भारत में सोना केवल एक आभूषण नहीं बल्कि निवेश और पारिवारिक परंपरा का भी हिस्सा है। शादी-ब्याह, त्योहार या किसी शुभ अवसर पर सोना खरीदना लगभग हर परिवार की प्राथमिकता होती है। यही वजह है कि अधिकतर लोग अपने भरोसेमंद लोकल ज्वेलर्स से ही वर्षों से खरीदारी करते आ रहे हैं। कई जगह तो परिवारों का ज्वेलर्स के साथ उधार का भी संबंध होता है, जहां गहने पहले मिल जाते हैं और भुगतान बाद में किया जाता है।
लेकिन इसी भरोसे का फायदा उठाकर कुछ बेईमान ज्वेलर्स ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी भी कर देते हैं। कई बार ग्राहक को पता भी नहीं चलता कि उसने जिस कीमत पर सोना खरीदा है, वास्तव में उसकी गुणवत्ता या शुद्धता उतनी नहीं है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि सोना खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें और गोल्ड स्कैम से खुद को कैसे बचाएं।
कैसे होता है गोल्ड स्कैम?
सोने की खरीदारी में होने वाली धोखाधड़ी कई तरह की हो सकती है। अक्सर ग्राहक केवल डिजाइन देखकर खरीदारी कर लेते हैं और तकनीकी बातों पर ध्यान नहीं देते। इसी का फायदा कुछ दुकानदार उठा लेते हैं।
1. 24 कैरेट की कीमत लेकर 22 या 18 कैरेट का सोना देना
कई ग्राहकों को कैरेट का सही मतलब नहीं पता होता। कुछ दुकानदार 24 कैरेट सोने का भाव बताकर 22 कैरेट या 18 कैरेट की ज्वेलरी बेच देते हैं।
ध्यान रखें कि:
- 24 कैरेट सोना सबसे शुद्ध माना जाता है, लेकिन इससे सामान्य गहने नहीं बनाए जाते।
- अधिकांश गोल्ड ज्वेलरी 22 कैरेट में बनाई जाती है।
- 18 कैरेट ज्वेलरी की कीमत 22 कैरेट से कम होती है।
यदि बिल और ज्वेलरी की कैरेट वैल्यू अलग-अलग हो तो ग्राहक को सीधा आर्थिक नुकसान हो सकता है।
2. सोने में मिलावट
कुछ मामलों में सोने में अन्य धातुओं की मात्रा जरूरत से ज्यादा मिला दी जाती है। बाहर से देखने पर गहना बिल्कुल असली लगता है, लेकिन उसकी वास्तविक शुद्धता कम होती है। ग्राहक को इसका पता अक्सर तब चलता है जब वह गहना बेचने या एक्सचेंज कराने जाता है।
3. मेकिंग चार्ज में खेल
कुछ दुकानदार सोने की कीमत कम बताकर मेकिंग चार्ज बहुत अधिक जोड़ देते हैं। कई बार ग्राहक कुल बिल देखकर भुगतान कर देता है लेकिन यह नहीं समझ पाता कि वास्तविक सोने की कीमत कितनी थी और मेकिंग चार्ज कितना लगाया गया।
4. वजन में गड़बड़ी
कुछ मामलों में बिल में लिखा गया वजन और वास्तविक वजन अलग हो सकता है। यदि ग्राहक मौके पर दोबारा वजन नहीं करवाता तो नुकसान हो सकता है।
5. बिना हॉलमार्क वाली ज्वेलरी बेचना
आज भी कई छोटी दुकानों पर बिना BIS हॉलमार्क वाली ज्वेलरी बेची जाती है। ऐसी स्थिति में सोने की शुद्धता की कोई आधिकारिक गारंटी नहीं होती।
आखिर लोकल ज्वेलर्स कैसे कमाते हैं ज्यादा मुनाफा?
कई छोटे ज्वेलर्स ग्राहकों को उधार पर सोना देते हैं, जिससे उनका विश्वास बढ़ता है। लेकिन कुछ मामलों में वे:
- कम शुद्धता वाला सोना बेच देते हैं।
- वास्तविक कीमत से अधिक वसूली करते हैं।
- मेकिंग चार्ज बढ़ाकर जोड़ देते हैं।
- कैरेट की जानकारी स्पष्ट नहीं देते।
इस तरह ग्राहक को बिना जानकारी के अधिक भुगतान करना पड़ सकता है।
सोना खरीदते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान
यदि आप पहली बार या नियमित रूप से सोना खरीदते हैं, तो इन बातों का पालन जरूर करें।
1. हमेशा BIS Hallmark देखें
सोने की ज्वेलरी पर BIS Hallmark होना चाहिए। यही उसकी शुद्धता का सबसे महत्वपूर्ण प्रमाण है।
2. HUID नंबर जरूर जांचें
हर हॉलमार्क ज्वेलरी पर HUID (Hallmark Unique Identification Number) अंकित होता है। इस नंबर को BIS Care App में दर्ज करके ज्वेलरी की जानकारी सत्यापित की जा सकती है।
3. अलग-अलग कैरेट का भाव पूछें
खरीदारी से पहले 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने का उस दिन का बाजार भाव जान लें। इससे दुकानदार द्वारा बताई गई कीमत की तुलना करना आसान होगा।
4. बिल हमेशा लें
बिना बिल के सोना कभी न खरीदें। बिल में निम्न जानकारी अवश्य होनी चाहिए:
- सोने का वजन
- कैरेट
- प्रति ग्राम कीमत
- मेकिंग चार्ज
- GST
- कुल भुगतान
5. मेकिंग चार्ज समझें
मेकिंग चार्ज फिक्स है या प्रतिशत के हिसाब से लगाया गया है, यह पहले ही पूछ लें। जरूरत पड़े तो दूसरी दुकान से भी तुलना करें।
6. वजन दोबारा जांचें
यदि संभव हो तो खरीदारी से पहले इलेक्ट्रॉनिक मशीन पर गहने का वजन दोबारा चेक कर लें।
डिजिटल युग में खुद करें जांच
आज लगभग हर जानकारी आपके मोबाइल पर उपलब्ध है। सोना खरीदने से पहले:
- उस दिन का गोल्ड रेट ऑनलाइन देखें।
- BIS Care App पर HUID नंबर सत्यापित करें।
- बिल में लिखी कीमत और वजन का मिलान करें।
- कुल राशि का कैलकुलेशन स्वयं करें।
थोड़ी सी सावधानी आपको हजारों रुपये के नुकसान से बचा सकती है।
निष्कर्ष
लोकल ज्वेलर्स से खरीदारी करना गलत नहीं है, लेकिन केवल वर्षों पुराने भरोसे के आधार पर बिना जांच-पड़ताल के सोना खरीदना जोखिम भरा हो सकता है। हमेशा BIS हॉलमार्क, HUID नंबर, सही कैरेट, वजन और बिल की जांच करें। यदि दुकानदार कीमत, शुद्धता या मेकिंग चार्ज की स्पष्ट जानकारी देने से बचता है, तो ऐसी स्थिति में खरीदारी करने से पहले दोबारा सोचें। जागरूक ग्राहक ही गोल्ड स्कैम से सुरक्षित रह सकता है।


