भारत सरकार ने चीन से आने वाले एक प्रमुख कृषि उत्पाद ग्लुफोसिनेट (Glufosinate) और उसके विभिन्न सॉल्ट्स के आयात पर निगरानी और सख्ती बढ़ा दी है। सरकार को आशंका है कि कुछ चीनी निर्यातक पहले से लागू एंटी-डंपिंग ड्यूटी के प्रभाव को कम करने के लिए निर्यात कीमतों में बदलाव या अन्य मूल्य निर्धारण रणनीतियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में घरेलू उद्योगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आयात की टेम्परेरी कस्टम्स असेसमेंट (अस्थायी सीमा शुल्क मूल्यांकन) शुरू कर दी गई है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत लगातार घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और सस्ते आयात के कारण स्थानीय कंपनियों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए व्यापारिक उपायों को मजबूत कर रहा है।
ग्लुफोसिनेट के आयात पर बढ़ी निगरानी
राजस्व विभाग (Revenue Department) ने देशभर के कस्टम्स अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि चीन से आने वाले ग्लुफोसिनेट और उसके सॉल्ट्स के सभी आयात का फिलहाल अस्थायी मूल्यांकन किया जाए। यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी जब तक डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) द्वारा शुरू की गई एंटी-एब्जॉर्प्शन समीक्षा पूरी नहीं हो जाती।
इस अवधि के दौरान आयातकों को मौजूदा एंटी-डंपिंग ड्यूटी का भुगतान करना होगा। इसके अलावा उन्हें संभावित अतिरिक्त ड्यूटी को ध्यान में रखते हुए फाइनेंशियल गारंटी भी जमा करनी होगी। यदि समीक्षा में यह साबित होता है कि डंपिंग के प्रभाव को कम करने के लिए अनुचित मूल्य निर्धारण किया गया है, तो अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है।
क्यों उठाया गया यह कदम?
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि मई 2025 में लागू एंटी-डंपिंग ड्यूटी के बाद कुछ चीनी निर्यातकों ने अपने उत्पादों की निर्यात कीमतों में बदलाव किया। इसका उद्देश्य एंटी-डंपिंग शुल्क के प्रभाव को कम करना हो सकता है।
यदि ऐसा पाया जाता है, तो इससे भारत के घरेलू उत्पादकों को मिलने वाली सुरक्षा कमजोर पड़ सकती है। इसी कारण DGTR ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की है और जांच पूरी होने तक एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
ग्लुफोसिनेट क्या है?
ग्लुफोसिनेट एक ब्रॉड-स्पेक्ट्रम हर्बिसाइड (खरपतवारनाशी) है, जिसका उपयोग बड़े पैमाने पर व्यावसायिक खेती में किया जाता है। यह खेतों में उगने वाले अवांछित खरपतवारों को नियंत्रित करने में प्रभावी माना जाता है।
इसका उपयोग मुख्य रूप से इन फसलों में किया जाता है:
- मक्का (Corn)
- सोयाबीन (Soybean)
- कपास (Cotton)
- कैनोला (Canola)
- अन्य व्यावसायिक कृषि फसलें
भारत में भी आधुनिक खेती में हर्बिसाइड की मांग लगातार बढ़ रही है, इसलिए इस उत्पाद का आयात महत्वपूर्ण माना जाता है।
घरेलू उद्योग को मिलेगा संरक्षण
सरकार का मानना है कि यदि विदेशी कंपनियां कृत्रिम रूप से कम कीमतों पर उत्पाद बेचती हैं, तो भारतीय निर्माताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में एंटी-डंपिंग ड्यूटी का उद्देश्य निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनाए रखना और घरेलू उद्योगों को संरक्षण देना होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो ग्लुफोसिनेट के आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है।
ब्यूटाइल अल्कोहल पर भी बढ़ाई गई एंटी-डंपिंग ड्यूटी
सरकार ने एक अन्य अधिसूचना में अमेरिका, मलेशिया और दक्षिण अफ्रीका से आयात होने वाले ब्यूटाइल अल्कोहल पर लागू एंटी-डंपिंग ड्यूटी को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ा दिया है।
इस कदम का उद्देश्य भी घरेलू रासायनिक उद्योग को सस्ते आयात से होने वाले नुकसान से बचाना है और भारतीय निर्माताओं को प्रतिस्पर्धात्मक माहौल उपलब्ध कराना है।
CETA के तहत जानवरों के आयात पर मिली राहत
सरकार ने शनिवार को एक और महत्वपूर्ण सीमा शुल्क अधिसूचना जारी की। इसके अनुसार भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के तहत अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों, विशेष आयोजनों और चुनिंदा सरकारी कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए लाए जाने वाले कुछ विशेष जानवरों को कस्टम्स ड्यूटी और इंटीग्रेटेड GST से छूट दी जाएगी।
इस फैसले का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय आयोजनों और द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देना है।
भारत की व्यापार नीति का बड़ा संकेत
हाल के वर्षों में भारत सरकार लगातार उन उत्पादों पर सख्त रुख अपना रही है जिनके आयात से घरेलू उद्योग प्रभावित हो सकता है। चीन से आने वाले विभिन्न रसायनों, स्टील, केमिकल्स और कृषि उत्पादों पर पहले भी एंटी-डंपिंग जांच और शुल्क लगाए जा चुके हैं।
ग्लुफोसिनेट मामले में की गई यह कार्रवाई भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। यदि DGTR की अंतिम जांच में डंपिंग या एंटी-डंपिंग नियमों को दरकिनार करने के प्रमाण मिलते हैं, तो आने वाले समय में इस उत्पाद पर अतिरिक्त शुल्क लागू किया जा सकता है। इससे भारतीय निर्माताओं को प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी और आयात व्यवस्था पर भी अधिक पारदर्शिता आएगी।


