नई दिल्ली: राजस्थान रॉयल्स की पूर्व हिस्सेदारी को लेकर लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद में बिजनेसमैन राज कुंद्रा को बड़ा झटका लगा है। इंग्लैंड और वेल्स के हाई कोर्ट ने उन्हें इमर्जिंग मीडिया वेंचर्स (EMV) को 4.94 मिलियन अमेरिकी डॉलर ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने उन्हें भारत में इस हिस्सेदारी से जुड़े किसी भी नए कानूनी विवाद को आगे बढ़ाने से स्थायी रूप से रोक दिया है।
यह फैसला ईएमवी के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह निर्णय उस समय आया है जब राजस्थान रॉयल्स में ईएमवी की कंट्रोलिंग हिस्सेदारी हाल ही में अरबपति लक्ष्मी मित्तल के नेतृत्व वाले निवेशक समूह को बेची जा चुकी है। इस निवेशक समूह में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला भी शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 1.65 बिलियन डॉलर की यह डील आईपीएल इतिहास की सबसे बड़ी फ्रेंचाइजी डील्स में गिनी जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद राजस्थान रॉयल्स में राज कुंद्रा की 11.7 प्रतिशत हिस्सेदारी से जुड़ा है। कुंद्रा का आरोप था कि उन्हें अपनी हिस्सेदारी टीम की वास्तविक कीमत से काफी कम मूल्य पर बेचने के लिए मजबूर किया गया था। इसी आधार पर उन्होंने इस साल भारत में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
उन्होंने सार्वजनिक रूप से ईएमवी और उसके सह-संस्थापक मनोज बडाले पर धोखाधड़ी और महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाने के आरोप लगाए थे। साथ ही बीसीसीआई और अन्य संबंधित संस्थाओं के समक्ष शिकायत दर्ज कराने तथा राजस्थान रॉयल्स की हिस्सेदारी बिक्री प्रक्रिया को रोकने की भी कोशिश की थी।
कोर्ट ने क्यों खारिज किए राज कुंद्रा के दावे?
ईएमवी ने अदालत में दलील दी कि राज कुंद्रा की ओर से की गई कानूनी कार्रवाई 2019 के सेटलमेंट एग्रीमेंट का सीधा उल्लंघन है। इस समझौते के तहत कुंद्रा ने 4.94 मिलियन अमेरिकी डॉलर स्वीकार कर राजस्थान रॉयल्स के शेयरों पर अपने सभी अधिकार छोड़ने पर सहमति दी थी।
समझौते में यह भी स्पष्ट किया गया था कि भविष्य में इस विवाद से जुड़ा कोई भी मामला केवल इंग्लैंड की अदालतों के अधिकार क्षेत्र में ही सुना जाएगा। इसके बावजूद भारत में दायर याचिकाओं को ईएमवी ने समझौते का उल्लंघन बताया।
जस्टिस ग्रिफिथ्स ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस ग्रिफिथ्स ने अपने फैसले में कहा कि राज कुंद्रा के पास ईएमवी के दावे का सफल बचाव करने की “कोई वास्तविक संभावना नहीं” है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कुंद्रा के इस आरोप का कोई प्रमाण नहीं मिला कि 2015 का शेयर ट्रांसफर एग्रीमेंट या 2019 का सेटलमेंट एग्रीमेंट धोखाधड़ी या अनुचित तरीके से कराया गया था।
कोर्ट ने माना कि दोनों समझौतों पर राज कुंद्रा ने अपने कानूनी सलाहकारों की मौजूदगी में स्वेच्छा से हस्ताक्षर किए थे।
भारत में कानूनी कार्रवाई पर स्थायी रोक
हाई कोर्ट ने जनवरी में जारी एंटी-सूट इंजंक्शन को भी स्थायी बना दिया है। इसके तहत राज कुंद्रा और उनकी कंपनी कुकी इन्वेस्टमेंट्स को मुंबई में लंबित कंपनी याचिका आगे बढ़ाने या भारत में इस विवाद से संबंधित कोई नई कानूनी कार्रवाई शुरू करने से रोक दिया गया है।
अदालत ने कहा कि ऐसा करना 2019 के समझौते में शामिल एक्सक्लूसिव इंग्लिश जूरिस्डिक्शन क्लॉज का उल्लंघन होगा।
ब्याज सहित चुकानी होगी पूरी राशि
फैसले में अदालत ने राज कुंद्रा और कुकी इन्वेस्टमेंट्स को संयुक्त रूप से 4.94 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सेटलमेंट राशि ब्याज सहित चुकाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी माना कि बार-बार हुए उल्लंघनों के कारण ईएमवी ने सेटलमेंट एग्रीमेंट को समाप्त करने का फैसला उचित तरीके से लिया था।
2015 में राजस्थान रॉयल्स से अलग हुए थे राज कुंद्रा
गौरतलब है कि 2015 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आईपीएल सट्टेबाजी मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद राज कुंद्रा राजस्थान रॉयल्स से अलग हो गए थे। इसके बाद उनकी हिस्सेदारी के हस्तांतरण और सेटलमेंट को लेकर दोनों पक्षों के बीच वर्षों तक कानूनी विवाद चलता रहा, जिसका ताजा फैसला अब इंग्लैंड की अदालत ने ईएमवी के पक्ष में सुनाया है।


