नई दिल्ली: भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में एक और बड़ी डील सामने आई है। आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने ग्रीन एनर्जी कारोबार को नई ऊंचाई देने के लिए करीब ₹17,200 करोड़ की बड़ी खरीद का ऐलान किया है। ग्रुप की कंपनी ग्रासिम इंडस्ट्रीज़ की यूनिट आदित्य बिड़ला रिन्यूएबल्स लिमिटेड (ABREN) ने शेल ओवरसीज़ इन्वेस्टमेंट B.V. से Sprng Energy (स्प्रिंग एनर्जी) का अधिग्रहण करने के लिए समझौता किया है।
इस डील के बाद ABREN देश के सबसे बड़े इंटीग्रेटेड रिन्यूएबल एनर्जी प्लेटफॉर्म में शामिल हो जाएगी। साथ ही, यह कदम ग्रीन एनर्जी सेक्टर में रिलायंस, अडाणी और टाटा जैसी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकता है।
Highlights
- ₹17,200 करोड़ में Sprng Energy के अधिग्रहण का समझौता।
- ABREN की कुल रिन्यूएबल क्षमता बढ़कर 9.3 GWp होगी।
- देश के सबसे बड़े इंटीग्रेटेड ग्रीन एनर्जी प्लेटफॉर्म में होगी गिनती।
- 20 GWp से अधिक क्षमता हासिल करने का रखा गया लक्ष्य।
- डील 2026 के अंत तक पूरी होने की उम्मीद।
क्या है पूरी डील?
आदित्य बिड़ला ग्रुप ने बताया कि ABREN ने लगभग 1.8 अरब डॉलर (करीब ₹17,200 करोड़) में Sprng Energy को खरीदने का समझौता किया है। यह अधिग्रहण शेल ओवरसीज़ इन्वेस्टमेंट B.V. से किया जा रहा है।
डील के तहत अंतिम भुगतान कंपनी के कर्ज, नकदी (Cash) और अन्य वित्तीय समायोजनों के आधार पर तय होगा। अधिग्रहण के लिए फंडिंग ग्रासिम इंडस्ट्रीज़ और ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर्स (BlackRock द्वारा प्रबंधित फंड) की ओर से डेट और इक्विटी के माध्यम से की जाएगी।
9.3 GWp तक पहुंच जाएगी क्षमता
Sprng Energy के अधिग्रहण के बाद ABREN की कुल रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता बढ़कर लगभग 9.3 गीगावाट-पीक (GWp) हो जाएगी।
इसमें शामिल हैं:
- लगभग 3.3 GWp चालू (Operational) परियोजनाएं।
- करीब 1.7 GWp निर्माणाधीन (Under Construction) प्रोजेक्ट।
- मजबूत भविष्य की परियोजना पाइपलाइन।
कंपनी का लक्ष्य आने वाले वर्षों में 20 GWp से अधिक क्षमता हासिल करना है।
ग्रीन एनर्जी सेक्टर में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
भारत में ग्रीन एनर्जी को लेकर बड़े उद्योग समूह तेजी से निवेश कर रहे हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज़, अडाणी ग्रीन एनर्जी और टाटा पावर पहले से इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर विस्तार कर रहे हैं।
अब ABREN की यह बड़ी खरीद आदित्य बिड़ला ग्रुप को भी इस दौड़ में मजबूत स्थिति में ला सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती ऊर्जा मांग और स्वच्छ ऊर्जा पर सरकार के फोकस के बीच यह अधिग्रहण कंपनी की लंबी अवधि की रणनीति को मजबूती देगा।
2026 के आखिर तक पूरी होगी डील
कंपनी के अनुसार, यह अधिग्रहण आवश्यक नियामकीय (Regulatory) मंजूरियों और अन्य औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद 2026 के अंत तक पूरा होने की संभावना है।
इसके बाद ABREN के कमर्शियल एवं इंडस्ट्रियल (C&I) रिन्यूएबल कारोबार को Sprng Energy के यूटिलिटी-स्केल पोर्टफोलियो के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे परिचालन क्षमता और परियोजना निष्पादन की गति बढ़ेगी।
कुमार मंगलम बिड़ला ने क्या कहा?
आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा कि समूह लंबे समय से विश्वस्तरीय व्यवसाय खड़े करने की रणनीति पर काम करता रहा है और भारत के ऊर्जा परिवर्तन (Energy Transition) को भी उसी दृष्टिकोण से देखता है।
उन्होंने कहा कि यह अधिग्रहण देश के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य को मजबूत बनाने के साथ-साथ आर्थिक विकास की मजबूत नींव तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
आर्यमान विक्रम बिड़ला का बयान
ग्रुप के निदेशक आर्यमान विक्रम बिड़ला ने कहा कि यह अधिग्रहण ABREN की विकास यात्रा का एक अहम पड़ाव है। इससे कंपनी राष्ट्रीय स्तर पर एक अग्रणी रिन्यूएबल एनर्जी प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगी।
ऑपरेशन और प्रोजेक्ट डेवलपमेंट को मिलेगा फायदा
ABREN के बिजनेस हेड जयंत दुआ ने कहा कि दोनों कंपनियों के एकीकरण से इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन, एसेट मैनेजमेंट और प्रोजेक्ट डेवलपमेंट में बेहतर तालमेल बनेगा। इससे नई परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की क्षमता भी बढ़ेगी।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब?
यह अधिग्रहण केवल एक कॉर्पोरेट डील नहीं, बल्कि भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में बदलते परिदृश्य का संकेत भी है। यदि नियामकीय मंजूरियां समय पर मिलती हैं, तो ABREN आने वाले वर्षों में देश की प्रमुख ग्रीन एनर्जी कंपनियों में अपनी मजबूत पहचान बना सकती है। साथ ही, यह कदम आदित्य बिड़ला ग्रुप की स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक रणनीति को और मजबूत करेगा।


