Axis Mutual Fund Front Running Case: भारतीय शेयर बाजार के इतिहास के चर्चित फ्रंट-रनिंग मामलों में से एक एक्सिस म्यूचुअल फंड केस में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने बड़ा फैसला सुनाया है। मार्केट रेगुलेटर ने पूर्व चीफ डीलर विरेश जोशी, दुबई के ट्रेडर प्रिजेश कुरानी समेत कुल 21 लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए ₹7.5 करोड़ का जुर्माना लगाया है। साथ ही विरेश जोशी और प्रिजेश कुरानी को 7 साल के लिए शेयर बाजार से प्रतिबंधित (Ban) कर दिया गया है।
SEBI की जांच में सामने आया कि गोपनीय ट्रेडिंग जानकारी का गलत इस्तेमाल कर आरोपियों ने करीब ₹18.33 करोड़ का अवैध मुनाफा कमाया। नियामक ने इस मामले को बाजार की पारदर्शिता और निवेशकों के भरोसे पर गंभीर हमला बताया है।
क्या है पूरा मामला?
SEBI की जांच के अनुसार, सितंबर 2021 से मार्च 2022 के बीच विरेश जोशी एक्सिस म्यूचुअल फंड में चीफ डीलर के पद पर कार्यरत थे। इस दौरान उन्हें फंड द्वारा किए जाने वाले बड़े खरीद और बिक्री के ऑर्डर की गोपनीय जानकारी पहले से उपलब्ध रहती थी।
जांच में पाया गया कि उन्होंने यह संवेदनशील जानकारी दुबई में रहने वाले ट्रेडर प्रिजेश कुरानी तक पहुंचाई। इसके बाद कुरानी ने अपने नेटवर्क के जरिए संबंधित शेयरों में पहले ही ट्रेडिंग कर ली और जब एक्सिस म्यूचुअल फंड के बड़े ऑर्डर बाजार में आए तो कीमतों में हुए बदलाव का फायदा उठाकर करोड़ों रुपये का अवैध लाभ कमाया गया।
कई अकाउंट्स के जरिए किया गया ऑपरेशन
SEBI के मुताबिक यह पूरा ऑपरेशन बेहद सुनियोजित तरीके से चलाया गया। प्रिजेश कुरानी ने अपने रिश्तेदारों, सहयोगियों और अन्य संस्थाओं के नाम पर मौजूद कई ट्रेडिंग अकाउंट्स का इस्तेमाल किया।
इन खातों के जरिए:
- एक्सिस म्यूचुअल फंड के बड़े ऑर्डर आने से ठीक पहले शेयर खरीदे या बेचे गए।
- फंड के ऑर्डर से कीमतों में बदलाव आने के बाद पोजिशन क्लोज कर मुनाफा कमाया गया।
- इस पूरी प्रक्रिया को SEBI ने फ्रंट-रनिंग माना।
SEBI ने बताया बेहद गंभीर मामला
SEBI के फुल-टाइम मेंबर बीजू एस ने अपने 146 पन्नों के आदेश में कहा कि विरेश जोशी केवल जानकारी लीक करने वाले व्यक्ति नहीं थे, बल्कि पूरी योजना के मुख्य संचालक थे।
आदेश के अनुसार उन्होंने:
- पूरी रणनीति तैयार की।
- दुबई के ट्रेडर के साथ समन्वय किया।
- ट्रेडिंग गतिविधियों को निर्देशित किया।
- पूरे नेटवर्क का संचालन किया।
SEBI ने कहा कि इस मामले में अवैध कमाई अन्य कई फ्रंट-रनिंग मामलों की तुलना में काफी अधिक रही।
दुबई की कंपनी के जरिए छिपाया गया पैसों का ट्रेल
जांच में यह भी सामने आया कि अवैध कमाई के पैसों को छिपाने के लिए दुबई स्थित एक कंपनी का इस्तेमाल किया गया।
SEBI के अनुसार यह कंपनी कथित तौर पर:
- अवैध कमाई को ट्रांसफर करने,
- पैसों के स्रोत को छिपाने,
- और पूरी योजना को संचालित करने के उद्देश्य से बनाई गई थी।
जांच के दौरान विरेश जोशी ने भी स्वीकार किया कि इस फ्रंट-रनिंग योजना से उन्होंने करीब ₹18.33 करोड़ का लाभ कमाया था। SEBI ने इस स्वीकारोक्ति को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य माना।
1.28 करोड़ निवेशकों के हितों पर असर
SEBI ने अपने आदेश में कहा कि 31 मार्च 2022 तक एक्सिस म्यूचुअल फंड के पास लगभग 1.28 करोड़ निवेशक खातों का प्रबंधन था।
इतने बड़े निवेशक आधार वाले म्यूचुअल फंड में यदि गोपनीय ट्रेडिंग जानकारी का दुरुपयोग होता है तो इससे:
- बाजार की निष्पक्षता प्रभावित होती है।
- निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ता है।
- पूंजी बाजार की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
इसी वजह से नियामक ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई को जरूरी बताया।
फ्रंट-रनिंग क्या होती है?
फ्रंट-रनिंग (Front Running) वह अवैध गतिविधि है जिसमें किसी ब्रोकर, फंड मैनेजर या डीलर को बड़े संस्थागत निवेशक के आगामी ऑर्डर की पहले से जानकारी होती है। वह इस गोपनीय सूचना का इस्तेमाल करते हुए उसी शेयर में पहले ट्रेड कर लेता है और बाद में बड़े ऑर्डर के कारण कीमत बदलने पर मुनाफा कमा लेता है।
यह गतिविधि निवेशकों के हितों के खिलाफ मानी जाती है और भारतीय प्रतिभूति कानूनों के तहत गंभीर उल्लंघन है।
SEBI की कार्रवाई एक नजर में
- कुल 21 लोगों पर कार्रवाई।
- ₹7.5 करोड़ का सामूहिक जुर्माना।
- विरेश जोशी और प्रिजेश कुरानी पर 7 साल का बाजार प्रतिबंध।
- जांच में ₹18.33 करोड़ की अवैध कमाई का खुलासा।
- कई रिश्तेदारों और सहयोगियों के ट्रेडिंग अकाउंट्स का इस्तेमाल।
- दुबई की कंपनी के जरिए पैसों का ट्रेल छिपाने के आरोप।
निवेशकों के लिए क्या संदेश?
SEBI की यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि भारतीय पूंजी बाजार में इनसाइडर ट्रेडिंग और फ्रंट-रनिंग जैसी गतिविधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। नियामक का उद्देश्य निवेशकों का भरोसा बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि सभी प्रतिभागियों को समान अवसर मिलें। ऐसे मामलों में कड़ी सजा भविष्य में बाजार में अनुचित लाभ उठाने की कोशिश करने वालों के लिए भी एक मजबूत चेतावनी मानी जा रही है।


