी ताकत मानी जाती है। कंपनी लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार देती है। पेट्रोलियम, टेलीकॉम, रिटेल, डिजिटल सर्विसेज और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में इसकी मौजूदगी भारत की आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब कोई बड़ी कंपनी सरकारी राजस्व में इतना बड़ा योगदान देती है तो इसका असर देश की विकास योजनाओं पर भी पड़ता है। इससे सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा परियोजनाओं पर खर्च करने में मदद मिलती है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
रिलायंस इंडस्ट्रीज की वार्षिक रिपोर्ट से साफ संकेत मिलता है कि कंपनी का कैश फ्लो और बिजनेस स्केल लगातार मजबूत बना हुआ है। सरकारी योगदान और CSR खर्च में बढ़ोतरी यह दिखाती है कि कंपनी सिर्फ कारोबार विस्तार ही नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी अपनी भूमिका मजबूत कर रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में रिलायंस का फोकस ग्रीन एनर्जी, AI, डिजिटल सर्विसेज और रिटेल विस्तार पर रहेगा। अगर कंपनी इन क्षेत्रों में मजबूत ग्रोथ बनाए रखती है तो उसका आर्थिक योगदान और बढ़ सकता है।
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