LNG की बढ़ती कीमतें भारत के लिए क्यों चिंता का विषय हैं?
नई दिल्ली: देश में महंगाई को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ सकती है। इसकी वजह खाद्य पदार्थ या कच्चा तेल नहीं, बल्कि तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) है। वैश्विक निवेश बैंक Morgan Stanley की ताजा रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि एशिया और यूरोप में मांग बढ़ने के कारण LNG की कीमतें आने वाले महीनों में तीन साल के उच्चतम स्तर तक पहुंच सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो इसका सीधा असर भारत जैसे बड़े आयातक देश पर पड़ेगा, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित गैस से पूरा करता है।
रिपोर्ट के अनुसार एशियाई LNG बेंचमार्क कीमत वर्ष 2026 की तीसरी और चौथी तिमाही में बढ़कर 25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तक पहुंच सकती है। यह मौजूदा फॉरवर्ड मार्केट स्तरों से 30 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी होगी। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि LNG की कीमतों में यह उछाल केवल गैस सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिजली, उर्वरक, सीएनजी, पीएनजी और कई औद्योगिक उत्पादों की लागत को भी प्रभावित कर सकता है।
साल 2023 की शुरुआत में भी दुनिया ने ऐसा दौर देखा था, जब रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद यूरोपीय देशों ने पाइपलाइन गैस की कमी को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर LNG खरीदी थी। उस समय वैश्विक बाजार में गैस की कीमतों में भारी उछाल आया था। अब एक बार फिर ऐसा ही परिदृश्य बनता दिखाई दे रहा है।
एशिया में भारत और चीन की गैस खपत लगातार बढ़ रही है। दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं तेजी से विस्तार कर रही हैं और उद्योगों को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता है। दूसरी ओर यूरोप सर्दियों से पहले अपने गैस भंडार भरने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट बताती है कि यूरोप के गैस स्टोरेज स्तर पिछले साल की तुलना में करीब 17 प्रतिशत और 10 वर्षीय औसत से लगभग 25 प्रतिशत कम हैं। ऐसे में यूरोपीय खरीदार वैश्विक बाजार से अतिरिक्त LNG खरीदने को मजबूर हो सकते हैं।
मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव भी LNG बाजार को प्रभावित कर रहा है। खासकर Strait of Hormuz के आसपास किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक आपूर्ति पर असर डाल सकती है। कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख LNG निर्यातक देशों के लिए यह समुद्री मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। यदि इस क्षेत्र में आपूर्ति प्रभावित होती है तो कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि प्राकृतिक गैस का उपयोग अब केवल उद्योगों तक सीमित नहीं है। देश में गैस आधारित बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण, रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल उद्योग और शहरी गैस वितरण नेटवर्क तेजी से बढ़ रहे हैं। दिल्ली, मुंबई, नोएडा, गुरुग्राम, अहमदाबाद और कई अन्य शहरों में लाखों घर PNG के जरिए खाना बनाते हैं, जबकि लाखों वाहन CNG पर चलते हैं।
यदि आयातित LNG महंगी होती है तो गैस विपणन कंपनियों की लागत बढ़ेगी। हालांकि सरकार और नियामक एजेंसियां कीमतों में बढ़ोतरी को नियंत्रित करने की कोशिश कर सकती हैं, लेकिन लंबे समय तक ऊंची वैश्विक कीमतें बनी रहने पर इसका कुछ न कुछ असर उपभोक्ताओं तक पहुंचना लगभग तय माना जाता है।
उर्वरक क्षेत्र पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। भारत दुनिया के सबसे बड़े यूरिया उत्पादकों और उपभोक्ताओं में शामिल है। यूरिया उत्पादन में प्राकृतिक गैस प्रमुख कच्चा माल है। LNG महंगी होने पर उर्वरक उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जिससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ेगा।
बिजली क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहेगा। जब सौर और पवन ऊर्जा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होती, तब गैस आधारित पावर प्लांट ग्रिड को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गैस महंगी होने से बिजली उत्पादन लागत में बढ़ोतरी हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जून और जुलाई में एशिया के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने की संभावना है। इससे एयर कंडीशनर और कूलिंग सिस्टम की मांग बढ़ेगी, जिसके कारण गैस आधारित बिजली की खपत भी बढ़ सकती है। यही कारण है कि LNG बाजार में मांग और कीमत दोनों के मजबूत बने रहने की संभावना जताई जा रही है।
भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। सरकार का उद्देश्य गैस की हिस्सेदारी को लगभग 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत तक ले जाना है। लेकिन यदि वैश्विक LNG कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं तो इस लक्ष्य को हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है?
- PNG और CNG की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
- गैस आधारित बिजली उत्पादन महंगा हो सकता है।
- उर्वरक उद्योग की लागत बढ़ने से सरकारी सब्सिडी बोझ बढ़ सकता है।
- कई उद्योगों के उत्पादन खर्च बढ़ने से महंगाई पर असर पड़ सकता है।
- पेट्रोकेमिकल और प्लास्टिक उद्योग की लागत बढ़ सकती है।
FAQ
Q. LNG क्या है?
LNG यानी Liquefied Natural Gas, प्राकृतिक गैस का तरल रूप है जिसे आसान परिवहन के लिए अत्यंत कम तापमान पर रखा जाता है।
Q. भारत LNG का आयात क्यों करता है?
देश की कुल गैस मांग का एक बड़ा हिस्सा घरेलू उत्पादन से पूरा नहीं हो पाता, इसलिए भारत LNG आयात करता है।
Q. LNG महंगी होने से सबसे ज्यादा असर किस सेक्टर पर पड़ेगा?
उर्वरक, बिजली उत्पादन, पेट्रोकेमिकल, CNG और PNG सेक्टर पर।
Q. क्या CNG और PNG तुरंत महंगी हो जाएंगी?
जरूरी नहीं। कीमतों में बदलाव कंपनियों की लागत, सरकारी नीति और गैस आवंटन व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
निष्कर्ष
वैश्विक LNG बाजार में बन रहे हालात भारत के लिए एक नई चुनौती बन सकते हैं। एशिया और यूरोप की बढ़ती मांग, मध्य पूर्व की अनिश्चितता और घटते गैस भंडार आने वाले महीनों में LNG कीमतों को ऊंचा रख सकते हैं। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो इसका असर केवल ऊर्जा कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिजली, उर्वरक, परिवहन और घरेलू गैस उपभोक्ताओं तक महसूस किया जा सकता है। इसलिए आने वाले महीनों में वैश्विक गैस बाजार की गतिविधियों पर भारत की नजर बनी रहना तय है।


