Vedanta Demerger Updates: वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने 61वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में डीमर्जर के बाद समूह की हर नई कंपनी को 100 बिलियन डॉलर की कंपनी बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा। उन्होंने ‘वेदांता अनलिमिटेड’ विजन पेश करते हुए Produce More, Partner Better और Purpose Beyond Profit यानी 3P रणनीति के जरिए भविष्य का रोडमैप शेयरधारकों के सामने रखा।
नई शुरुआत, अब पांच कंपनियों पर होगा फोकस
नई दिल्ली में आयोजित 61वीं AGM को संबोधित करते हुए अनिल अग्रवाल ने कहा कि वेदांता के डीमर्जर के बाद अब समूह के सामने विकास के कई नए अवसर खुल गए हैं। उन्होंने कहा,
“एक साल पहले आपके पास सिर्फ एक कंपनी थी, लेकिन आज आपके पास पांच बड़े अवसर हैं। मेरा लक्ष्य है कि हर कंपनी 100 बिलियन डॉलर की बने। यह सिर्फ शुरुआत है।”
उनके मुताबिक, डीमर्जर के बाद बनी प्रत्येक कंपनी अपने-अपने सेक्टर में वैश्विक स्तर की अग्रणी कंपनी बनने की क्षमता रखती है।
डीमर्जर के बाद बनीं ये पांच कंपनियां
डीमर्जर के बाद वेदांता समूह का कारोबार पांच स्वतंत्र कंपनियों में विभाजित होगा—
- Vedanta Limited (VEDL)
- Vedanta Aluminium Metal Limited (VAML)
- Vedanta Oil & Gas Limited (VOGL)
- Vedanta Iron & Steel Limited (VISL)
- Vedanta Power Limited (VEDPOWER)
अनिल अग्रवाल ने कहा कि इन सभी कंपनियों का स्वतंत्र रूप से विस्तार होगा और हर कंपनी के पास 100 बिलियन डॉलर के मूल्यांकन तक पहुंचने की क्षमता है।
3P फॉर्मूला से समझाया भविष्य का विजन
AGM के दौरान अनिल अग्रवाल ने वेदांता की नई रणनीति को तीन प्रमुख स्तंभों में समझाया।
1. Produce More (अधिक उत्पादन)
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में कंपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर सबसे अधिक ध्यान देगी।
मुख्य लक्ष्य:
- 2031 तक जिंक और लेड उत्पादन लगभग तीन गुना बढ़ाकर 30 लाख टन करना।
- चांदी का उत्पादन दोगुना कर 1,500 टन तक पहुंचाना।
- दशक के अंत तक कॉपर उत्पादन 10 लाख टन करना।
- FY28 तक फेरोक्रोम क्षमता 5 लाख टन करना।
- निकेल उत्पादन 60,000 टन तक बढ़ाना।
इसके अलावा कंपनी लिथियम, कोबाल्ट, सोना, तांबा, निकेल, मैंगनीज, रेयर अर्थ मिनरल्स और पोटाश सहित 10 महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों में एक्सप्लोरेशन तेज करेगी।
हर कंपनी के लिए अलग ग्रोथ प्लान
अनिल अग्रवाल ने बताया कि डीमर्जर के बाद प्रत्येक कंपनी अपनी अलग रणनीति के साथ आगे बढ़ेगी।
Vedanta Aluminium
- अगले तीन वर्षों में क्षमता बढ़ाकर 60 लाख टन प्रति वर्ष
- दुनिया की सबसे कम लागत वाली एल्युमिनियम उत्पादक कंपनी बनने का लक्ष्य
Vedanta Oil & Gas
- उत्पादन बढ़ाकर 5 लाख बैरल प्रतिदिन
- अगले 3-5 वर्षों में 5 अरब डॉलर का निवेश
Vedanta Iron & Steel
- क्षमता 40 लाख टन से बढ़ाकर 1.5 करोड़ टन प्रतिवर्ष
- ग्रीन स्टील और स्पेशलिटी स्टील पर विशेष फोकस
Vedanta Power
- बिजली उत्पादन क्षमता 20,000 मेगावाट तक बढ़ाने की योजना
- भविष्य में न्यूक्लियर पावर सेक्टर में प्रवेश की तैयारी
Partner Better: तकनीक और AI पर रहेगा जोर
अनिल अग्रवाल ने कहा कि भविष्य की सफलता तकनीक अपनाने वाली कंपनियों की होगी।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उद्योगों को तेजी से बदल रहा है और वेदांता अपने सभी कारोबारों में AI तथा आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा रही है।
उनके अनुसार तकनीक का उपयोग इन क्षेत्रों में बढ़ाया जाएगा—
- खनिज खोज (Exploration)
- उत्पादन संचालन
- सुरक्षा
- उत्पादकता
- पर्यावरणीय स्थिरता
उन्होंने कहा कि कंपनी का उद्देश्य हर स्तर पर अधिक स्मार्ट, तेज और सुरक्षित संचालन करना है।
Purpose Beyond Profit: सिर्फ मुनाफा नहीं, समाज पर भी फोकस
अनिल अग्रवाल ने कहा कि वेदांता का लक्ष्य केवल लाभ कमाना नहीं बल्कि देश के विकास में योगदान देना भी है।
उन्होंने बताया कि—
- FY26 में कंपनी ने भारत सरकार के राजस्व में ₹62,000 करोड़ से अधिक का योगदान दिया।
- पिछले 10 वर्षों में कुल योगदान लगभग ₹5 लाख करोड़ रहा।
‘नंद घर’ पहल का विस्तार
उन्होंने कहा कि वेदांता की सामाजिक पहल ‘नंद घर’ अब 17 राज्यों तक पहुंच चुकी है।
- 15,000 आधुनिक आंगनवाड़ी केंद्र संचालित
- महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा एवं पोषण पर विशेष फोकस
- कंपनी का दावा है कि यह पहल भविष्य में 10 करोड़ लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
FY26 में वेदांता का रिकॉर्ड प्रदर्शन
अनिल अग्रवाल ने वित्त वर्ष 2025-26 को कंपनी के इतिहास का सबसे सफल वर्ष बताया।
मुख्य वित्तीय उपलब्धियां:
- राजस्व: ₹1,74,075 करोड़
- शुद्ध लाभ: ₹25,096 करोड़
- EBITDA: ₹55,976 करोड़
- Net Debt/EBITDA Ratio: 0.95x (पिछली 14 तिमाहियों का सबसे बेहतर स्तर)
भारत के भविष्य पर क्या बोले अनिल अग्रवाल?
AGM में उन्होंने कहा कि आज के समय में प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। उनके अनुसार वेदांता केवल संसाधनों का कारोबार नहीं कर रही, बल्कि भारत के औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भरता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने शेयरधारकों का धन्यवाद देते हुए कहा,
“हमने मिलकर एक मजबूत वेदांता बनाई है। अब हम मिलकर पांच असाधारण कंपनियों का भविष्य बनाएंगे। ‘वेदांता अनलिमिटेड’ इसी सोच का प्रतीक है।”
निष्कर्ष
वेदांता का डीमर्जर भारतीय कॉरपोरेट इतिहास के सबसे बड़े पुनर्गठन में से एक माना जा रहा है। अनिल अग्रवाल का प्रत्येक कंपनी को 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य समूह की दीर्घकालिक महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि नई स्वतंत्र कंपनियां उत्पादन, तकनीक, निवेश और विस्तार की रणनीति के दम पर इस विजन को कितनी तेजी से साकार कर पाती हैं।


