Rare Earth Magnet Scheme: भारत में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की ₹7,280 करोड़ की योजना को कंपनियों की ओर से शानदार प्रतिक्रिया मिली है। इस योजना के लिए Larsen & Toubro (L&T), Coal India, ReNew, Attero Recycling और Lohum Magnets & Energy Solutions समेत कुल 20 कंपनियों ने बोली लगाई है। सरकार का मकसद देश में रेयर अर्थ मैग्नेट की पूरी सप्लाई चेन तैयार करना और चीन पर निर्भरता को कम करना है।
भारी उद्योग मंत्रालय के मुताबिक, इस योजना के तहत कंपनियों से आवेदन मांगे गए थे और 12 अगस्त 2026 आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख थी। इसके बाद 13 अगस्त को तकनीकी बोलियां खोली गईं। अब सरकार इन आवेदनों का तकनीकी मूल्यांकन करेगी और योजना के तहत कुल 5 कंपनियों का चयन किया जाएगा।
20 कंपनियां दौड़ में, विदेशी कंपनियों ने भी लिया हिस्सा
₹7,280 करोड़ की इस महत्वाकांक्षी योजना में भारतीय कंपनियों के साथ विदेशी कंपनियों की भारतीय इकाइयों ने भी रुचि दिखाई है। बोली लगाने वाली कंपनियों में L&T और Coal India जैसे बड़े कॉरपोरेट नाम शामिल हैं।
इसके अलावा ReNew, Attero Recycling और Lohum Magnets & Energy Solutions भी इस योजना में शामिल हुए हैं। विदेशी भागीदारी की बात करें तो NEO Performance Materials (Singapore) और जापान की Proterial की भारतीय इकाई Proterial India ने भी बोली लगाई है।
अन्य बोलीदाताओं में 20 Microns, N.A.N. Magnetech, PrNd Metal and Magnets, Prozeal Green Energy और Ramp Metals & Minerals जैसी कंपनियां शामिल हैं। यानी सरकार की इस योजना में पारंपरिक औद्योगिक कंपनियों के साथ-साथ रीसाइक्लिंग, ग्रीन एनर्जी और मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों ने भी दिलचस्पी दिखाई है।
अब सिर्फ 5 कंपनियों का होगा चयन
सरकार ने इस योजना के तहत देश में हर साल 6,000 मीट्रिक टन सिंटर्ड NdFeB रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट बनाने की क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है।
यह क्षमता कुल 5 कंपनियों के बीच बांटी जाएगी। प्रत्येक चयनित कंपनी को अधिकतम 1,200 मीट्रिक टन सालाना उत्पादन क्षमता दी जा सकती है। इसका मतलब है कि सरकार कुछ चुनिंदा कंपनियों के जरिए बड़े पैमाने पर घरेलू मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करना चाहती है।
तकनीकी बोलियों के मूल्यांकन के बाद योग्य कंपनियों का चयन किया जाएगा। इसके बाद उत्पादन क्षमता विकसित करने और प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
7 साल की होगी योजना
केंद्रीय कैबिनेट ने नवंबर 2025 में इस योजना को मंजूरी दी थी। योजना की कुल अवधि 7 साल रखी गई है।
इसके शुरुआती 2 साल फैक्ट्री और उत्पादन क्षमता स्थापित करने के लिए होंगे। इसके बाद अगले 5 साल तक बिक्री से जुड़े इंसेंटिव दिए जाएंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य कंपनियों को केवल प्लांट लगाने तक सीमित रखने के बजाय वास्तविक उत्पादन और बिक्री बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
सरकार चाहती है कि भारत में रेयर अर्थ मैग्नेट का उत्पादन केवल कागजों पर न रहे, बल्कि देश में एक प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री तैयार हो।
Rare Earth Magnet क्या है और इतना जरूरी क्यों?
रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट बेहद शक्तिशाली स्थायी चुंबक होते हैं। इनमें Neodymium-Iron-Boron यानी NdFeB मैग्नेट सबसे महत्वपूर्ण प्रकारों में से एक हैं। छोटे आकार में अधिक चुंबकीय शक्ति देने की वजह से इनका इस्तेमाल आधुनिक तकनीक और हाई-टेक इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
इन मैग्नेट का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक व्हीकल, विंड टरबाइन, हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स, एयरोस्पेस और डिफेंस सिस्टम जैसे क्षेत्रों में होता है।
उदाहरण के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटर में मजबूत और हल्के मैग्नेट की जरूरत होती है। इसी तरह विंड टरबाइन में भी बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाले जनरेटर में इनका महत्व है। रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर में भी छोटे आकार और उच्च क्षमता वाले सिस्टम के लिए ऐसे मैग्नेट बेहद उपयोगी हैं।
यही वजह है कि रेयर अर्थ मैग्नेट को भविष्य की रणनीतिक और औद्योगिक जरूरतों से जोड़कर देखा जा रहा है।
सरकार भारत में पूरी वैल्यू चेन बनाना चाहती है
इस योजना का एक बड़ा लक्ष्य केवल तैयार मैग्नेट बनाना नहीं है। सरकार NdPr ऑक्साइड से लेकर तैयार सिंटर्ड NdFeB मैग्नेट तक पूरी वैल्यू चेन को भारत में विकसित करना चाहती है।
अगर किसी देश के पास कच्चे माल से लेकर प्रोसेसिंग और अंतिम उत्पाद तक पूरी सप्लाई चेन मौजूद हो, तो वैश्विक बाजार में सप्लाई बाधित होने की स्थिति में उस पर बाहरी देशों का असर कम पड़ता है।
भारत में रेयर अर्थ संसाधन मौजूद होने के बावजूद इनके खनन, प्रोसेसिंग और मैग्नेट निर्माण की पूरी औद्योगिक क्षमता अभी उस स्तर पर नहीं है, जिसकी जरूरत तेजी से बढ़ते EV, रिन्यूएबल एनर्जी और हाई-टेक सेक्टर को है।
सरकार इसी कमी को दूर करने के लिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है।
चीन पर निर्भरता घटाना क्यों जरूरी?
रेयर अर्थ और उनसे बनने वाले मैग्नेट के वैश्विक कारोबार में चीन की भूमिका काफी बड़ी है। चीन में रेयर अर्थ की माइनिंग के साथ-साथ उनकी प्रोसेसिंग और मैग्नेट निर्माण की मजबूत इंडस्ट्री मौजूद है।
भारत जैसे देशों के लिए यह निर्भरता रणनीतिक चुनौती बन सकती है। खासकर तब, जब किसी भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक प्रतिबंध या एक्सपोर्ट कंट्रोल के कारण सप्लाई प्रभावित हो जाए।
2025 में चीन की ओर से रेयर अर्थ और उनसे जुड़े उत्पादों के एक्सपोर्ट पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद वैश्विक सप्लाई चेन में चिंता बढ़ी थी। इसका असर उन उद्योगों पर पड़ सकता है जो इलेक्ट्रिक मोटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी और दूसरे हाई-टेक उपकरणों के लिए इन मैग्नेट पर निर्भर हैं।
ऐसे माहौल में भारत के लिए घरेलू उत्पादन क्षमता विकसित करना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है।
EV और ग्रीन एनर्जी सेक्टर को मिल सकता है फायदा
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों और रिन्यूएबल एनर्जी की मांग लगातार बढ़ रही है। EV की मोटर और विंड टरबाइन जैसे उपकरणों में रेयर अर्थ मैग्नेट की अहम भूमिका है।
अगर देश में ही इन मैग्नेट का पर्याप्त उत्पादन शुरू होता है तो कंपनियों को आयात पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। इससे सप्लाई चेन को अधिक स्थिर बनाने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा घरेलू उत्पादन बढ़ने से भारत में मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े नए उद्योग, सप्लायर और रोजगार के अवसर भी विकसित हो सकते हैं। लंबे समय में इससे भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रिन्यूएबल एनर्जी और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूती मिल सकती है।
योजना से भारत को क्या रणनीतिक फायदा होगा?
₹7,280 करोड़ की Rare Earth Magnet Scheme को केवल एक मैन्युफैक्चरिंग योजना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसका संबंध भारत की एनर्जी सिक्योरिटी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डिफेंस और रणनीतिक सप्लाई चेन से भी है।
सरकार यदि 6,000 मीट्रिक टन सालाना उत्पादन क्षमता का लक्ष्य हासिल कर लेती है, तो इससे देश में रेयर अर्थ मैग्नेट के लिए घरेलू सप्लाई का आधार मजबूत होगा।
साथ ही, भारत वैश्विक कंपनियों के लिए रेयर अर्थ मैग्नेट और इससे जुड़े उत्पादों का वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में भी आगे बढ़ सकता है।
फिलहाल 20 कंपनियों की बोली के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण तकनीकी मूल्यांकन और 5 कंपनियों के अंतिम चयन का है। इसके बाद यह देखना अहम होगा कि चयनित कंपनियां कितनी तेजी से उत्पादन क्षमता स्थापित करती हैं और भारत में रेयर अर्थ मैग्नेट की पूरी वैल्यू चेन को किस हद तक विकसित किया जा सकता है।
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