नई दिल्ली: देशभर के करोड़ों होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन धारकों की नजर आज भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर टिकी हुई है। बुधवार से शुरू हुई MPC की बैठक के फैसलों की घोषणा आज RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा करेंगे। इस घोषणा का सीधा असर आम लोगों की जेब, बैंकिंग सेक्टर, शेयर बाजार और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या RBI रेपो रेट में बदलाव करेगा या फिर ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर ही बनाए रखेगा। यदि रेपो रेट में बढ़ोतरी होती है तो होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज महंगे हो सकते हैं। वहीं यदि दरों में कटौती होती है तो EMI कम होने की उम्मीद बढ़ जाएगी।
क्यों महत्वपूर्ण है RBI की MPC बैठक?
मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी RBI का वह निकाय है जो देश में ब्याज दरों और महंगाई को नियंत्रित करने से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेता है। MPC में छह सदस्य होते हैं, जिनमें RBI गवर्नर भी शामिल रहते हैं। समिति का मुख्य उद्देश्य महंगाई को नियंत्रित रखते हुए आर्थिक विकास को गति देना होता है।
हर दो महीने में होने वाली MPC बैठक के फैसलों पर बैंक, उद्योग जगत, निवेशक और आम उपभोक्ता सभी की नजर रहती है क्योंकि इन्हीं फैसलों के आधार पर देश में कर्ज और बचत की लागत तय होती है।
अभी कितना है रेपो रेट?
वर्तमान में RBI का रेपो रेट 5.25 प्रतिशत है। रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक कर्ज उपलब्ध कराता है।
जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए फंड जुटाना महंगा हो जाता है। इसके बाद बैंक ग्राहकों को दिए जाने वाले होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं। दूसरी ओर रेपो रेट में कटौती होने पर लोन सस्ते होने की संभावना बढ़ जाती है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
बैंक ऑफ बड़ौदा की हालिया रिपोर्ट के अनुसार RBI इस बैठक में ब्याज दरों को यथावत रख सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक परिस्थितियों, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और महंगाई से जुड़े जोखिमों को देखते हुए केंद्रीय बैंक फिलहाल सतर्क रुख अपना सकता है।
हालांकि सभी विशेषज्ञ एक राय नहीं रखते। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री अनुभूति सहाय का मानना है कि महंगाई के जोखिमों और रुपये में कमजोरी के चलते RBI आने वाले महीनों में सख्ती का रास्ता अपना सकता है। उनके अनुसार जून और अगस्त की नीतिगत बैठकों में कुल 50 बेसिस पॉइंट तक की बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों का कहना है कि खाद्य महंगाई, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक आर्थिक माहौल RBI के फैसले को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक बने हुए हैं।
EMI पर कितना पड़ेगा असर?
यदि RBI रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत यानी 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करता है तो इसका असर धीरे-धीरे बैंकों की लेंडिंग दरों पर दिखाई दे सकता है।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति ने 40 लाख रुपये का होम लोन 20 साल के लिए लिया है और ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है, तो उसकी मासिक EMI में सैकड़ों रुपये का इजाफा हो सकता है। लंबे समय में यह अतिरिक्त बोझ लाखों रुपये तक पहुंच सकता है।
इसी तरह 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी होने पर EMI का दबाव और बढ़ सकता है। हालांकि वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित बैंक RBI के फैसले को कितनी तेजी से ग्राहकों तक पास करता है।
होम लोन लेने वालों को क्या करना चाहिए?
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले समय में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका है तो मौजूदा उधारकर्ताओं को अपने लोन की शर्तों की समीक्षा करनी चाहिए। जिन ग्राहकों का लोन फ्लोटिंग रेट पर है, उनकी EMI या लोन अवधि प्रभावित हो सकती है।
दूसरी ओर नए होम लोन लेने की योजना बना रहे लोगों को RBI के फैसले और बैंकिंग सेक्टर की प्रतिक्रिया पर नजर रखनी चाहिए। कई बार बैंक प्रतिस्पर्धा के चलते रेपो रेट बढ़ने के बावजूद तुरंत ब्याज दरों में बदलाव नहीं करते।
शेयर बाजार पर भी रहेगी नजर
RBI की मौद्रिक नीति का असर केवल लोन और EMI तक सीमित नहीं रहता। शेयर बाजार के निवेशक भी इस घोषणा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
यदि RBI विकास को समर्थन देने वाला रुख अपनाता है तो बैंकिंग, रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। वहीं यदि महंगाई को लेकर सख्त रुख अपनाया जाता है तो बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों की नजर केवल रेपो रेट पर नहीं होगी बल्कि RBI गवर्नर की टिप्पणी, महंगाई के अनुमान और आर्थिक विकास के आउटलुक पर भी रहेगी।
FD निवेशकों के लिए क्या मायने?
यदि ब्याज दरें बढ़ती हैं तो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) निवेशकों को भी फायदा मिल सकता है। आमतौर पर बैंक रेपो रेट बढ़ने के बाद धीरे-धीरे जमा योजनाओं पर मिलने वाली ब्याज दरों में भी बदलाव करते हैं।
इससे वरिष्ठ नागरिकों और सुरक्षित निवेश पसंद करने वाले निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बन सकती है। हालांकि यह पूरी तरह बैंकों की रणनीति और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
आज के फैसले पर क्यों टिकी हैं निगाहें?
देश में महंगाई, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रुपये की चाल जैसे कई कारक एक साथ सक्रिय हैं। ऐसे में RBI के सामने आर्थिक विकास और महंगाई नियंत्रण के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।
यही वजह है कि आज आने वाला MPC का फैसला केवल बैंकिंग सेक्टर ही नहीं बल्कि आम परिवारों, कारोबारियों और निवेशकों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब सभी की निगाहें RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं, जहां यह साफ हो जाएगा कि आने वाले महीनों में आपकी EMI का बोझ बढ़ने वाला है या राहत मिलने वाली है।
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