RBI Penalty on Bank of Baroda: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) पर 63.60 लाख रुपये का मौद्रिक जुर्माना लगाया है। केंद्रीय बैंक ने यह कार्रवाई Fair Practices Code for Lenders और Know Your Customer (KYC) से जुड़े नियामकीय निर्देशों का पालन नहीं करने पर की है। इसके साथ ही GIC Housing Finance Ltd. पर भी KYC नियमों के उल्लंघन के कारण 3.1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
Highlights
- RBI ने Bank of Baroda पर ₹63.60 लाख का जुर्माना लगाया।
- Fair Practices Code और KYC नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई।
- कुछ लोन खातों में तय ब्याज दर से अधिक ब्याज वसूलने का आरोप।
- CKYCR पर समय पर KYC रिकॉर्ड अपलोड नहीं किए गए।
- GIC Housing Finance पर भी ₹3.1 लाख का जुर्माना।
- RBI ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल नियामकीय कमियों से संबंधित है।
RBI ने क्यों लगाया Bank of Baroda पर जुर्माना?
भारतीय रिजर्व बैंक ने 30 जून 2026 को जारी आदेश में बताया कि 31 मार्च 2025 तक की वित्तीय स्थिति के आधार पर बैंक ऑफ बड़ौदा का वैधानिक निरीक्षण (Statutory Inspection) किया गया था। निरीक्षण के दौरान बैंक द्वारा RBI के कुछ महत्वपूर्ण नियामकीय निर्देशों का पालन नहीं किए जाने के संकेत मिले।
इसके बाद RBI ने बैंक को शो-कॉज नोटिस जारी कर पूछा कि उसके खिलाफ मौद्रिक जुर्माना क्यों न लगाया जाए। बैंक की ओर से दिए गए लिखित जवाब, अतिरिक्त दस्तावेजों और व्यक्तिगत सुनवाई (Personal Hearing) में प्रस्तुत दलीलों की समीक्षा के बाद RBI ने आरोपों को सही पाया और बैंक पर ₹63.60 लाख का जुर्माना लगाने का निर्णय लिया।
क्या थीं बैंक की प्रमुख कमियां?
RBI के अनुसार जांच में निम्नलिखित प्रमुख अनियमितताएं सामने आईं—
1. तय ब्याज दर से अधिक ब्याज वसूला
कुछ लोन खातों में ग्राहकों से निर्धारित ब्याज दर से अधिक ब्याज वसूला गया। यह RBI के Fair Practices Code for Lenders के प्रावधानों के विपरीत माना गया।
2. KYC रिकॉर्ड समय पर अपलोड नहीं किए
बैंक कई ग्राहकों के KYC रिकॉर्ड निर्धारित समय सीमा के भीतर Central KYC Records Registry (CKYCR) पर अपलोड करने में विफल रहा। KYC से जुड़े रिकॉर्ड समय पर अपडेट न करना नियामकीय अनुपालन की गंभीर कमी माना जाता है।
ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं
RBI ने अपने बयान में साफ किया है कि यह कार्रवाई केवल रेगुलेटरी कंप्लायंस (Regulatory Compliance) में पाई गई कमियों के आधार पर की गई है।
केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि—
- इस जुर्माने का बैंक और ग्राहकों के बीच हुए किसी लेन-देन या अनुबंध की वैधता से कोई संबंध नहीं है।
- जुर्माना लगाए जाने का अर्थ यह भी नहीं है कि RBI भविष्य में आवश्यक समझे जाने पर अन्य नियामकीय कार्रवाई नहीं कर सकता।
यानी बैंक की सेवाएं या ग्राहकों के खाते इस कार्रवाई से सीधे प्रभावित नहीं होंगे।
GIC Housing Finance पर भी RBI की कार्रवाई
RBI ने एक अलग आदेश में GIC Housing Finance Limited पर ₹3.1 लाख का जुर्माना लगाया है।
कंपनी का निरीक्षण भी 31 मार्च 2025 तक की वित्तीय स्थिति के आधार पर किया गया था। जांच के दौरान पाया गया कि कंपनी ने KYC दिशानिर्देशों के तहत खातों की रिस्क कैटेगरी की हर छह महीने में समीक्षा करने की आवश्यक व्यवस्था लागू नहीं की थी।
कंपनी के स्पष्टीकरण और उपलब्ध रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद RBI ने आरोपों को सही मानते हुए जुर्माना लगाया।
KYC और Fair Practices Code क्यों हैं महत्वपूर्ण?
RBI के KYC नियमों का उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली को सुरक्षित रखना, फर्जी खातों और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों पर रोक लगाना है। वहीं Fair Practices Code यह सुनिश्चित करता है कि बैंक ग्राहकों के साथ पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवहार करें तथा लोन से जुड़ी सभी शर्तों का सही तरीके से पालन करें।
इन नियमों का उल्लंघन होने पर RBI संबंधित बैंक या वित्तीय संस्थान पर मौद्रिक दंड लगाने सहित अन्य नियामकीय कदम उठा सकता है।
निष्कर्ष
Bank of Baroda पर लगाया गया ₹63.60 लाख का जुर्माना इस बात का संकेत है कि RBI नियामकीय अनुपालन को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से ले रहा है। वहीं GIC Housing Finance पर की गई कार्रवाई भी दर्शाती है कि KYC और जोखिम प्रबंधन से जुड़े नियमों का पालन सभी वित्तीय संस्थानों के लिए अनिवार्य है। हालांकि, RBI ने स्पष्ट किया है कि इन जुर्मानों का ग्राहकों के खातों या उनके बैंकिंग लेन-देन की वैधता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।


