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RBI FCNR(B) Swap Scheme: जिस आइडिया को रघुराम राजन ने बताया था ‘बेवकूफी भरा’, वही अब भारत में ला सकता है अरबों डॉलर! समझिए पूरा खेल

Namam Sharma
Last updated: 2026/06/28 at 7:22 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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10 Min Read
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नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए एक बार फिर FCNR(B) स्वैप स्कीम का सहारा लिया है। दिलचस्प बात यह है कि यह वही योजना है जिसे कभी RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने शुरुआती दौर में “बेवकूफी भरा आइडिया” बताया था। हालांकि बाद में यही योजना भारत के लिए संकटमोचक साबित हुई और देश में अरबों डॉलर का विदेशी निवेश लाने में सफल रही।

Contents
Highlightsक्या है FCNR(B) डिपॉजिट स्कीम?रघुराम राजन को क्यों लगा था यह आइडिया ‘बेवकूफी भरा’?2013 में कैसे बदल गई थी भारत की तस्वीर?इस बार RBI ने क्या नया किया है?NRI निवेशकों को क्या फायदा होगा?भारतीय अर्थव्यवस्था को कैसे मिलेगा फायदा?मजबूत रुपया क्यों है इतना महत्वपूर्ण?क्या इस बार भी दोहराया जाएगा 2013 वाला चमत्कार?निष्कर्ष

Highlights

  • RBI ने FCNR(B) स्वैप स्कीम को फिर से शुरू किया है।
  • 2013 में इसी स्कीम से भारत में करीब 26 अरब डॉलर का विदेशी फंड आया था।
  • अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस बार 50 से 100 अरब डॉलर तक का निवेश आकर्षित हो सकता है।
  • मजबूत रुपया, कम आयात बिल और बेहतर विदेशी मुद्रा भंडार जैसे फायदे मिल सकते हैं।

अब लगभग 13 साल बाद RBI ने फिर इसी रणनीति को अपनाया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह कदम एक बार फिर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर साबित होगा? क्या इससे रुपया मजबूत होगा और विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ा इजाफा होगा? आइए पूरी कहानी विस्तार से समझते हैं।

क्या है FCNR(B) डिपॉजिट स्कीम?

FCNR(B) यानी Foreign Currency Non-Resident (Bank) Deposit एक विशेष प्रकार का बैंक डिपॉजिट है, जिसे विदेश में रहने वाले भारतीय (NRI) और भारतीय मूल के विदेशी नागरिक खोल सकते हैं।

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि निवेशकों को अपनी विदेशी मुद्रा को भारतीय रुपये में बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। वे डॉलर, पाउंड, यूरो या अन्य प्रमुख विदेशी मुद्राओं में ही अपना पैसा जमा रख सकते हैं।

इससे दो फायदे होते हैं। पहला, निवेशक को मुद्रा विनिमय जोखिम से बचाव मिलता है। दूसरा, भारतीय बैंकों को विदेशी मुद्रा में फंड उपलब्ध हो जाता है, जिसे वे विभिन्न आर्थिक जरूरतों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

रघुराम राजन को क्यों लगा था यह आइडिया ‘बेवकूफी भरा’?

रघुराम राजन ने अपने कार्यकाल के अंत में एक कार्यक्रम के दौरान बताया था कि 2013 में जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों को लेकर वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल थी, तब भारत में विदेशी पूंजी लाने के लिए कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा था।

उन्हीं विकल्पों में FCNR(B) स्वैप स्कीम भी शामिल थी।

राजन को चिंता थी कि यदि RBI विदेशी मुद्रा जोखिम का खर्च खुद उठाएगा तो भविष्य में केंद्रीय बैंक को भारी नुकसान हो सकता है। बैंकिंग क्षेत्र से आए इस सुझाव को उन्होंने शुरू में जोखिम भरा और अव्यावहारिक माना था।

हालांकि आर्थिक हालात ऐसे थे कि भारत को तत्काल विदेशी पूंजी की जरूरत थी। इसलिए अंततः इस योजना को लागू किया गया और इसके नतीजे उम्मीद से कहीं बेहतर निकले।

2013 में कैसे बदल गई थी भारत की तस्वीर?

साल 2013 भारत के लिए आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण समय था। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा बॉन्ड खरीद कार्यक्रम कम करने के संकेतों के बाद कई उभरते बाजारों से विदेशी निवेश निकलने लगा था।

भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। रुपया तेजी से कमजोर हो रहा था और विदेशी निवेशकों का भरोसा डगमगा रहा था।

इसी दौरान RBI ने FCNR(B) स्वैप स्कीम शुरू की। इसके तहत बैंकों को विशेष सुविधा दी गई, जिससे वे विदेशों में रहने वाले भारतीयों से आकर्षक ब्याज दरों पर विदेशी मुद्रा जुटा सकें।

परिणाम बेहद सकारात्मक रहे। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार इस योजना से लगभग 26 अरब डॉलर का विदेशी फंड भारत आया। उस समय यह राशि देश की GDP के करीब 1.4 फीसदी के बराबर थी।

इस फंड ने न केवल रुपये को स्थिर करने में मदद की बल्कि निवेशकों के बीच भारत की साख भी मजबूत की।

इस बार RBI ने क्या नया किया है?

2026 में शुरू की गई नई FCNR(B) स्वैप व्यवस्था पहले से ज्यादा आकर्षक मानी जा रही है।

2013 में RBI ने बैंकों को 3.5 प्रतिशत की स्वैप सुविधा दी थी। लेकिन इस बार 30 सितंबर तक जुटाए जाने वाले 3 से 5 साल की अवधि वाले नए FCNR(B) डिपॉजिट पर मुद्रा विनिमय जोखिम का पूरा भार RBI स्वयं उठाने को तैयार है।

इससे बैंकों के लिए विदेशी जमा जुटाना आसान होगा और वे NRI निवेशकों को अधिक प्रतिस्पर्धी ब्याज दरें ऑफर कर सकेंगे।

ICICI Securities Primary Dealership के अर्थशास्त्री ए. प्रसन्ना और उनकी टीम का अनुमान है कि केवल इस स्कीम के जरिए लगभग 50 अरब डॉलर तक का फंड जुटाया जा सकता है। वहीं RBI और सरकार के अन्य कदमों को जोड़ दें तो अगले 12 से 24 महीनों में करीब 100 अरब डॉलर तक की विदेशी पूंजी भारत आ सकती है।

NRI निवेशकों को क्या फायदा होगा?

FCNR(B) स्कीम की सबसे बड़ी ताकत इसकी आकर्षक रिटर्न क्षमता है।

वर्तमान में 3 साल की FCNR(B) दर लगभग 3.35 प्रतिशत है। वहीं बाजार में हेजिंग लागत और अन्य कारकों को जोड़ने के बाद बैंक 5.5 प्रतिशत या उससे अधिक की प्रभावी रिटर्न देने की स्थिति में आ सकते हैं।

तुलना करें तो समान अवधि के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड लगभग 4 प्रतिशत के आसपास है। ऐसे में भारतीय बैंक NRI निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प बन सकते हैं।

यही कारण है कि विशेषज्ञों को उम्मीद है कि बड़ी संख्या में विदेशी भारतीय इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था को कैसे मिलेगा फायदा?

विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ने से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी। इससे रुपया स्थिर रह सकता है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की वित्तीय स्थिति मजबूत दिखाई देगी।

इसके अलावा विदेशी पूंजी आने से सरकार और निजी क्षेत्र दोनों के लिए फंडिंग आसान हो सकती है। विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ने से बॉन्ड और इक्विटी बाजारों को भी समर्थन मिलेगा।

यदि अनुमानित स्तर पर डॉलर भारत आते हैं तो देश के बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (BoP) की स्थिति भी मजबूत हो सकती है।

मजबूत रुपया क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

रघुराम राजन ने एक बार कहा था कि यदि रुपया केवल 3-4 रुपये तक मजबूत हो जाए या स्थिर बना रहे तो भारत को आयात बिल में भारी बचत हो सकती है।

आज भारत का वार्षिक आयात बिल लगभग 775 अरब डॉलर के आसपास पहुंच चुका है। ऐसे में रुपये की मामूली मजबूती भी देश के लिए हजारों करोड़ रुपये की बचत का कारण बन सकती है।

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। मजबूत रुपया होने पर तेल आयात सस्ता पड़ता है, जिससे पेट्रोल-डीजल की लागत और महंगाई पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।

क्या इस बार भी दोहराया जाएगा 2013 वाला चमत्कार?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आज भारत की स्थिति 2013 की तुलना में कहीं अधिक मजबूत है। विदेशी मुद्रा भंडार बड़ा है, बैंकिंग प्रणाली मजबूत है और भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।

इसके बावजूद वैश्विक अनिश्चितताओं, डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेश के उतार-चढ़ाव को देखते हुए RBI अतिरिक्त सुरक्षा कवच तैयार करना चाहता है।

यही वजह है कि FCNR(B) स्वैप स्कीम को फिर से सक्रिय किया गया है। यदि यह योजना 2013 जैसी सफलता दोहराने में कामयाब रहती है तो भारत को आने वाले वर्षों में विदेशी मुद्रा, निवेश और आर्थिक स्थिरता के मोर्चे पर बड़ा फायदा मिल सकता है।

निष्कर्ष

जिस FCNR(B) स्वैप स्कीम को कभी रघुराम राजन ने जोखिम भरा और “बेवकूफी भरा” विचार माना था, वही योजना बाद में भारत के लिए बेहद सफल साबित हुई। अब RBI ने बदलते वैश्विक हालात में एक बार फिर इसी हथियार को इस्तेमाल किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि NRI निवेशकों से उम्मीद के मुताबिक फंड जुटता है तो भारत में 50 से 100 अरब डॉलर तक की विदेशी पूंजी आ सकती है। इससे रुपया मजबूत होगा, विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिल सकती है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या FCNR(B) स्कीम एक बार फिर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर साबित होती है।

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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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