पुणे में ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग के नाम पर साइबर ठगों ने एक बार फिर बड़ा फर्जीवाड़ा किया है। अलग-अलग मामलों में तीन लोगों से कुल ₹88.2 लाख की ठगी सामने आई है। इन घटनाओं ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म के नाम पर चल रहे फ्रॉड कितने संगठित और खतरनाक हो चुके हैं।
यह मामले लोहेगांव और बारामती ग्रामीण पुलिस स्टेशन में दर्ज किए गए हैं और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
कैसे हुआ पहला बड़ा फ्रॉड?
सबसे बड़ा मामला बारामती तालुका का है, जहां एक सहकारी चीनी फैक्ट्री के 57 वर्षीय अधिकारी और उनके एक मित्र को मिलाकर ₹68.2 लाख की चपत लगाई गई।
पीड़ित के अनुसार, फरवरी में उन्हें एक अनजान व्यक्ति का संदेश मिला, जिसने धीरे-धीरे उन्हें एक अन्य व्यक्ति से जोड़ दिया। इस व्यक्ति ने खुद को शेयर ट्रेडिंग विशेषज्ञ बताते हुए उन्हें निवेश के लिए प्रेरित किया।
इसके बाद उन्हें एक लिंक भेजा गया और एक “ट्रेडिंग अकाउंट” खोलने को कहा गया। शुरुआत में पीड़ित ने छोटी रकम लगाई, जिस पर उन्हें ₹5,000 का मुनाफा भी दिखाया गया और वह रकम उनके बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई।
यही शुरुआती “ट्रस्ट बिल्डिंग ट्रिक” इस पूरे फ्रॉड का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था।
कैसे फंसते गए पीड़ित?
जैसे-जैसे भरोसा बढ़ा, दोनों व्यक्तियों ने मिलकर अलग-अलग बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर करना शुरू कर दिया। फरवरी से मार्च के बीच कुल ₹68.2 लाख की रकम साइबर ठगों के खातों में चली गई।
जब लंबे समय तक कोई बड़ा मुनाफा नहीं मिला और पैसे निकालने की कोशिश की गई, तो ठगों ने और पैसे मांगने शुरू कर दिए। उन्होंने यहां तक कहा कि ₹26 लाख और जमा करने पर ही पूरी राशि वापस मिलेगी।
इसी मांग ने पीड़ितों को शक में डाला और उन्हें समझ आया कि वे एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए बैंक ट्रांजैक्शन की डिटेल्स मांगी हैं।
दूसरा मामला: महिला से ₹20 लाख की ठगी
इसी तरह का एक अन्य मामला लोहेगांव से सामने आया है, जहां 57 वर्षीय महिला से ₹20 लाख की ठगी की गई।
ठगों ने उसे एक प्रसिद्ध निजी सिक्योरिटीज फर्म के नाम पर एक ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा। शुरुआती भरोसा बनाने के लिए उसे ₹10,900 का “प्रॉफिट” भी दिखाया गया, जो वास्तव में फर्जी ट्रांजैक्शन था।
धीरे-धीरे महिला से अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए गए। बाद में जब उसने अपनी निवेशित राशि निकालने की कोशिश की, तो वह ऐसा नहीं कर सकी। तभी उसे एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार बन चुकी है।
इसके बाद उसने ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई और पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
साइबर फ्रॉड का नया पैटर्न
इन दोनों मामलों में एक पैटर्न साफ दिखाई देता है:
- अनजान मैसेज या कॉल से संपर्क
- छोटे मुनाफे का दिखावा
- फर्जी ऐप या लिंक के जरिए निवेश
- शुरुआती विश्वास बनाने के बाद बड़ी रकम की मांग
- पैसे निकालने के लिए और निवेश का दबाव
यह पूरा मॉडल “इन्वेस्टमेंट स्कैम” की श्रेणी में आता है, जो अब तेजी से भारत में बढ़ रहा है।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने दोनों मामलों में संबंधित बैंक खातों की जानकारी मांगी है और साइबर सेल को भी जांच में शामिल किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के गिरोह अक्सर अलग-अलग राज्यों और देशों से ऑपरेट करते हैं, जिससे इनकी ट्रेसिंग मुश्किल हो जाती है।
निष्कर्ष
पुणे के ये मामले एक बार फिर चेतावनी देते हैं कि ऑनलाइन निवेश के नाम पर मिलने वाले आकर्षक ऑफर्स हमेशा सुरक्षित नहीं होते। थोड़े से लाभ के लालच में बड़ी रकम गंवाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान लिंक, ऐप या व्यक्ति पर भरोसा करने से पहले पूरी जांच जरूरी है, वरना छोटी गलती बड़ी आर्थिक हानि में बदल सकती है।
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