नई दिल्ली। आमतौर पर रुपये की कमजोरी को देश की अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय माना जाता है, लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 में यही कमजोरी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए बड़ी कमाई का जरिया बन गई। डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब 9.5 फीसदी की गिरावट के बीच RBI ने विदेशी मुद्रा बाजार में रिकॉर्ड स्तर पर हस्तक्षेप किया और इसी प्रक्रिया में केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा लेनदेन से ₹1.69 लाख करोड़ की आय अर्जित की।
Highlights
- RBI की विदेशी मुद्रा लेनदेन से आय बढ़कर ₹1.69 लाख करोड़ पहुंची
- एक साल में 52% बढ़ी विदेशी मुद्रा सौदों से कमाई
- रुपये को संभालने के लिए RBI ने बेचे 53.13 अरब डॉलर
- सरकार को रिकॉर्ड ₹2.87 लाख करोड़ का सरप्लस ट्रांसफर
- विदेशी निवेश, स्वर्ण भंडार और घरेलू निवेश में तेज बढ़ोतरी
RBI की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार यह आय पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के ₹1.11 लाख करोड़ की तुलना में लगभग 52 फीसदी अधिक है। विदेशी स्रोतों से RBI की कुल आय भी बढ़कर ₹3.28 लाख करोड़ पर पहुंच गई, जो सालाना आधार पर 27 फीसदी की वृद्धि दर्शाती है।
रुपये की गिरावट से RBI ने कैसे कमाए हजारों करोड़ रुपये?
यह सवाल कई लोगों के मन में आता है कि आखिर रुपये के कमजोर होने से RBI को फायदा कैसे हुआ। दरअसल जब रुपये पर दबाव बढ़ता है और डॉलर के मुकाबले उसकी कीमत गिरने लगती है, तब RBI विदेशी मुद्रा भंडार में मौजूद डॉलर बेचकर बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ाता है। इससे रुपये पर दबाव कम करने में मदद मिलती है। वित्त वर्ष 2025-26 में RBI ने स्पॉट मार्केट में रिकॉर्ड 53.13 अरब डॉलर की बिक्री की। RBI के पास मौजूद अधिकांश डॉलर कई वर्षों पहले कम कीमतों पर खरीदे गए थे। जब डॉलर की कीमत बढ़ी और RBI ने उन्हें बाजार में बेचा, तो उसे भारी विनिमय लाभ (Exchange Gain) हुआ। इसी वजह से विदेशी मुद्रा लेनदेन से होने वाली आय रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
डॉलर की मजबूती और रुपये की कमजोरी का असर
पिछले वित्त वर्ष में वैश्विक स्तर पर डॉलर मजबूत बना रहा। अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों, भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश की मांग के कारण डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ। इसका असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा और रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 9.5 फीसदी कमजोर हो गया। रुपये की इस गिरावट को नियंत्रित करने के लिए RBI को लगातार बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा। हालांकि इस हस्तक्षेप से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव जरूर पड़ा, लेकिन RBI को विनिमय लाभ के रूप में बड़ी कमाई भी हुई।
सरकार को रिकॉर्ड सरप्लस ट्रांसफर
RBI की बढ़ी हुई आय का सीधा फायदा केंद्र सरकार को भी मिलने जा रहा है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार को ₹2.87 लाख करोड़ का रिकॉर्ड सरप्लस ट्रांसफर करने का फैसला किया है। यह भारतीय इतिहास में RBI द्वारा सरकार को दिया गया सबसे बड़ा अधिशेष माना जा रहा है। इससे सरकार को राजकोषीय घाटा नियंत्रित रखने, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश बढ़ाने और सामाजिक योजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
RBI की बैलेंस शीट भी हुई मजबूत
31 मार्च 2026 तक RBI का कुल बहीखाता आकार बढ़कर ₹91.97 लाख करोड़ पहुंच गया। एक साल में इसमें ₹15.72 लाख करोड़ की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
परिसंपत्तियों में वृद्धि के प्रमुख कारण:
- घरेलू निवेश में 44.9% वृद्धि
- स्वर्ण भंडार में 63.8% वृद्धि
- विदेशी निवेश में 7.9% वृद्धि
यह संकेत देता है कि RBI ने अपनी परिसंपत्तियों को और मजबूत किया है तथा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी अपनी वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाए रखा है।
RBI की आय में कितनी बढ़ोतरी हुई?
| मद | FY 2024-25 | FY 2025-26 |
|---|---|---|
| विदेशी मुद्रा लेनदेन आय | ₹1.11 लाख करोड़ | ₹1.69 लाख करोड़ |
| विदेशी स्रोतों से कुल आय | ₹2.58 लाख करोड़ | ₹3.28 लाख करोड़ |
| कुल आय | ₹3.41 लाख करोड़ | ₹4.30 लाख करोड़ |
| अधिशेष (Surplus) | ₹2.69 लाख करोड़ | ₹2.87 लाख करोड़ |
क्या आम लोगों को इसका फायदा मिलेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि RBI की मजबूत आय और रिकॉर्ड सरप्लस ट्रांसफर से सरकार की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च, सामाजिक कल्याण योजनाओं और विकास परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं। हालांकि दूसरी ओर रुपये की कमजोरी का असर आयात लागत पर पड़ता है। इससे पेट्रोलियम उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए RBI के लिए चुनौती यह रहती है कि वह मुद्रा स्थिरता और विदेशी मुद्रा भंडार दोनों के बीच संतुलन बनाए रखे।
आगे क्या?
आने वाले महीनों में वैश्विक ब्याज दरों, अमेरिका की मौद्रिक नीति और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का असर रुपये की चाल पर देखने को मिल सकता है। यदि डॉलर मजबूत बना रहता है तो RBI को फिर से विदेशी मुद्रा बाजार में सक्रिय हस्तक्षेप करना पड़ सकता है। फिलहाल इतना तय है कि वित्त वर्ष 2025-26 RBI के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंधन के लिहाज से बेहद सफल रहा। रुपये की कमजोरी को नियंत्रित करने की कोशिशों ने जहां बाजार को स्थिरता दी, वहीं केंद्रीय बैंक को रिकॉर्ड आय और सरकार को ऐतिहासिक सरप्लस ट्रांसफर का रास्ता भी दिखाया।
FAQs
RBI ने विदेशी मुद्रा लेनदेन से कितनी कमाई की?
वित्त वर्ष 2025-26 में RBI ने विदेशी मुद्रा लेनदेन से ₹1.69 लाख करोड़ की आय अर्जित की।
RBI ने कितने डॉलर बेचे?
रुपये को संभालने के लिए RBI ने स्पॉट मार्केट में रिकॉर्ड 53.13 अरब डॉलर बेचे।
RBI सरकार को कितना सरप्लस ट्रांसफर करेगा?
RBI ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार को ₹2.87 लाख करोड़ का रिकॉर्ड अधिशेष ट्रांसफर करने की घोषणा की है।
रुपये की गिरावट से RBI को फायदा कैसे हुआ?
डॉलर महंगा होने पर RBI ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचकर विनिमय लाभ कमाया, जिससे उसकी आय बढ़ी।
RBI की कुल आय कितनी रही?
वित्त वर्ष 2025-26 में RBI की कुल आय बढ़कर लगभग ₹4.3 लाख करोड़ पहुंच गई।
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