भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक बार फिर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष में देश की आर्थिक विकास दर (GDP Growth Rate) करीब 7% रह सकती है। खास बात यह है कि यह अनुमान RBI के मौजूदा 6.7% के आधिकारिक अनुमान से अधिक है। अगर भारत की ग्रोथ इस स्तर पर रहती है, तो देश दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से बढ़ने वाले देशों में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रख सकता है।
पूनम गुप्ता ने यह टिप्पणी चेन्नई स्थित मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की। उनके मुताबिक, उनका अनुमान अप्रैल-जून तिमाही यानी पहली तिमाही में मजबूत आर्थिक प्रदर्शन की उम्मीद पर आधारित है। इस तिमाही के आधिकारिक GDP आंकड़े अगस्त के अंत में जारी किए जाने हैं।
अर्थशास्त्रियों के मौजूदा अनुमानों पर नजर डालें तो पहली तिमाही की GDP Growth करीब 6.9% से 8% के बीच रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। अगर तिमाही में आर्थिक गतिविधियां उम्मीद के मुताबिक मजबूत रहती हैं, तो पूरे वित्त वर्ष की ग्रोथ करीब 7% तक पहुंच सकती है।
RBI के 6.7% अनुमान से ज्यादा हो सकती है GDP Growth
पूनम गुप्ता का बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह RBI के मौजूदा आर्थिक विकास अनुमान से अधिक ग्रोथ की संभावना की ओर इशारा करता है। केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए 6.7% GDP Growth का अनुमान लगाया है। वहीं, डिप्टी गवर्नर का करीब 7% का अनुमान बताता है कि अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति उम्मीद से बेहतर रह सकती है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर पिछले कुछ समय में कई तरह के दबाव देखने को मिले हैं। कमजोर मॉनसून की आशंका, ऊर्जा की ऊंची लागत और वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताओं के बावजूद घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है।
खपत, निवेश और विभिन्न आर्थिक गतिविधियों में मजबूती GDP Growth को सहारा दे सकती है। यही वजह है कि आने वाली पहली तिमाही के आंकड़ों पर बाजार और अर्थशास्त्रियों की नजर बनी हुई है।
चुनौतियों के बावजूद अर्थव्यवस्था की रफ्तार बरकरार
भारत की GDP Growth को लेकर पूनम गुप्ता का बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है। ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव का असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा है।
इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में अपेक्षाकृत मजबूत रफ्तार दिखाई दे रही है। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियां बाहरी झटकों का सामना करने में सक्षम हैं।
पूनम गुप्ता ने आर्थिक विकास को लेकर और भी आशावादी रुख दिखाते हुए कहा कि मौजूदा झटकों के बावजूद भारत को आगे 7.5% की ग्रोथ का लक्ष्य रखना चाहिए और इससे बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करनी चाहिए।
उनका यह बयान केवल मौजूदा वित्त वर्ष की ग्रोथ तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की लंबी अवधि की आर्थिक क्षमता को भी रेखांकित करता है।
ब्याज दरों को लेकर भी पूनम गुप्ता का रुख अहम
पूनम गुप्ता का आर्थिक विकास को लेकर यह बयान RBI की हालिया मौद्रिक नीति बैठक के मिनट्स के बाद आया है। बैठक के विवरण से संकेत मिला था कि उन्होंने इस साल के अंत में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना पर विचार किया था।
यह रुख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सामान्य तौर पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, अगर अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहती है और महंगाई से जुड़े जोखिम बढ़ते हैं, तो केंद्रीय बैंक के लिए मौद्रिक नीति को सख्त करने की गुंजाइश बन सकती है।
इसलिए आने वाले महीनों में GDP Growth, महंगाई, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर RBI की नजर अहम रहेगी।
भारत के बाहरी खातों को लेकर भी भरोसा
डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने भारत के बाहरी खातों यानी External Accounts को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए हैं। उनका मानना है कि आने वाले समय में देश की बाहरी वित्तीय स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है।
अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि मौजूदा वित्त वर्ष में भारत का Balance of Payments यानी भुगतान संतुलन सकारात्मक रह सकता है। यह अनुमान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देश के बाहरी क्षेत्र को लेकर पहले घाटे की आशंका जताई गई थी।
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और बाहरी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें विदेशी मुद्रा जमा को आकर्षित करने के लिए दिए गए विशेष प्रोत्साहन भी शामिल हैं।
इन उपायों के चलते देश में करीब 80 अरब डॉलर तक विदेशी फंड आने की उम्मीद जताई जा रही है। अगर इतनी बड़ी मात्रा में विदेशी पूंजी आती है, तो इससे देश के बाहरी खाते को मजबूती मिल सकती है और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
विदेशी फंड की आमद से रुपये को भी मिल सकता है सहारा
भारत में विदेशी पूंजी की मजबूत आमद का असर केवल Balance of Payments पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि रुपये की स्थिरता के लिए भी यह महत्वपूर्ण हो सकता है।
जब देश में पर्याप्त विदेशी मुद्रा आती है, तो डॉलर की मांग और उपलब्धता के बीच संतुलन बेहतर हो सकता है। इससे रुपये पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, रुपये की दिशा पर कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक ब्याज दरें, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों के फैसले जैसे कई अन्य कारक भी असर डालते हैं।
ऐसे में आने वाले महीनों में भारत के बाहरी खाते और विदेशी पूंजी प्रवाह की स्थिति पर निवेशकों की नजर बनी रह सकती है।
2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के लिए 8% से ज्यादा ग्रोथ जरूरी
भारत सरकार ने 2047 तक देश को विकसित अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए लंबे समय तक तेज आर्थिक विकास की जरूरत होगी।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत को अगले कई वर्षों तक लगातार करीब 8% या उससे अधिक की आर्थिक विकास दर बनाए रखने की आवश्यकता पड़ सकती है। इसका मतलब है कि मौजूदा 6-7% की ग्रोथ को आगे चलकर और बढ़ाना होगा।
तेज GDP Growth के लिए केवल घरेलू खपत पर्याप्त नहीं होगी। इसके साथ मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सपोर्ट, प्राइवेट निवेश, रोजगार और उत्पादकता में भी लगातार सुधार जरूरी होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल में 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के लक्ष्य को दोहराया है। ऐसे में GDP Growth को लेकर RBI की डिप्टी गवर्नर का सकारात्मक अनुमान अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
पहली तिमाही के GDP आंकड़ों पर रहेगी नजर
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अप्रैल-जून तिमाही में भारत की GDP वास्तव में कितनी तेजी से बढ़ती है। आधिकारिक आंकड़े अगस्त के अंत में जारी होने हैं और इन्हीं से यह स्पष्ट होगा कि आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार अनुमान के मुताबिक रही या नहीं।
अगर पहली तिमाही की ग्रोथ 7% या उससे ऊपर रहती है, तो पूरे वित्त वर्ष के लिए भी मजबूत GDP Growth की उम्मीद बढ़ सकती है। वहीं, बेहतर घरेलू मांग और विदेशी पूंजी प्रवाह से भारत की आर्थिक स्थिति को अतिरिक्त सहारा मिल सकता है।
फिलहाल पूनम गुप्ता के बयान से यह संकेत जरूर मिलता है कि RBI के 6.7% अनुमान के मुकाबले भारत की आर्थिक विकास दर बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। हालांकि, पूरे साल की अंतिम ग्रोथ कई घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।


